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हम किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुँचना चाहते।
मेरे पापा को समर्पित
आज पोलाची
मैं रमा पटनम इलाक़े से बोल रहा हूँ।
एक डकैती का मामला आया है। एक अपराधी को पकड़ा गया है।
कंट्रोल दो स्थिर वॉकी-टॉकी।
आथू पोलाची इलाक़े में रात में कौन चौकसी कर रहा है?
जवाब दो।
मैडम, मैं सथ्यमूर्थी।
-कोई है तुम्हारे साथ? -हाँ, मैडम।
निथिलापुरम के बाहर से किसी मनि का फोन आया।
-तुम कहाँ हो? -हम पास ही हैं।
-कृपया देखो और मदद बुलाओ। -ठीक है मैडम।
इतवार को भी चैन नहीं है।
रात के 2 बजे हमें परेशान करना।
हमने ऐसा तो नहीं सोचा था। देखते हैं क्या चल रहा है।
ठीक है। वहाँ चलो।
-यही घर है? -शायद।
-ये तो भूतिया लग रहा है। -हाँ।
यहाँ ऐसा घर होना ताज्जुब की बात है।
ठीक है, चलो काम ख़त्म करते हैं। तुम गाड़ी में रहना।
ठीक है, सर।
दरवाज़ा खोलो, पुलिस है!
दरवाज़ा खोलो!
हमें अपनी तरह से करना होगा।
दरवाज़ा अपने आप कैसे खुल गया?
रमय्या।
कोई है?
बाहर आओ!
-मैंने कहा, बाहर आओ! -सर।
वो कैसी आवाज़ थी?
-अलमारी खोलो। -सर।
-खोलो। -मुझे डर लग रहा है, सर।
अरे, बेवकूफ़ बिल्ली।
सर, ये आवाज़ कैसी है?
-सर, और आगे नहीं जाते हैं। -देखते हैं क्या है।
-लगता है किसी ने अभी चालू किया है। -क्या?
हाँ, सर।
-स्टेशन को सूचना दो। -ठीक है, सर।
कौन है?
-सर, मैं भाग नहीं सकता। -चलो।
सर?
ये सब क्या है?
सर, मुझे डर लग रहा है। यहाँ से चलते हैं।
-मदद बुलाओ। -हाँ, सर।
सर, यहाँ सिग्नल नहीं आ रहा है।
गाड़ी चालू करो!
जल्दी। चलो।
जल्दी, चलो!
तीन महीने पहले चेन्नई
अरे।
बेवकूफ़।
माफ़ करना, मैडम। बेवकूफ़!
दिखाई नहीं देता?
माफ़ करना। बेवकूफ़!
दिमाग नहीं है!
माफ़ करना, मैडम, मेरी ग़लती है।
-पापा, कहाँ हैं आप? -एक रेस्त्रां में।
-कौनसा माला? -दसवाँ।
अच्छा।
वह अभी आई नहीं है।
वह आ गई!
-आराम से बात करना। -मैं देख लूँगा।
-माँ। -अरे बेटा, आओ बैठो।
बैठो।
इतनी ज़रूरी बात क्या थी?
तुम्हें मेरा दोस्त सोमसेकर याद है?
उसका बेटा। बहुत अच्छा है।
यहाँ अमेरिका से छुट्टी पर आया है।
हमने सोचा तुम दोनों मिल लो।
मैं आपको कई बार बोल चुकी हूँ मैं अभी शादी नहीं करना चाहती।
आप कब समझेंगे?
हैलो, अंकल।
-आओ, बेटा। -आओ, बेटा।
-हैलो। -ये यमुना है।
मेरी बेटी। हमने यमुना को इस बारे में बताया नहीं था।
-इसलिए वह थोड़ा चकित है। -थोड़ा?
तो क्या? ऐसे ही मिलना बेहतर होता है ना?
सही कहा। हाँ।
तो, बेटा, हम चलें? तुम लोग बातें करो।
-हाँ, चलते हैं। -माँ?
अच्छा, अंकल।
शुभकामनाएँ।
आओ, चलें।
-बेटा, आराम से बात करना। -ठीक है।
-अच्छा, अलविदा, बेटा। -ठीक है।
तो यमुना? अपने बारे में कुछ बताओ।
श्री मल्ली, कोई ग़लतफ़हमी हुई है।
मुझे शादी में दिलचस्पी नहीं है।
मेरे माँ-बाप ने ग़लती से ये मुलाक़ात रखी है।
मुझे कोई दिक़्क़त नहीं है।
देखो, यमुना, मैं शादी और एक पत्नी रखने को नहीं मानता हूँ।
हम बस एक बार जीते हैं। और जवानी? बस 15 या 20 साल की।
शादी कर लेते हैं।
हमें एक दूसरे के साथ रहने की ज़रूरत नहीं है।
कोई दबाव नहीं। क्या कहती हो?
देखो, मि. मल्ली, प्रस्ताव के लिए शुक्रिया।
सच है की मुझे शादी में दिलचस्पी नहीं है।
पर इस तरह का सौदा? नहीं!
मैंने तुम्हारी फ़ेसबुक तस्वीरें देखी हैं। ऑफिस के दोस्त, लड़के, पार्टी।
शाद के बाद भी अभी जो कर रही हो, करती रहना।
क्या कहती हो?
सुनो। तुम जा रही हो?
तुम मीडिया में हो ना?
जानता हूँ इस पद के लिए कई लोगों के साथ सोना पड़ा होगा।
इतनी गुस्सा क्यों हो रही हो?
तुम शादी करने के बाद इधर-उधर मुँह मारना चाहते हो।
अगर मैं मना करूँ तो? मेरा मज़ाक उड़ाओगे।
जो औरतें अपने परिवार का सहारा बनना चाहती हैं उनकी राह में तुम जैसे रोड़ा बनते हो!
तुम्हारे माँ-बाप का रिटायरमेंट का पैसा तुम्हें विदेश पढ़ाने में बर्बाद हुआ है।
उसके बदले उन्हें 15 सूअर पालने चाहिए थे!
उनसे एक और शिकायत है।
तुम्हारा नाम सिली की जगह मल्ली क्यों रखा।
बेवकूफ़।
ऐरा
मेल
"मेरी शादी को पाँच साल हो गए हैं।"
अच्छा?
"हमारे दो बच्चे हैं।" ठीक है।
"पर उसने अब तक मुझे चूमा नहीं है।"
क्या!
-तुम्हें ये तय करना है। -ठीक है, सर।
देखो अगर कवर पर इसे डाल सकते हैं।
-इसमें देर नहीं करते हैं। जल्द भेजो। -ठीक है सर।
इतने गुस्से में क्यों हो?
लगता है पूरी ज़िंदगी इन सवालों के जवाव देते गुज़ार दी है।
मैं थक गई हूँ सर।
चाहे तुम्हें पसंद ना भी हो, तुम अच्छा काम कर रही हो। मान लो।
तुम्हारे कई प्रशंसक हैं जो तुम्हारे जवाबों का इंतज़ार करते हैं।
-तुम्हारे प्रशंसक। -आपको लगता है?
वे मेरे जवाब पढ़ घर जाते हैं और अपनी बीवियों से दोबारा लड़ते हैं।
सर, क्यों ना हम अपने अख़बार के लिए एक यूट्यूब चैनल चुरू करें?
रोज़ के समाचार, सीधी ख़बर, फिल्म समीक्षा।
हम इस सलाह कॉलम का वीडियो भी बना सकते हैं।
हमारे दर्शक बढ़ेंगे, हम पूरी दुनिया में प्रसारण कर सकते हैं।
अच्छी कमाई! पीपल मेल 2.0। कैसा रहेगा?
यूट्यूब? यमुना, यहाँ कोई खिलवाड़ नहीं चल रहा है।
हम इंटरनेट पर जाकर अपनी साख़ ख़राब नहीं कर सकते।
सर, जैसा आप सोचते हैं यूट्यूब वैसा नहीं है।
-बीबीसी भी... -बस करो, यमुना!
यूट्यूब बस आज का चलन है। अभी सभी उसकी तरफ भाग रहे हैं,
फिर ऊब जाएंगे और कुछ समय में भूल जाएंगे।
हम उसमें नहीं पड़ेंगे, बात ख़त्म।
-हैलो? -आज जल्दी घर आ सकती हो?
-क्यों? -घर आओ और देखना।
-ठीक है। -शुक्रिया।
मेल
-क्या हुआ? -लगता है कोई दुर्घटना हुई है।
चलो।
-बधाई हो, बेटा! -बधाई हो, यमुना!
-हैलो, दीदी। -मिठाई खाओ।
-ये क्या है? -मल्ली शादी के लिए राज़ी हो गया है।
उसने कहा उसे तुम्हारे जैसी ही लड़की चाहिए थी।
उसने कहा तुमने उसकी आँखें खोल दीं। तुमने क्या कहा था?
हाँ, तुमने क्या कहा था?
ख़ैर, माँ और मैं बड़े ख़ुश हैं!
मैं कह सकता हूँ कि रिटाइर होने से पहले अपनी बेटी की शादी करवा दी।
और बताओ तो?
मल्ली यहाँ बस 40 दिनों के लिए है। तो हमें शादी भी जल्द करनी होगी।
हम बहुत ख़ुश हैं।
तुम ख़ुश हो ना?
हम सभी ख़ुश हैं फिर!
बेटा, हमें ख़ुशी हुई कि तुम इस शादी के लिए मान गई।
देर हो गई, उठो।
यमुना?
बेटा!
हमारी बेटी कहाँ है?
मुझे डर लग रहा है।
वह किसी सहेली के घर गई होगी।
डरो मत। हम उसके दोस्तों को फोन करते हैं।
छुट्टी की दरख़्वास्त - 2 महीने...
मुझे बाक़ी के पैसे दो, हम चले जाएंगे।
तुमने बेकार काम किया है। मैं पैसे नहीं दूँगी!
एक कमरे में अब भी रंग नहीं हुआ है।
जो हम दें वो ले लो।
मणि, उसका पैसा दे दो।
इस काम को लेने के लिए ख़ुद को थप्पड़ मारना चाहिए।
सही कहा।
-वो किसे थप्पड़ मारेगा? -बाई 7 बजे आएगी।
उसने तुम्हें ये बताया? उसे झाड़ू से मारूँगी।
वो तुम्हारे घर की नीलामी कर रहा है? हर कोई हमारी बेइज़्ज़ती कर रहा है।
ये सज्जन हमें शाबाशी दे रहे हैं।
उसने कहा वो तुम्हें थप्पड़ मारेगा!
-मैंने उसे रंग करते देखा। तुमने देखा? -मैं अंधी हूँ। मैं कैसे...
-मैंने कहा मैं थप्पड़ मरूँगा। -हाँ।
मेरा पैसा दो, मैं जाता।
वह कंजूस की तरह बोल रहा है और तुम मान रहे हो।
एक कमरे को छोड़कर मैंने सब कुछ रंग दिया है!
मेरा पैसा दो मैं जाता।
उसे बस 500 रुपए दो और चलता करो।
-उसे इतना पैसे क्यों दें? -क्या?
तुम्हें लगता है तुम बड़ी अमीर हो? मैं इतना नहीं दूँगा।
-मैं बस 5000 दे सकता हूँ। -ठीक है।
-नहीं, उसे इतना मत दो! -ये लो और निकलो।
-अपनी सुनने की मशीन पहनो, मोटे! -ये लो और जाओ।
-उसे इतना मत दो। -मैंने कुछ सुना नहीं।
बाप रे।
लड़ाई में जीतने के लिए अगले इंसान को सुनना बंद करना होगा।
मैंने अपनी मशीन छोड़ी, और उसने ये घर, देखा?
-चलो, दोस्तों। -लगता है वह जल्दबाज़ी में है।
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