Afwaah

Afwaah (अफ़वाह)

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Afwaah 2023 WEB H264-RBB
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Zveřejněno: 2023-06-30
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यह फ़िल्म एक काल्पनिक रचना है।

इस फ़िल्म में दर्शाए गए सभी नाम, पात्र और घटनाएँ काल्पनिक हैं।

और किसी भी व्यक्ति, जीवित या मृत से कोई भी समानता या सादृश्यता

पूर्णतः संयोगमात्र और अनैच्छिक है।

इस फ़िल्म निर्माण के समय किसी भी जानवर को क्षति नहीं पहुँचाई गई है।

तो जैसा कि आप लोग जानते हैं,

राज्य विधानसभा चुनाव अब आने ही वाले हैं।

और मवेशियों के बेचने और ट्रांसपोर्ट पर लगाए प्रतिबंध को लेकर,

माहौल थोड़ा गर्माया हुआ है।

देखने वाली बात ये रहेगी

कि सरकार इस स्तिथि को कैसे संभालती है।

-क्या इसका कोई असर इलेक्शन के ऊपर पड़ेगा? - जैज़ प्ले करो।

- विक्की बना… -ज़िंदाबाद!

-ज्ञान सिंह… -ज़िंदाबाद!

-विक्की बना… -ज़िंदाबाद!

जैसा कि आप फिलहाल देख सकते हैं,

विक्रम सिंह के नेत्रत्व में राष्ट्रीय विकास

दल की ये रैली कसाई मोहल्ले से गुज़र रही है।

संयम रखो! संयम रखो!

कब तक संयम रखें?

हमने कहा कम से कम हमारी आस्थाओं को हमारे विश्वास को छोड़ दो।

हाथ जोड़के विनती की।

लेकिन बदले में अगर कोई हमारे सर पे चढ़के मूतेगा,

तो कैसे संयम रखेंगे?

-विक्की बना… -ज़िंदाबाद!

-ज्ञान सिंह… -ज़िंदाबाद!

हाल ही में सत्ता के लिए हुए नए गठबंधन के बाद

राष्ट्रीय विकास दल का एक नया चेहरा सामने आया है।

इस रैली में भीड़ के तेवर को देखते हुए, आप साफ अंदाज़ा लगा सकते हैं

कि ये सिर्फ एक रैली नहीं, बल्कि एक शक्ति प्रदर्शन है।

-ज्ञान सिंह… -ज़िंदाबाद!

-विक्की बना… -ज़िंदाबाद!

-ज़िंदाबाद… -अरे, एक सेकंड…

ए! पत्थर कौन मार रहा है?

ब्रेकिंग न्यूज़!

यहाँ विक्की सिंह हुए घायल।

यहाँ की जनता इस हद तक उत्तेजित हो गई है

कि रैली पे पथराव शुरू हो गया है!

और ये बात कि पथराव किसने शुरू किया, आने वाले कई दिनों तक विवादित रहेगी।

डर का माहौल पैदा करने की इस कोशिश को मोहल्ले की जनता ने करारा जवाब दिया है।

आपको कितनी चोट लगी है, विक्की?

जैसा कि आप देख रहे हैं,

विक्की सिंह को अपनी खुद की रैली से उल्टे पाँव वापस लौटना पड़ा!

उनका ये शक्ति प्रदर्शन पूरी तरह से विफल हो चुका है।

आप लोग यहाँ जो देख रहे हैं, ज़ाहिर है अचानक नहीं हुआ है।

इसके पीछे कुछ षड्यंत्र है।

कुछ अफ़वाह है।

यहाँ लोग एक-दूसरे के जान के दुश्मन बन चुके हैं।

लेकिन हम आपको बता दें, इस सिचुएशन में भी,

सिर्फ हमारा चैनल ये ब्रेकिंग न्यूज़ आप तक ला रहा है।

-अबे, तेरी तो! -मुझे छोड़ दो।

प्लीज़…

-मार ना इसको! -मार ना, इसको! मार दे!

फट्टू साला!

ये क्या कर रहे हैं?

लीडरशिप लेक्चर सीरीज़

चिलचिल्लाती धूप, तपती ज़मीन बंजर।

टूटती उम्मीद, तरसती नज़र।

धुँधला-धुँधला हर मंज़र, फिर भी नो फिक्र।

टी-ओएसिस टेलीकॉम आपका हमसफ़र हर सफर में।

प्लीज़ स्वागत कीजिए इनका जो हैं,

एक एडमैन।

हमारे अपने सांवलपुर का लड़का।

राहब एहमद।

बैठ जाओ यार। बैठ जाओ।

ये पूरी तरह से बकवास है।

ये पहला विज्ञापन था, जब मैंने अपनी एजेंसी डेवलप की थी।

और इस बकवास ने मेरी लाइफ चेंज कर दी।

बुरी कहानियों पे यकीन करोगे ना,

तो चोट खाओगे।

कबीर पढ़े हो?

-यस, सर। -यस, सर।

"बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर…"

आप भी कह सकते हैं, आप भी कह सकते हैं। सब कह सकते हैं।

अच्छी कहानियाँ…

मि. राहब अहमद एनसीडी, ओब्लिक ग्रुप

अच्छी कविता, अच्छे विज्ञापन वो हैं जिसमें तर्क हो।

जो आपको उत्तेजित करे। क्यों?

आपको पूछने पे मजबूर करे! क्यों?

इसीलिए, कबीर कहते हैं…

कि "पंथी को छाया नहीं, फल लागे अति दूर।"

सर, अमेरिका में सबकुछ अच्छा चल रहा था तो आप वापस क्यों आ गए?

हाँ, अच्छा खासा चल रहा था।

अंग्रेज़ी मेरी थोड़ी तंग थी, पर ठीक चल रही थी।

दरअसल… एक्सेंट मेरा उतना बुरा नहीं लगता था वहाँ पे लोगों को जितना यहाँ लगता है।

-अच्छा। - नहीं, सही में।

सही में।

तो, एक बार न्यूयॉर्क में…

मैं सबवे से ऑफिस जा रहा था।

तो मेरे आगे वाली सीट पे एक इंडियन अंकल बैठे थे,

अपने पोते के साथ।

तो अगले स्टॉप पे कुछ गुंडे चढ़े।

और अचानक से, उन्होंने इंडियन अंकल को परेशान करना शुरू कर दिया।

उन्होंने क्या कहा वो मैं यहाँ तो रिपीट नहीं कर सकता,

लेकिन उनका कहने का मतलब सिर्फ ये था…

कि "ये तुम्हारी कंट्री नहीं है! वापस जाओ!

मुझे लगा यार, अगली बोगी पे चला जाता हूँ।

लेकिन फिर ख्याल आया…

कि नहीं यार कुछ करना चाहिए।

तो, मैंने अपना मोबाइल उठाया और उनके इस व्यवहार को रिकॉर्ड करने लगा।

मुझे रिकॉर्ड करता देख, वो मुझ पे चिल्लाने लगे।

"क्या बकवास है ये! ये क्या कर रहे हो तुम?"

"स्टॉप रिकॉर्डिंग! स्टॉप रिकॉर्डिंग!"

लेकिन तभी कुछ कमाल का हुआ।

एक और पैसेंजर ने फ़ोन उठाया और रिकॉर्ड करने लगा।

धीरे-धीरे पूरा डब्बा उनकी इस हरकत को रिकॉर्ड करने लगा।

विश्वास कीजिए…

उनके पास कोई चारा नहीं बचा।

वो सब मुँह छुपाके अगले स्टॉप पे उतर गए।

फिर मैंने सोचा…

कि हरामज़ादे बात तो सही कह रहे थे।

कि मैं वहाँ क्या कर रहा था?

कभी-कभी हरामज़ादे बात तो सही करते हैं।

तो, फर्स्ट वर्ल्ड कंट्री में सेकंड-क्लास सिटीजन की तरह रहने से अच्छा है

कि हम छोटी-छोटी कोशिशें

अपने लोगों की लाइफ बेहतर बनाने के लिए करें।

तो, अब मैं यहाँ हूँ।

ज्ञान सिंह की जय!

चलो, चलो!

ज्ञान सिंह की जय!

आपको देर हो गई, साहब। हुकुम सो गए।

ब्रांड इम्पैक्ट

राष्ट्रीय विकास दल की रैली में

विक्रम सिंह की जुबान आग उगल रही थी।

इस तेज़ी से उभरते हुए युवा नेता से ऐसे तेवर की उम्मीद किसी को नहीं थी।

-इस दुकान के बंद शटर के पीछे -

क्या हुआ, ये हम आपको दिखा तो नहीं सकते।

क्योंकि शटर जब खुला,

तो वहाँ कसाई की बेजान लाश मिली।

और उसके पास उसकी सिसकती हुई बीवी।

जिसकी आँखें ये पूछ रही थीं… कि आखिर उनका कसूर क्या था।

और आप जिस इंसान को यहाँ देख रहे हैं…

हरामज़ादा

क्या चाहिए?

सावलपुर वाली घटना पूरे न्यूज़ में है, निवी।

उस विडिओ में 340,000 बार तुम्हारे मंगेतर का ज़िक्र है।

तो?

तो, क्या एक हरामज़ादे को छोड़के दूसरे हरामज़ादे से शादी करेगी?

बकवास बंद करो, रितेश!

कैटरर फाइनल कर दो ना?

दो दिन से ऑप्शन दिखा रहे हैं।

बाहर निकलो, सारे।

महिंदर! बहरे हो क्या?

बाहर निकल!

ये जो शख्स यहाँ हाथ जोड़े अपनी जान की भीख माँग रहा है…

इसके बारे में कई अफवाहें हैं।

क्या चंदन सिंह ने ही इतनी बेरहमी से मारा है?

क्या रिसर्च चल रही है भई?

क्या ये विक्रम सिंह का भड़काऊ भाषण है इसकी मौत का असली ज़िम्मेदार…

"सावलपुर में बढ़ती कट्टरता।"

क्या हो रहा है, विक्की?

-क्या कर रहे हो तुम? - बस!

- बंद करो इसे! -क्या-क्या बंद करोगे?

क्विटर बंद करा दोगे?

पूरे सोशल मीडिया पर तहलका मचा हुआ है, विक्की।

मुझे दिल्ली से इतने कॉल आ रहे हैं सवाल लिये,

और मेरे पास कोई जवाब नहीं है, क्योंकि ये बहुत भयानक है!

भीख माँग रहा था वो बार-बार! हाथ जोड़ रहा था!

अरे यार!

ये बहुत गलत हुआ।

बहुत गलत हुआ।

हम दिल्ली में बैठे मुट्ठी भर स्वघोषित एक्टिविस्ट को जवाबदेह क्यों हैं?

क्योंकि मेरे मंगेतर पार्टी के फ्यूचर डेप्युटी लीडर हैं।

समझ आया?

अरे यार, निवी। कभी-कभी चीज़ें हो जाती हैं।

तुम्हें पता है।

तुम्हारा क्या मतलब है, कभी-कभी चीज़ें हो जाती हैं?

एक आदमी मर चुका है!

ये कैसे होती हैं? प्लीज़ मुझे समझाओ।

मैं वहाँ स्पीच देने गया था!

- मेरा वो इरादा नहीं था। -प्लीज़।

ये सिर्फ एक ड्रामा है।

- बिल्कुल। - तुम्हें पता है।

और तुम्हारे दोस्त सावलपुर के बारे में क्या जानते हैं?

ये देखा हैं उन्होंने, विक्की!

क्या बोल रहे थे चंदन को तुम यहाँ?

क्या विक्की बना ने चंदन को दी खुली छूट? इतनी आज़ादी?

अफवाहों का बाज़ार गर्म

कुछ नहीं।

विक्की, मैं यहाँ तुम्हारे सारे लड़कों को देख पा रही हूँ।

तुम्हारे सारे छोरे साथियों की शक्लें दिख रही हैं मुझे यहाँ पे!

ईशान, मोंटी, भंवर, और वो कमबख्त चंदन!

तुम मुझे ये बताने की कोशिश कर रहे हो

कि इस विडियो में वो लड़के नहीं हैं?

कि इनमें से कोई भी उस घटना के लिए ज़िम्मेदार नहीं है?

-निवी। -भागो यहाँ से!

निवी, चुप रहो! बहुत हो गया।

मैं क्यों चुप हो जाऊँ?

तुमने मुझसे पूछा कि मेरे दोस्त सावलपुर के बारे में क्या जानते हैं,

तो मैं तुम्हें ये दिखा रही हूँ

कि मेरे दोस्त क्या बल्कि पूरे इंडिया को सावलपुर के बारे में ये पता है।

जाकर पहले अपने बाप से पूछ ना!

उन्होंने गठबंधन किया है।

उनके कहने पे ये जुलूस निकला है।

ये हमारे पार्टनर्स को दिखाने के लिए किया गया था

कि हम उनके साथ हैं।

ये शांतिपूर्ण तरीके से होना था।

-पत्थर वहाँ से चला है पहला। -तो?

मार दोगे उन्हें तुम?

-भाभी सा विक्की ने कोई-- -यार तुम निकलो यहाँ से!

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