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आपको मालूम है न ये सब क्या है? हम सब यहां क्यों मौजूद हैं?
बाहर रहने के लिए. इसी को बाहर कहते हैं.
बाहर रहने का अपना अलग ही मज़ा है.
लोग कहते हैं, चलो कहीं बाहर चलते हैं.
वो ऐसे ही बात करते हैं.
और देखिए, इस वक़्त हम सब बाहर हैं. कोई भी घर पर नहीं है.
एक भी आदमी घर पर नहीं है. हम सब बाहर हैं.
कुछ लोग हमें ढूंढ़ रहे होंगे. उन्हें नहीं पता हम कहां हैं.
कुछ पता चला? मिल ही नहीं रहा. गया कहां?
मुझे भी नहीं बताया वह कहां जा रहा है. कहीं बाहर गया है.
जब आपको बाहर जाना होता है, तो आप तैयार होते हैं.
अच्छे कपड़े निकालते हैं. है न?
नहाते हैं, तैयार होते हैं...
...पैसे जेब में रखते हैं, दोस्तों के साथ कार में मनपसंद जगह पहुंचते हैं.
टाइम पास करते हैं. और फिर...
कहते हैं, “अब घर चलना चाहिए.”
बाहर जाने के बाद, लौटने की जल्दी.
आप सोना चाहते हैं. अगले दिन सुबह उठने के बाद आप फिर बाहर जाना चाहते हैं.
आप ज़िंदगी में कहीं भी हों...
...ये आना-जाना लगा रहता है.
मेरे खयाल से ये बटन बहुत गलत जगह पर लगा है.
किसी शर्ट की असली खूबसूरती उसके दूसरे बटन की वजह से ही होती है.
ये देखो, कितना ऊपर है.
कितनी अजीब जगह लगा है. लगता है जैसे अब भी तुम अपनी मां के साथ रहते हो.
कह चुके?
सच कह रहा हूं. खरीदने से पहले पहन के देख लेते.
दरअसल मुझे इसका जामुनी रंग पसंद आ गया.
तब मैंने इसके बटन के बारे में सोचा ही नहीं.
ओह, सोचा ही नहीं!
उस वक़्त नहीं.
अच्छा तो मुझे ये बताओ फिर इस बटन के बारे में तुम्हें कब पता चला.
मि. साइनफैल्ड, मि. कोस्टेंजा.
इसमें कैफीन नहीं है न? उसका नारंगी निशान कहां है?
नहीं है. मैं अंदाज से दे रही हूं.
बिना कैफीन बायें, रेगुलर दायें.
बिना कैफीन बायें, रेगुलर दायें.
ये कोई आसान काम नहीं है.
बस करो! सिर्फ एक कप कॉफी ही तो है.
क्लेयर बहुत समझदार वेट्रेस है.
बेशक. तुम्हें कॉफी के नशे में कौन देखना चाहता है?
अच्छा, तुम वह कल वाला शो क्यों नहीं कर रहे?
दरअसल कल एक लड़की मेरे घर आ रही है.
एक सैकंड, एक सैकंड.
अब पूछोगे कौन आ रहा है? कौन-सी लड़की आ रही है?
मैंने तुम्हें लौरा के बारे में बताया तो था, जिससे मैं मिशिगन में मिला था.
-कब बताया? -मुझे लगा मैंने बता दिया.
वो राजनीतिशास्त्र पढ़ाती है...
...लैसिंग में जिस रात मेरा शो था, मैं वहां उससे मिला था.
-दूध कहां है? -एक मिनट.
वह कैसी... वह कैसी है?
अरे वह बहुत कमाल की है. बहुत प्यार से पेश आती है.
बहुत होशियार है और खूबसूरत भी.
और जहां तक बातचीत का सवाल है...
उससे बात करके वैसा ही लगा जैसा तुम्हारे साथ लगता है.
हालांकि वह तुमसे बहुत बेहतर है.
उसके बाद क्या हुआ?
कुछ भी नहीं. लेकिन मज़ा आया.
कुछ नहीं हुआ पर... ये तो बढ़िया है.
हां.
तो उसने तुम्हें फोन किया और कहा वो तुम्हारे साथ बाहर जाना चाहती है?
बहुत किस्मतवाले हो, यार.
ऐसा कुछ नहीं है.
मतलब उसने आज सुबह मुझे फोन किया और बोली...
...उसे एक सेमिनार के लिए आना पड़ेगा और वक्त होगा तो मुझसे मिलेगी.
“आना पड़ेगा”?
-“आना पड़ेगा”? -हां, पर...
-“आना पड़ेगा”? -हां, पर...
“और वक्त मिलेगा तो तुमसे मिलेगी”.
“आना पड़ेगा” और “वक्त मिलेगा” तो?
-हां... -नहीं, नहीं.
बुरा मत मानना. लेकिन वह तुमसे नहीं मिलनेवाली.
कैसी बात करते हो? तो उसने मुझे फोन क्यों किया?
मुझे क्या पता. बस, यों ही.
बस यों ही?
-कैसी बात करते हो. -अच्छा ठीक है.
मैं सच नहीं बोलना चाहता था. जानना चाहते हो उसने तुम्हें फोन क्यों किया?
तुम उसके ज़रूरत के दोस्त हो.
तुम दूसरे नम्बर पर हो, ताकि पहली जगह बात नहीं बनी तो...
...उसे कोई नुकसान न हो, उसका काम चलता रहे.
समझ गया. ये तुम्हारे इस बटन का असर है.
क्लेयर, क्लेयर...तुम एक औरत हो न?
आपको कैसे पता चला?
मैं तुमसे एक सवाल पूछना चाहूंगा.
मैं चाहता हूं कि तुम एक औरत के नज़रिये से...
...एक काल्पनिक फोन कॉल के बारे में अपनी राय बताओ.
अरे यार...
तुम इससे ये क्यों पूछ रहे हो? ये क्या बताएगी?
मान लो कोई लड़की मुझे फोन करती है...
वह कहती है वह किसी ज़रूरी काम से...
- ... दफ्तर के काम से न्यू यॉर्क आ रही है! - तुम बहुत अच्छी हो.
और आने के बाद...
...वक्त मिला तो वह मुझसे ज़रूर मिलेगी.
तो क्या वो लड़की मेरे साथ वक्त गुज़ारना चाहती है?
बिलकुल नहीं.
तो फिर उसने फोन क्यों किया?
-बस यों ही. -बस यों ही.
-तो यही सही. -मज़ा आया न?
तुम्हें कुछ नहीं पता तुम कह क्या रहे हो. अब चलो.
मुझे अपने सारे कपड़े ड्रायर से बाहर निकालने हैं.
-मैं तुम्हें कपड़े धोते नहीं देखना चाहता. -अब चलो भी. हर चीज़ को मना नहीं करते.
चलो, मैं थका हुआ हूं.
घबराइए नहीं. मैंने इन्हें थोड़ी कैफीन दे दी थी.
-ठीक हो जाएंगे. -मुझे पता था कुछ गड़बड़ है.
जैरी, मैं तुम्हें कुछ बताना चाहता हूं.
ज़िंदगी में इतना बोर मैं पहले कभी नहीं हुआ.
ज़रा इसे देखो.
इसके पास सब कुछ है. साबुन हैं, स्प्रे हैं...
...फैब्रिक सॉफ्टनर है. ये पहली बार ये सब नहीं कर रहा.
मैं कहीं जाना चाहता हूं, जैरी. मैं शहर से बाहर जाना चाहता हूं.
बहुत बोर हो चुका हूं.
तुम्हें फोन पर उसकी आवाज़ सुननी चाहिए थी.
-किसकी? -लौरा की.
हद हो गयी. हम इस बारे में बात कर चुके हैं.
लेकिन तुम इतने यकीन से कैसे कह सकते हो?
उसने जो इशारे दिये उससे. क्या तुम्हें समझ नहीं आया?
अच्छा ठीक है. क्या उसने तुमसे पूछा कि कल रात तुम क्या कर रहे हो...
-तुम व्यस्त तो नहीं? -नहीं.
उसने तुम्हें आज फोन किया और कल के बारे में कोई प्लान नहीं बनाया.
-ये सब क्या है. कल शनिवार की रात है. -हां.
यानी कुछ नहीं होनेवाला.
तुम्हें यह भी नहीं पता वह किस होटल में ठहरी है.
तुम उसे फोन भी नहीं कर सकते. अब तो समझो, जैरी.
इसे कहते हैं इशारा. इशारा.
-शायद तुम ठीक कहते हो. -‘शायद’ मैं ठीक कहता हूं?
मैं एकदम ठीक कह रहा हूं.
सच बात है.
मुझे तो यह भी नहीं पता वह किस होटल में ठहरी है.
अब वह मुझे फोन भी नहीं करेगी. कितनी बुरी बात है.
होता है, कभी-कभी होता है.
अच्छा सुनो, शायद तुम्हारे कपड़े अब तक धुल चुके होंगे.
ज़रा देखो, वो सूखे हैं या नहीं.
नहीं, नहीं, नहीं... इस चक्र को बीच में मत तोड़ो.
मशीन चल रही है. वह अपना काम कर रही है. उसे अपना काम करने दो.
-कपड़े ज़्यादा सूख जाएंगे. -वो ज़्यादा सूख ही नहीं सकते.
-क्यों नहीं सूख सकते? -जिस तरह वो ज़्यादा गीले नहीं हो सकते.
जब कोई चीज़ गीली होती है, तो वो गीली ही होती है.
मौत के साथ भी कुछ ऐसा ही है.
एक बार आप मरते हैं, तो बस मर जाते हैं.
मान लो तुम मर जाते हो. उसके बाद मैं तुम्हें गोली मार दूं.
तो तुम दोबारा नहीं मरोगे. क्योंकि तुम पहले ही मर चुके हो.
जैसे हम ज़्यादा नहीं मर सकते हैं, वैसे ही कपड़े ज़्यादा सूख नहीं सकते.
और सवाल?
उसने मुझे बताया क्यों नहीं वह कहां ठहरी है?
देखो ये धुल गये. ये देखो.
कपड़ों की ज़िंदगी में सबसे ख़ुशी का दिन वो होता है...
...जिस दिन उनकी धुलाई होती है.
बिलकुल. इसे इस तरह सोचिए. वॉशिंग मशीन कपड़ों का...
...नाइट क्लब होती है.
वहां अँधेरा होता है...हर तरफ बुलबुले उठते हैं...
...कपड़े वहां अपने-अपने तरीके से डांस करते हैं.
कमीज़ कच्छे को पकड़ के कहती है “चलता है क्या नौ से ग्यारह?”
जब आप आ के मशीन का ढक्कन खोलते हैं तो वो सब...
हमारे जुराब हमारे सबसे कमाल के कपड़े हैं.
वो अपनी ज़िंदगी से नफरत करते हैं. बदबूदार पैर बरदाश्त करते हैं.
...दराज़ों में कैद रहते हैं.
बचने की सबसे बढ़िया जगह होती है ड्रायर और वो सब ये जानते हैं.
और वो वाकई वहां बच जाते हैं.
वो कपड़ों की टोकरी में एक रात पहले... योजना बना लेते हैं.
...योजना बना लेते हैं. “ कलड्रायर...मैं जा रहा हूं...
...तुम यहीं इंतज़ार करना.”
ड्रायर का दरवाज़ा खुलता है.
जुराब साइड की दीवार पर छिप के इंतज़ार करता है.
वो प्रार्थना करता है उसपर आपकी नज़र न पड़े और वो आगे बढ़ जाता है.
जुराबों के मुंह पर बटन सिये जाते हैं... कठपुतली के खेल में इस्तेमाल होते हैं.
टेलिविजन पर दिखाया जा रहा है...
... डिटर्जेंट से ख़ून के धब्बे साफ हो रहे हैं.
क्या ये बेहद ख़तरनाक तसवीरें नहीं हैं? ख़ून के धब्बे?
अरे भाई, इस वक़्त आपके पास एक ऐसी टी-शर्ट है जिसपर ख़ून के धब्बे हैं.
इस वक़्त आपको कपड़े साफ करने की ज़रूरत नहीं है.
शायद आपकी छाती में कोई छुरा घुसा है. सबसे पहले तो उसे निकालिए.
अगर तुम्हें मालूम है मैट खेल के दौरान क्या हुआ तो बताना मत.
मैंने टेप कर लिया है. हैलो.
जी नहीं, माफ़ कीजिये. ये गलत नम्बर है.
जी? नहीं...
-हां. -उठ गये?
हां.
लोग सिर्फ सोते नहीं रहते.
तुमने कभी बड़े ट्रकों को गलियों से गुज़रते देखा है?
कोई बात नहीं.
-पता है आज मैट्स मुक़ाबला हार गये. -ये क्या किया तुमने!
कैसलर, मैंने टेप किया था. पूरा खेल टेप किया था.
रात का एक बज रहा है.
मैंने दिन भर किसी से नहीं पूछा क्योंकि रात को ये देखना चाहता था.
ओह, माफ करना. मैं समझा तुम्हें मालूम होगा.
घर में मांस है?
मांस?
मुझे नहीं पता. जाओ, देखो.
खैर, अब बता ही दो खेल के दौरान क्या हुआ?
क्या हुआ?
वो बहुत बुरा खेले. बस यही हुआ.
पता है, मैं ख़ुद वो खेल देखने वहां जानेवाला था.
तुम ख़ुद खेल देखने जानेवाले थे?
दस साल से इस इमारत से तो बाहर निकले नहीं हो.
वो तो है.
-हो गया? -नहीं.
-जब हो जाए तो बता देना. -ज़रूर, ज़रूर.
बाक़ी कल खा लेना.
मुझे लगा कल-परसों मैं यहां नहीं रह सकता.
अब रह सकते हो. वो लड़की नहीं आ रही.
मैंने गलत समझ लिया था.
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