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इस फ़िल्म में दिखाए गए सभी पात्र एवं घटनाएँ काल्पनिक हैं
सुष्मि!
सुष्मि!
विक्रम!
मैं यहाँ हूँ, विक्रम!
विक्रम!
मैं यहाँ हूँ, विक्रम!
प्लीज़ जल्दी आओ, विक्रम। मैं यहाँ हूँ।
-विक्रम! -सुष्मि!
-सुष्मि! ए, खोल दे! ए, खोल उसे! -विक्रम, मुझे यहाँ से बाहर निकालो!
-खोल उसे! -विक्रम!
-सुष्मि! सुष्मि! -प्लीज़, मुझे यहाँ से बाहर निकालो!
-ए, खोल! खोल उसे! -विक्रम!
नहीं!
-सुष्मि! -विक्रम!
-सुष्मि! -मुझे बाहर निकालो प्लीज़, विक्रम!
-खोल! -प्लीज़… प्लीज़ ऐसा मत करो।
-ओए खोल! -प्लीज़ मुझे यहाँ से बाहर निकालो!
मुझे छोड़ दो! विक्रम। विक्रम, मुझे यहाँ से बाहर निकालो!
-खोल, खोल। -ऐसा मत करो, प्लीज़।
प्लीज़…
-सुष्मि! -विक्रम!
-खोल दे! खोल दे! -विक्रम।
नहीं…
नहीं!
-नहीं! -विक्रम!
प्लीज़…
नहीं!
एक डॉक्टर के तौर पे नहीं, दोस्त के तौर पे कह रही हूँ,
ये जॉब छोड़ दो।
इलाज नहीं है, इसलिए राय दे रही हो?
इलाज और राय, दोनों ही तुम्हारे भले के लिए हैं।
मैं डिपार्टमेंट नहीं छोड़ सकता।
तुम समझते क्यों नहीं हो, विक्रम?
तुम्हारी बीमारी बुरे अनुभव से होने
वाले तनाव का एक क्लासिक केस है।
तुम्हारे वाइटल अंग प्रभावित हो रहे हैं।
तुम्हारा बीपी आसमान छू रहा है।
-जल्दी कुछ नहीं किया तो-- -स्ट्रोक आ सकता है ना?
पता है।
मुझे वैलियम का पर्चा दो और काम पे जाने दो।
तुम दुनिया के इकलौते मरीज़ होंगे,
जो डॉक्टर को बता रहा है कौन सी दवाई देनी है।
मुझे लगा था मैं एक दोस्त से बात कर रहा हूँ।
इसीलिए समझा रही हूँ।
तुम्हारा आज का जॉब प्रोफाइल तुम्हारे अतीत की यादों को बार-बार सामने ला रहा है।
और इसीलिए तुम्हें ये पैनिक अटैक आ रहे हैं।
ठीक है, तुम नौकरी नहीं छोड़ सकते, कम से कम डेस्क जॉब ले लो।
विक्रम…
डॉक्टर रीतिका जांगिड़, साइकेट्रिस्ट
उम्मीद है, ये बात हम दोनों के बीच में रहेगी।
तू आगे चल।
पुलिस
हे, विक्रम।
सर, गुड मॉर्निंग।
पहले, इसे बंद कराओ।
हैलो!
हैलो, बंद कर।
पक्की जानकारी है, सर। डेड बॉडी इसी लोकेशन पे है।
और आपके अक्षय सर अभी तक ढूँढ नहीं पाए?
तेरी ज़रूरत नहीं है यहाँ।
-निकलो। -मैं ऑर्डर सिर्फ शेखावत सर से लेता हूँ।
शेखावत सर?
सर।
हाँ सर, पर…
मैं जानता हूँ, सर, पर केस मैं हैन्डल कर सकता हूँ।
चाय मँगवा।
छह घंटे से ढूँढ रहे हैं, सर।
अब तो स्निफर डॉग भी थक चुके हैं।
अच्छा हो गया, आप आ गए।
इस तरफ, सर।
ये साहब घासफूस क्यों तोड़ रहे हैं?
-नौटंकी है और कुछ नहीं है। - साहब।
ड्रामा कंपनी में भर्ती हो जाना चाहिए इसको।
क्रॉस करना मना है
ना शेव करता है और ना ढंग के कपड़े पहनता है।
किस एंगल से पुलिसवाला लगता है ये?
शायद वो भी यही था।
मेरा मतलब है कि…
आपके डिपार्टमेंट के लोग घुलते-मिलते रहते हैं ना भेष बदल के।
ये जंगली घास को ध्यान से देखिए।
ये तीन अलग-अलग टाइप की घास है।
दिख रही है सबको?
-जी, सर। -जी, सर।
अभी आप लोग चारों तरफ फैल जाइए।
और जहाँ पे भी ये तीनों घास एक साथ उग रही है, मुझे इन्फॉर्म कीजिए फौरन।
चलो, भाई, सब फैल जाओ।
एक मिनट, शिव।
शेखावत: तुम अक्षय से मिले?
कोई लड़ाई मत करना, प्लीज़
मैं तुम्हारा सीनियर हूँ, इमोजी भेजना छोड़कर टाइप किया करो
साहब, चाय।
नाम क्या है तुम्हारा?
शेरु, साहब।
-स्कूल जाता है? -हाँ।
सच बोल, वर्ना थाने ले जाऊँगा।
जाता है?
अपने मालिक को भेज यहाँ।
जा।
साहब!
-इधर खोदो। - जी, साहब।
हे!
-आराम से। -जी।
फॉरेंसिक से कौन है?
सर।
आप ठीक हैं?
विक्रम।
बॉडी कैसे ढूँढी?
तुझे पता है किसान अपने खेतों से जंगली घास क्यों निकाल देते हैं?
नहीं।
जंगली घास ज़मीन के नीचे कुछ ऐसे जैविक रसायन छोड़ते हैं,
जिससे वहाँ कुछ और नहीं उग सकता।
तो?
लेकिन अगर कोई इन जंगली घास के नीचे की मिट्टी खोद दे,
तो ये जैविक रसायन डिस्टर्ब हो जाते हैं।
फिर वहाँ कोई दूसरी घास या कोई पौधा भी उग सकता है।
मतलब, जब तक कोई नीचे की ज़मीन ना खोदे,
एक जगह तीन अलग टाइप की घास नहीं उग सकती।
फॉरेंसिक विभाग जयपुर, राजस्थान
इसे और डिपिक्सलेट करो।
पुलिस को क्लीन इमेज चाहिए।
अपना बेस्ट दो।
मैम साहब बनी फिरती है।
एक्सक्यूज़ मी? कुछ कहा?
कुछ नहीं, मैडम।
औरत से ऑर्डर लेने में तकलीफ है, तो घर जाओ।
यहाँ काम का आदमी चाहिए, नाम का नहीं।
सॉरी, मैडम।
मॉम कैसी हैं?
हालत खराब ही होती जा रही है, यार।
वो कार्डियोलॉजिस्ट दिल्ली के एम्स में शिफ्ट करने के लिए बोल रहा है।
हाँ, तो अच्छा है ना। तेरा भाई भी तो है दिल्ली में।
हाँ, मॉम को वहीं शिफ्ट करना है लेकिन अभी पॉसिबल नहीं है, यार।
स्ट्रेस मत ले।
-और मेरे लिए कुछ हो तो बताना, हाँ? -थैंक्स।
और सपना?
ठीक है?
मस्त है। पूछती रहती है तेरे बारे में।
घर आना। तूने नया घर भी नहीं देखा अभी तक।
हाँ, आऊँगा जल्दी।
डीएनए वैलिडेशन का क्या स्टैटस है?
एक ऐसी टेक्नीक वैलिडेट की गई है जिससे दो घंटे में रिज़ल्ट मिल सकता है।
ज़्यादा है।
एक घंटे में रिज़ल्ट मिले ऐसी टेक्नीक वैलिडेट करनी होगी।
- कोशिश जारी है। - बताती रहना।
ठीक है।
सर, कैसे हैं?
लेट हूँ, बीवी इंतज़ार कर रही है।
लगता है नेहा फिर से तुझे इंतज़ार करा रही है, हाँ?
नहीं-नहीं, आ जाएगी।
- सॉरी। चलो, चलते हैं। -चलो।
सक्सेना सर, आप भी हमारे साथ कॉफी पीने क्यों नहीं आते?
आज तुम्हारे साथ कॉफी पी ली तो ज़िंदगी भर चाय नसीब नहीं होगी।
-बाय। -बाय।
-चलो। - मिलते हैं।
मैं भी निकलता हूँ। तुम लोग इन्जॉय करो।
क्यों? तेरी बीवी भी इंतज़ार कर रही है क्या?
जाने दो, विक्रम। नई-नई शादी हुई है।
इन्जॉय करने दो।
-बाय, रोहित। -बाय।
- मिलते हैं। - ज़रूर।
तुम्हें मेरी कंपनी पसंद नहीं है क्या? कबाब में हड्डी को साथ ले रहे थे?
अरे, दोस्त है।
और तुम भी तो सक्सेना सर को बोल रही थी ना कॉफी के लिए।
मुझे पता था वो चाय पीने ही जाएँगे।
कैसी है जगह?
जगह अच्छी है।
नज़ारा भी।
और कंपनी भी।
एक बार एक स्टूडेंट ने अपने टीचर से पूछा कि क्या ज़्यादा ज़रूरी है,
रास्ता या मंज़िल।
तो पता है टीचर ने क्या बोला?
कंपनी।
तो इसका मतलब है, मुझे तुम्हारी कंपनी से खुश रहना चाहिए।
है ना?
कोई मंज़िल की उम्मीद नहीं करनी चाहिए, राइट?
- मैंने ऐसा-- - दो मिनट, प्लीज़।
यार, जो मैटर करता है, वो हमारे पास है।
सबसे ज़्यादा ट्रस्ट मैटर करता है।
जो तुम्हें मुझपे नहीं है।
ऐसे क्यों बोल रही हो?
तुमने मुझे अपने पास्ट के बारे में अभी तक नहीं बताया।
देखो…
नेहा, मैं बहुत सिम्पल आदमी हूँ।
मुझसे झूठ बोला नहीं जाता और…
सच बोलने की हिम्मत नहीं है।
मुझे नहीं पता, मैं कब बता पाऊँगा।
पर अगर किसी को बताऊँगा ना…
वो सिर्फ तुम ही हो।
ठीक है।
जब तुम्हें ठीक लगे।
मैं तुम्हें फोर्स नहीं कर रही हूँ।
जब तुम्हें ठीक लगे, बता देना।
फिलहाल ऑर्डर करना ठीक लग रहा है।
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