Oru Nalla Naal Paathu Solren

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ஒரு நல்லநாள் பார்த்து சொல்றேன்

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Veröffentlicht am: 2022-06-14
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Die ersten 200 Zeilen.

ये है जिसे हम

मल्टीवर्स कहते हैं

जब आप एक मल्टीवर्स में जाते हैं,

आपको लाखों ब्रह्माण्ड मिलते हैं।

अगर आप किसी एक ब्रह्माण्ड में जाते हैं,

आपको लाखों जुड़ी हुई आकाशगंगायें मिलती हैं

जिन्हें एक साथ 'कॉस्मिक वेब' कहा जाता है।

कई आकाशगंगायें पार करते, आकाशगंगाओं के

इस संगम में जाने पर,

एंड्रोमेडा की आकाशगंगा के पास

मिल्की वे आकाशगंगा मिलती है।

जब आप मिल्की वे में जाते हैं, आपको करोड़ों तारे मिलते हैं

जो साथ में चमकते हैं।

एक तारे से जिसका नाम सूर्य है, 15 करोड़ किलोमीटर दूर

एक ग्रह है जिसे पृथ्वी कहते हैं।

जब आप पृथ्वी पर क़दम रखते हैं, उसका ज़मीन का हिस्सा जो 25% है,

सात महाद्वीपों में बँटा है।

उनमें से एक महाद्वीप एशिया है।

एशिया में, 48 देश हैं।

उनमें से एक भारत है।

भारत में 29 राज्य हैं।

एक राज्य आंध्र प्रदेश है।

आंध्र प्रदेश में 13 ज़िले हैं।

उनमें से एक कुरनूल है।

कुरनूल में, नल्लमला के जंगलों में

एक छोटा, सामान्य सा गाँव है।

हमारी कहानी यहाँ चलती है। यमसिंगापुरम!

हमारे कसबे में, लगभग 200 घर हैं।

यह पुलिस स्टेशन इन 200 घरों के लिए बनाया गया था।

इस कसबे में, जब एक लड़का 17 का होता है,

कसबे के कानून के हिसाब से, उसे हर रोज़ इस थाने में साइन करने होते हैं।

सिर्फ़ मृत्यु के भगवान यम से अनुमति लेकर ही

हम कोई काम करते हैं।

मेरे सिर से एक प्रकाश, पहुँचा है आकाश...

वह मेरी माँ है। उनका नाम यमरोषा है।

यह जानने के लिए कि कौन काम कर सकता है, वह भगवान यम से सलाह लेती है। बहुत गंभीर।

सब लोग ले लो!

ऊँचा! और ऊँचा!

यमन!

तुम्हें अपने साथ दो लोग ले जाने होंगे।

वो कौन होंगे?

पुरुषोत्तम और नरसिम्हन।

हमारे कुछ अलग ही संस्कार हैं।

हम काम पर निकलने से पहले, अपनी पत्नी से मंगलसूत्र लेते हैं

और गले में पहनते हैं।

यह नियम काम पर बाधाओं को दूर करने के लिए है

और हमें यह याद दिलाने के लिए

कि हमारे परिवार और गाँव हमारे भरोसे पर हैं।

और जिसे हम काम कहते हैं, वो लूट है।

बिना हिंसा के...

बिना औरतों, बच्चों को नुकसान पहुँचाये...

बिना किसी के जीवन को नुकसान पहुँचाये...

बिना राजनीति से जुड़े...

हमारी प्रतिज्ञा हमें सज्जन और मेहनती चोर होने के लिए कहती है।

हमारे वंश के देव भगवान यम हैं।

ॐ यमाय नमः!

हमारे अक्सर चुराने जाने पर भी, हमारे साइन रोज़ कैसे होते हैं?

जब मेरे साथी पत्नियों के मंगलसूत्र लेते हैं,

मैं एक मूर्ति के गले से मंगलसूत्र क्यों लेता हूँ?

यह एक राज़ है जो केवल हमारे गांववालों को ही पता है।

यह राज़ है

एक अच्छे दिन बताऊंगा

इस बाज़ और इसके साथियों के राज्य को देखकर लो मज़ा।

कौन है जो आधी रात में हमें यहाँ रोकेगा?

जिल जिल कुल्फ़ी

हमें बहुत दूर जाना है। शांत रहना।

यमाय नमः!

सौम्या। विस कॉम प्रथम वर्ष

क्या?

-भाई। -भाई।

हमारे नियम हमें मना करते हैं

महिलाओं को शामिल करने से।

ये कोई भी महिला नहीं है। यह मेरा पत्नी है।

अभयलक्ष्मी!

विस कॉम प्रथम वर्ष

-तुम्हारा नाम क्या है? -माया।

-कहाँ से हो? -मदुरै।

-कहाँ रहती हो? -हॉस्टल।

मुझे आज रात ठीक नौ बजे फ़ोन करना। ये रहा नम्बर!

वरना मैं कल वापस आकर तुम्हें ऐसे ही घूरूँगा!

-ठीक है? -ठीक है।

नौ बजे।

अगर तुम सच में पुरुष हो,

तो मेरी बेटी का मुझे बताये बिना अपहरण करके दिखाओ।

अगर उसकी माँ नागरानी को पता चल गया,

तो हम लड़की का अपहरण नहीं कर पाएंगे।

समय कितना हुआ है?

सौम्या, 8:50 हुए हैं।

तो क्या?

उसने मुझे नौ बजे फ़ोन करने को कहा है।

किसने?

वो जो मेरे चेहरे को घूर रहा था। हमारा सीनियर!

ठीक है, करो फ़ोन!

अगर मैंने अपने मोबाइल से किया, तो उसे मेरा नम्बर मिल जायेगा, और वो हमें परेशान करेगा।

हम क्या करें?

आंटी की दुकान पर जाकर लैंडलाइन से करते हैं।

मुझसे दूर हटो!

नौ बज गए। जाकर सो जाओ!

ऑफ़िस में रजिस्टर से उसका कमरा नंबर निकालो।

वहाँ जाओ और उसे उठा लो। बिना कोई आवाज़ किये।

-कैसे? -बिना आवाज़ किये!

हमारे नियमों के अनुसार, हम मुख्य द्वार से जाएंगे।

और तुम पीछे इंतज़ार करोगे।

हाँ, जाओ!

-अरे! -भाई?

वो मेरी पत्नी है। तो ठीक से व्यवहार करना।

-ठीक है भाई। -भाई!

हमारी छोटी उंगली भी उन्हें नहीं छुएगी।

यह कैसे करोगे?

मैं पलंग के साथ खींच लाऊंगा।

-इसे ले जाओ! -चलो!

-हेलो। -मैं बाथरूम में हूँ, बाद में कॉल करूंगी।

ठीक है। ध्यान से रहना।

वह कह रही है वह टॉयलेट में है और तुम उसे ध्यान से रहने को कह रही हो!

माया, तुम उसके साथ टॉयलेट में क्या कर रही हो?

मैं बाद में फोन करूंगी, माँ, बाय।

माफ़ करो।

अपना हाथ मुझ पर से हटाओ।

जाओ।

-जाओ भी। -साथ में आओ!

मदुरै माया।

-यहाँ सिगरेट पीने आयी हो? -नहीं!

-पक्का? -हाँ।

फूँको! फूँको मैं कह रहा हूँ!

आदत नहीं है?

-यहाँ क्या कर रही हो? -तुम्हें फोन करने आई हूँ।

तुम्हारा मोबाइल यह रहा। उससे कर सकती थी।

तुम नहीं चाहती थी मुझे नंबर पता चले। इसलिए तुम यहाँ आई हो।

कैसी है योजना?

तुम्हें कैसे पता?

-ज्योतिषविद्या! -सच में?

ढीला दिमाग! जो भी सुनती हो मान लेती हो?

बेवकूफ़! सब लड़कियों की तरह!

-ज्योतिष? -तुमने क्या कहा?

सब लड़कियाँ बेवकूफ़ होती हैं?

तुम्हारा नाम क्या है?

तुमने सब लड़कियों को बेवकूफ़ क्यों कहा?

तुम्हें लड़कियों के बारे में सब पता है?

सब लड़कियाँ सच में बेवकूफ़ होती हैं!

तुम्हें गुस्सा क्यों आ रहा है?

लड़कियाँ बेवकूफ़ नहीं होतीं!

-तुम बेवकूफ़ हो! लड़के बेवकूफ़ होते हैं! -चल, चलें।

-मैं बेवकूफ़ हूँ? -हाँ!

यहाँ दो लड़कियाँ खड़ी हैं, रात में अकेले।

और तुम ये हिसाब लगा रहे हो कि कौन बेवकूफ़ है?

मैं होती तो पता है क्या करती?

क्या करती?

आइसक्रीम को पूछती, बियर को पूछती,

पब, डांस फ़्लोर पे टाइम की बात करती।

बाइक का लम्बा सफर।

बाइक का लम्बा सफर? मैं ड्राइवर लगता हूँ कोई?

जाओ अपना टेडीबियर पकड़ो और सो जाओ!

टेडीबियर पकड़ के तो मैं सो ही जाऊँगी!

लेकिन पहले तुम पता करो कि तुम पुरुष ही हो न।

असली पुरुष कभी किसी लड़की को ना नहीं बोलते!

रात में काला चश्मा?

इसे रात में पहन कर मत घूमा करो। कॉमेडियन लगते हो!

वो चिप्स हैं न?

ध्यान रखना।

-तुम्हारा नाम क्या है? -सौम्या।

सौम्या।

हमें रजिस्टर में अभयालक्ष्मी नाम नहीं मिला।

तुमने ठीक से ढूँढा?

भाई, मुझे पता था तुम हमारा यकीन नहीं करोगे! इसीलिए मैं इन्हें साथ ले आया।

इसके बजाय कमरों में ढूंढ सकते थे!

उसने कहा था। लेकिन मैं आपकी अनुमति के बिना ये नहीं करना चाहता था।

तुम नहीं सोचते। लेकिन जो सोचते हैं उन्हें क्यों रोक रहे हो?

हम आपकी अनुमति के बिना कैसे कर सकते हैं?

तुम्हें मेरी अनुमति क्यों चाहिए?

मैं कैसे... हटेगा?

ये कार है!

-ये अपने आप चल सकती है? -नहीं!

-हम चाबी डालेंगे, तभी चलेगी। ठीक? -हाँ!

तुम चाभी हो। हम कार हैं।

तुम हाँ बोलो और हम करेंगे।

तुम चाभी हो और हम कार हैं! ठीक बोल रहा हूँ?

मेरी तारीफ़ कर रहा है!

-मुझे दो। -ये लो, भाई!

भाई!

भाई गुस्सा है क्या?

-अंदर बैठो! -ठीक है।

-भाई! -उससे बात करो!

तुप्पू का फ़ोन है!

वो चाहता है हम प्रभा वाइन्स पर आयें।

उसके पास हमारे लिए कुछ सूचना है।

-हम चलें? -पुरुषोत्तम!

बैठे रहो!

इतनी डांट खा ली और अब मुझे बोल रहा है गुस्सा मत करो?

तुझे शर्म नहीं आ रही?

उसने मुझे शर्मिंदा करने की कोशिश की।

लेकिन मुझे शर्म नहीं आई।

अरे!

इंसान में

थोड़ा-बहुत तो आत्म-सम्मान होना चाहिए।

-तुझमें बिल्कुल भी नहीं है? -है!

लेकिन मैं फालतू में इस्तेमाल नहीं करता।

जीवन के लिए अच्छा नहीं है।

लेकिन यार, वो कितनी प्यारी है!

उसने मुझे पूछा मैं पुरुष हूँ कि नहीं!

यकीन ही नहीं हुआ!

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