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यह फिल्म "ब्लैक फ्राइडे" नामक किताब पर आधारित है
जिसे 2002 में प्रकाशित किया गया।
यह फिल्म, इस किताब और अभियोजन के मुकदमे पर निर्मित हैं।
इसके अनुरूपण में रचनात्मक स्वतंत्रता ली गई है।
यह कथं, दर्शाए गए व्यक्तियों के निर्दोषता या अपराधिता पर राय नहीं है।
बंबई, मार्च 9, 1993. नव पाड़ा पुलिस स्टेशन
मैं सच कह रहा हूँ, साहब।
हाँ? सच कह रहा है? हाँ?
-दंगों में जो किया था, मैंने किया था। -हाँ।
मेरे भाईयों ने कुछ नहीं किया, साहब!
अच्छा, हाँ?
-कुछ नहीं किय। हाँ? -उनको छोड़ दो, साहब।
मैं सच कह रहा हूँ, साहब।
मैं सच कह रहा हूँ, साहब।
बंद कर दे इसको।
साहब, मेरे भाईयों को छोड़ दो, साहब।
उन्होंने कुछ नहीं किया, साहब। जाने दो उनको।
साहब!
-मेरे पास एक खबर है, साहब! - हाँ?
-मेरे पास एक खबर है। - क्या?
शहर में बम फटने वाले हैं।
- बोल, क्या? -मैं सच कह रहा हूँ, साहब।
बम फटने वाले हैं।
मंत्रालय, शिव सेना भवन,
स्टॉक एक्स्चेंज, सब उड़ाने वाले हैं।
अरे, फेंक रहा है साहब यह।
मंत्रालय, शिव सेना भवन उड़ाएगा?
नहीं, साहब। मैं फेंक नहीं रहा हूँ, साहब। मैं सच कह रहा हूँ।
शहर में बहुत सारा काला साबुन आया है।
हम लोग लेकर आए हैं।
हाँ।
व… वह, टाइगर भाई है ना, साहब।
कौन टाइगर भाई?
-टाइगर मेमन, साहब। - कौन है वह?
टाइगर मेमन, साहब।
हाँ, हाँ! कौन है वह?
साहब, उसने हम लोगों को ट्रेनिंग दी थी, साहब।
बम बनाना सिखाया।
वह हथियार, ग्रेनेड, बम। पिन निकालकर फेंकते थे हम।
सब सिखाया, साहब।
अब स्टॉक एक्स्चेंज, मंत्रालय, सब उड़ाने वाले हैं, साहब!
स्टॉक एक्स्चेंज…
मंत्रालय…
शिव सेना भवन उड़ाएँगे? हम्म?
तुझ जैसे चूतियों की फौज इकट्ठी करके, हाँ?
मैं मज़ाक नहीं कर रहा हूँ, साहब।
अबे, साइज़ देख ले अपना। हाँ?
मंत्रालय, स्टॉक एक्स्चेंज, उड़ाएँगे!
हलवा लगता है क्या?
हलवा… हलवा लगता है क्या?
सच कह रहा हूँ, साहब!
चुप! चुप!
अब एक बार फिर बोला ना…
तू तो क्या, तेरा भाई तो क्या, सारा खानदान यहीं पर ज़िंदगीभर सड़ता रहेगा। समझा?
नहीं, नहीं।
चूतिया समझ रखा है पुलिसवालों को!
चूतिया समझ रखा है!
बंद कर दे इसको।
मिड डे मल्टीमीडिया लिमिटेड प्रस्तुत करता है
बिग बैंग पिक्चर्स और मिरर फिल्म्स के सहयोग से
एस. हुसैन ज़ाइडी के किताब पर आधारित
वह… गुल्लू दगा दे दिया है। मालूम है ना?
पर अल्लाह कसम…
प्लान कोई कैंसल नहीं होने दूँगा मैं।
वे लोग सोचेंगे अभी समय है हमारे पास।
लेकिन हम लोग…
नेपोलियन की तरह समय से पहले ही करके निकल जाएँगे।
बारह तारीख, इस जुम्मे को…
सत्रहवाँ दिन है रमज़ान का।
रसूल अल्लाह जंग-ए-बद्री लड़े थे… उसी दिन।
बंबई. तीन दिन बाद…
1:25 अपराह्न. बंबई स्टॉक एक्सचेंज
अरे, आ गया?
यह क्या है?
-टी-शर्ट, बेचने के लिए। -टी-शर्ट भी बेचते हो?
-बिल्कुल। -एक सैंडविच देना।
-कल शनिवार है ना? -हाँ।
स्टॉक एक्स्चेंज बंद रहता है।
कल, परसों, बिंदास टी-शर्ट बेचूँगा। सोमवार इधर।
-हाँ, बोलिए? -क्या बात है! अच्छा चलो, ठीक है।
हाँ, बोलिए न, बोलिए।
जय राम जी की।
रमेश! ओए रमेश!
हाँ, भाई। क्या हुआ भाई?
-हम मूत कर आ रहे हैं। - हाँ, ठीक है।
बीएसई
2:45 अपराह्न. वर्ली पासपोर्ट ऑफ़िस
बेसमेंट के ऊपर बैंक ऑफ बड़ौदा के कार्यालय के टुकड़े-टुकड़े हो गए।
धमाके का प्रभाव इतना तगड़ा था
कि इसने आसपास की इमारतों की खिड़कियों के शीशे चकनाचूर कर दिए।
स्टॉक एक्सचेंज के बेसमेंट पार्किंग में गाड़ी में रखा गया और एक टाइमर उपकरण से सक्रिय किए गए,
इस विस्फोटक उपकरण के कारण 70 लोगों की जानें गईं और लगभग 200 लोग घायल हो गए।
जिसमें 300 लोग की मौत हुई,
और 1,500 घायल हुए हैं,
और भीषण विनाश का दृश्य छोड़ गया है।
दोपहर 1:36 बजे, नर्सी नत्था गली के अनाज व्यापार क्षेत्र में एक ट्रक में विस्फोट हुआ,
जिससे आस-पास की इमारतें और गाडियाँ नष्ट हो गईं।
मात्र 50 मिनट बाद,
एयर इंडिया की बिल्डिंग के पार्किंग में एक गाड़ी में विस्फोट हुआ,
जिससे 20 लोगों की जानें आईं और कई घायल हुए।
कत्लेआम फिर से शुरू हुआ।
वर्ली में बस-स्टॉप के सामने बने सेंचुरी बज़ार शॉपिंग सेंटर में, एक शक्तिशाली बम फटा।
धमाके से पाँच बसें और उनके यात्री पूरी तरह से जल गए।
यह बम इतना शक्तिशाली था
कि इसने सड़क पर एक गहरा गड्ढा बना दिया,
जिससे आस-पास के तीन इमारतें ढह गईं।
ए, चलो! बाकी सब चलो यहाँ से।
पुलिस वालों को बोलो सारी भीड़ हटाए यहाँ से।
ए, यहाँ से हटाओ। हटाओ, हटाओ, सब को हटाओ। सब को हटाओ। सब को हटाओ।
ए, चलो! पीछे चलो!
- अरे, सबको हटाओ। पीछे करो। - अरे भाई, हटो, हटो।
अरे मौसी, दूर हटो, दूर हटो।
- चलो पीछे! - चलो भाई। सब हटाओ यहाँ से।
अरे, देखो ज़रा उसको।
सर, पूरा सेंचुरी बाज़ार खत्म हो चुका है।
दो किलोमीटर तक शीशे टूटे हैं।
सारी गाडियाँ चेक कीं?
कुछ नहीं मिला सर।
वह जीप, उसमें ही इतना था कि…
कम से कम 80 किलो आरडीएक्स यहाँ इस्तेमाल हुआ है,
और 50 किलो स्टॉक एक्स्चेंज में।
बॉम्ब स्क्वाड, कम इन।
हाँ, मैं सावंत हूँ।
बम स्क्वाड, सीमेंस फैक्ट्री, वर्ली, की तरफ बढ़ें, संदिग्ध मारुति वैन, ओवर।
चले जाओ, चले जाओ। जल्दी!
रुबीना ए मेमम
न्यूजट्रैक
कई और बम फटे।
दोपहर 2:41 बजे, दादर में शिव सेना मुख्यालय के पास एक पेट्रोल पंप में।
दोपहर 2:48 बजे, जुहू में सेंटौर होटल की तीसरी मंज़िल।
दोपहर 3:05 बजे, ज़वेरी बाजार में एक स्कूटर में।
दोपहर 3:16 बजे, प्लाज़ा सिनेमा के कंपाउंड में खड़ी गाड़ी में।
दोपहर 3:50 बजे, बांद्रा में सी रॉक होटल की 18वीं मंजिल।
दोपहर 3:55 बजे, आखिरी सेंटा क्रूज़ हवाई अड्डे पर दूसरे सेंटौर होटल में।
बीएसई, एयर इंडिया और प्लाज़ा में
कार में बम रखे गए थे।
ज़वेरी बाज़ार और कत्था बाज़ार में स्कूटर में बम रखे गए थे।
जुहू सेंटौर…
एयर पोर्ट सेंटौर…
और सी रॉक के कमरों में जो धमाके हुए,
उन तीनों कमरों में रहनेवाले संदिग्धों के नाम मिले हैं हमें।
इस फ़ोटो में मरनेवालों की संख्या…
तीन सौ से ज़्यादा है।
सोलह सौ घायल हुए हैं और…
इनका इलाज शहर के अलग-अलग अस्पतालों में चल रहा है।
भाईसाहब, यह आपका स्कूटर है?
-वॉचमैन, -हाँ, साहब।
वह स्कूटर किसका है?
वह… पता नहीं साहब।
दुबई
दिल्ली दरबार रेस्टोरेंट
उधर बंबई में जो धमाका हुआ,
सुना बीबीसी पर?
तुझे क्या लगता है? किसने किया?
तू बोला था…
मुसलमान का खून बहा है।
बदला लेना चाहिए।
बात कर रहे हैं। बुला लेंगे तेरे को, जा।
तो…
क्या किया तू ने?
उधर जो…
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