De første 200 linjer.
नमस्ते।
यह फ़िल्म शुरू होने से पहले,
हमारे नायक, संतोष के बारे में
मैं कुछ कहना चाहूँगा।
चार चोर ग्रामीण बैंक को
लूटने की योजना बना रहे हैं।
हमारे नायक, संतोष को इस योजना की भनक लग गई थी।
संतोष आधुनिक रॉबिन हुड है।
उसके हिसाब से दुसरों से चुराना, चोरी है,
लेकिन दूसरों के लिए चुराना चोरी नहीं होती है।
संतोष ने इस चोरी की योजना को
रोक दिया था।
जब उसने लुटेरों की योजना को रोकने की कोशिश की
तब उसे पुलिस ने पकड़ लिया।
और उन चोरो ने भी उसे अपना दुश्मन मान लिया
क्योंकि उसने लुटेरों की योजना को रोक दिया था।
आइए देखते हैं कि आगे क्या होता है।
हे, मैं बहुत देर से तुम्हें फ़ोन कर रही हूँ,
लेकिन तुमने फ़ोन उठाया नहीं।
-क्या कर रहे थे? -मैं सो रहा था।
सुबह की ट्रैन के लिए अभी क्यों निकल रहे हो?
बेवक़ूफ़! सुबह जब सब जाग रहे होंगे तब मैं कैसे निकल सकती हूँ?
ठीक है, मैं तुम्हें सुबह रेलवे स्टेशन पर मिलता हूँ।
अपना ध्यान रखना। अलविदा।
हाँ, अलविदा।
साहब! साहब! सा...
हे! क्या हुआ है?
-छोटी मेमसहिब फ़िर से भाग गई है। -डैड!
फ़िर से!
पापा।
मुझे राधा की कमरे से यह चिट्ठी मिली।
पापा, मुझे डर है कि मेरी ज़िंदगी भी मेरी बहन की तरह बर्बाद हो सकती है।
मैं हमेशा वादा करती हूँ कि कोई लड़का ढूँढ़ लूंगी, लेकिन आज तक नहीं ढूँढ़ पाई।
इस बार, मैं सच में एक लड़के को लाऊँगी जिसे आप ज़रूर पसंद करेंगे
और वह कड़ा भी पहनेगा।
हे, उसे घसीट कर यहाँ ले आओ।
बॉस!
मैं आँखें खोल नहीं पा रहा हूँ। यहाँ सोने की चमकान जैसी कुछ है।
हे, क्या हुआ?
वह बहुत ही गोरा और शांत दिख रहा था।
मुझे लगा कुछ नहीं करेगा इसलिए उसे छू लिया।
एक गोरा आदमी शांत होगा यह सोचना बेवकूफ़ी है।
एक शांत व्यक्ति के दिल में साहस और उसकी आँखों में बहादुरी होती है।
किसी ने तुम्हें सूचित किया कि मैं पिट गया,
लेकिन वे यह सूचित करना भूल गए कि मैं बहुत बुरी तरह से पीटने वाला हूँ।
जो तुम्हें हँसा सकता है वह रुला भी सकता है, है न?
हे, यहाँ क्या हो रहा है?
"मेरी तरफ़ देखो और तुम्हारा भाग्य खुल जाएगा।"
कैसा भाग्य?
हर सुबह, मुझे इन बेवकूफ़ों की शक़्ल देखनी पड़ती है।
सर, आपको सिर्फ़ शक़्ल देखनी पड़ती है,
लेकिन मुझे तो सबकुछ देखना पड़ता है। कितना दुर्भाग्यपूर्ण है!
क़मीज़ उतारो।
पैंट भी उतारो।
लग रहा है चड्डी के अंदर कुछ है। उसे बाहर निकालो।
इसके अंदर भगवान ने जो दिया उसे छोड़ कर और कुछ नहीं है।
भागो! अगला?
कपड़े उतारो।
हे, बेशर्म! अंदर कुछ नहीं पहना तुमने।
आप कपड़े देते हो इसलिए मैं ऐसे ही आ गया।
-जुर्म क्या है? -वेश्यालय में गया था, सर।
तो कपड़े वहाँ छोड़ कर आ गए?
उन्होंने उसे सबूत के तौर पर ले लिया मुझसे।
अभी निकलो यहाँ से।
आज तुम रिहा हो रहे हो। कम से कम आज से एक अच्छा इंसान बन जाना।
सर।
सर।
यहाँ दस्तख़त करो।
यह अपने साथ रखना।
इंसान पक्षियों को बिना किसी वजह से पिंजरे में रखता हैं,
लेकिन वही इंसान जुर्म कर के पिंजरे में आता है।
अब तुम रिहा हो रहे हो, तो लौट कर आने तक अच्छे से रहना।
जी, सर! धन्यवाद।
-चलो, ठीक है। -मैं चलता हूँ।
बहुत अच्छा कहा आपने।
-सर? -क्या?
आपने बहुत मारा,
इसलिए मैं आपको नौकरी से निकालने की योजना बना रहा था।
लेकिन आपकी पक्षियों वाली कहानी सुन कर,
मैंने अपना मन बदल लिया।
-तुम मुझे नौकरी से निकाल सकते हो? -हाँ, सर।
-निकलो, यहाँ से। -सर, यह रही गोलियाँ।
हे!
तुमने मेरी बन्दुक से गोली निकाल ली? चोरी करने में माहिर हो।
लेकिन अब मैं बदल गया हूँ। इसलिए इसे वापस देने आया।
अलविदा, सर।
देखा, मेरी बात सुन कर
कैसे लोग बदल जाते हैं?
वह नहीं सुधरेगा! उसने चुरा लिया।
यह तो यहीं है।
मैं आपके कान के बुँदे के बारे में कह रहा था।
जाओ उसे पकड़ो!
चिंता मत करिए। वह वापस आ जाएगा।
दाएँ से, बाएँ से, सामने से और पीछे से मुझे देखना पड़ेगा
मैं भागने वालों में से नहीं हूँ एकबार में ही लक्ष्य बना लेता हूँ
मेरा जन्म स्थान है अडकमारनहल्ली
बड़ा हुआ हूँ बेंगलुरु में
मैं अपनी दुनिया का राजा हूँ
मैं किसी का एहसानमंद नहीं हूँ
सोना, नारंगी सोना
चारों ओर नारंगी छटा बिख़री है मेरी बात ही कुछ और है
नारंगी
तुम बहुत मीठे हो, ओह संतरे
चारों ओर नारंगी छटा बिख़री है मेरी बात ही कुछ और है
नारंगी
तुम बहुत मीठे हो, ओह संतरे
दाएँ से, बाएँ से, सामने से और पीछे से मुझे देखना पड़ेगा
मैं भागने वालों में से नहीं हूँ एकबार में ही लक्ष्य बना लेता हूँ
तुम पैसे उड़ाते हो, चाहे जैसे भी कमाओ
तुम्हारा स्वागत बहुत क़माल का होगा
यह जीवन नश्वर है तो परिश्रम क्यों करें?
मेरा जन्म स्थान है अडकमारनहल्ली
बड़ा हुआ हूँ बेंगलुरु में
मैं अपनी दुनिया का राजा हूँ
मैं किसी का एहसानमंद नहीं हूँ
सोना, नारंगी सोना
चारों ओर नारंगी छटा बिख़री है मेरी बात ही कुछ और है
नारंगी
तुम बहुत मीठे हो, ओह संतरे
चारों ओर नारंगी छटा बिख़री है मेरी बात ही कुछ और है
नारंगी
तुम बहुत मीठे हो, ओह संतरे
साँबरे
आइसक्रीम चाहिए!
उल्लू गा रहा है। मैं भविष्य बता सकता हूँ।
मैं भविष्य बता सकता हूँ।
मुझे बीस रुपए दीजिए और मैं भविष्य बता दूँगा।
बीस रुपए के लिए घूम रहे हो। क्या भविष्य बता सकते हो? जाओ!
आपको देवी लक्ष्मी के दर्शन प्राप्त होंगे।
मूवी के भाषा में कहूँ तो आपके जीवन में नायिका आने वाली है।
मुझे बीस रुपए दो, दोस्त।
तुम्हारा नाम क्या है?
तो यह रही भूमिका। मुझे तुम पर यक़ीन है।
-जाओ! -रोको!
हे भगवान! रोको!
-उसने कहा था नायिका आएगी। -रोको!
यह बूढ़ी होगी नायिका?
प्रशांत राज की मूवी में कुछ भी हो सकता है।
-शहर जा रहे हैं? -हाँ।
रोको!
हेलो!
यह है मेरी नायिका!
रोको!
आओ!
मेरी मदद करो।
धन्यवाद!
मैं बहुत जल्द स्टेशन पर आ गई थी इसलिए आँख लग गई थी।
-अकेली हो? -क्या?
मज़ाक कर रहा था। आओ बैठ कर बात करते हैं।
-यह तुम्हारा सीट है? -हाँ, बैठो।
मेरी नाम है राधा।
मैं हूँ संतोष।
-कहाँ जा रहे हो? -फ़िलहाल, सोने जा रहा हूँ।
-चोर! मेरा बटुआ! -नहीं! मैं चोर नहीं हूँ।
एक चोर को हर कोई चोर की तरह लगता है।
यक़ीन करो। मैं चोरी नहीं कर रही थी।
यह सोने का कड़ा मेरे बैग से गिर गया था। इसे ले रही थी।
माफ़ करना।
इसलिए मुझे तुमने चोर कहा।
यह कड़ा है? हथकड़ी जैसा लग रहा है।
यह हथकड़ी नहीं है, कड़ा है।
मेरे परिवार ने रामपुर वीरभद्र स्वामी से प्रार्थना की हैं
कि जो भी मुझसे शादी करेगा उसे यह कड़ा पेहेनना होगा।
मेरे माता-पिता मेरे लिए लड़के ढूँढ़ रहे हैं पर वे मुझे पसंद नहीं है।
मैं किसी से प्यार करती हूँ। इसलिए मैं यह ले कर घर से भाग गई।
इसे मैं उसे पहनाऊँगी और उसे घर ले कर आऊँगी।
अगर लड़कियाँ घर से भागने की वजाय माता-पिता को मानाने की कोशिश करती
तो माता-पिता को शर्मिन्दिगी झेलनी नहीं पड़ती।
उन्हें मना कर तुम उसे घर ले आ सकती थी।
मेरे डैड बहुत कठोर हैं।
मैं रामपुर की रहने वाली हूँ।
मेरे डैड का नाम है हूलीवीरैया।
नाम में ही वीरता झलकती है।
ऐसे नाम होने से कोई वीर नहीं बन जाता।
मैं बताता हूँ, नाम से व्यक्तित्व का कोई सम्बन्ध नहीं है।
मैं संगाप्पा नाम के एक आदमी को जनता हूँ।
उसके आठ बच्चे हैं।
नाम और व्यक्तित्व का कोई सम्बन्ध होता है क्या, बहनजी?
मेरा नाम है संतानलक्ष्मी। पर मैं निःसंतान हूँ।
मेरा नाम है कुबेर। मुझे दस रुपए की भीख़ दे दो।
-हे, भागो यहाँ से! -जाने दो। संतरा खाओ।
यह क्या है? अचानक संतरा क्यों दे रही हो?
ताकि तुम मेरे बैग का ध्यान रखो। मैं अभी आती हूँ।
बिल्ली को बोल रही है दूध का ध्यान रखने के लिए।
मेरे लिए ही अच्छा है।
बैग को थोड़ा सा हटाया गया है।
-इतने पैसों से तो शादी कर सकता हूँ। -चोर से ही चोरी!
-वक़्त क्या हुआ है? -बारह बजे हैं।
-अच्छा वक़्त है! -कड़ा वापस दे दो!
कौनसा कड़ा? अच्छा वह! वह तो बाज़ार में मिल जाएगा।
यह कड़ा।
यह कौन है?
मैंने तो वापस दे दिया फ़िर भी क्यों मार रहे हो?
हे, रोको!
-रोको! -यह कहाँ चला गया?
हे!
लगता है अपना बैग भूल गया।
मैं बैग फ़ेंक देती हूँ।
रोको! हेलो!
हे, यह लो! अपना बैग कैसे भूल सकते हो?
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