Betaal

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Staffel 1

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Veröffentlicht am: 2022-04-29
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Die ersten 200 Zeilen.

NETFLIX ओरिजिनल सीरीज़

कर्नल लाइनडोख के जर्नल से अंतिम लेख जून 17 1857

"हम इन लोगों को बचने आए हैं। मगर वे विरोध करते हैं।

बगावत हम तक पहुँच चुकी है। उनकी यह जुर्रत?

मैं उनके ही रक्षकों का उनके खिलाफ इस्तेमाल करूँगा।

मैं बेताल के श्राप का उपयोग करूँगा और इन गंवारों को मिट्टी में मिला दूँगा...

लगता है बागी सुरंग में है। मुझे जाना होगा..."

निलजा गाँव के ज्येष्ठ, आज।

हे पाताल के देव...

हम आपकी शरण में हैं, हमारी श्रद्धा स्वीकार करें।

हम आपसे निवेदन करते हैं कि आप अपनी नींद और हमारी शांति बनाए रखें।

इस छोटे से प्रसाद को स्वीकार करें, बेताल देव।

हम प्रार्थना करते हैं कि आप शांत रहें।

जय बेताल देव!

जय बेताल देव!

भूत देव की जय।

भूत देव की जय।

परदेसी हमारे पहाड़ों को हमसे छीनने आ रहे हैं।

हम उन्हें यहाँ आकर हमें नष्ट करने नहीं देंगे।

मौसी को कुछ हो गया है, हमें यह रोक देना चाहिए।

मौसी, हमें बताओ आपने क्या देखा? हमें बताओ।

मौसी, क्या हुआ? क्या आप ठीक हैं, मौसी?

मूर्ति को ढको! जल्दी!

जल्दी करो! जल्दी करो!

उन्हें सुरंग खोलने मत दो! सुरंग खोलने मत दो!

उन्हें इसे खोलने मत दो।

इसे बंद ही रहना चाहिए। इसे बंद ही रहना चाहिए।

इसे बंद रखो!

सुरंग बंद!

सुरंग बंद!

तीन चौथाई सुरंग बनाकर उन्होंने हमारा काम आसान कर दिया।

हालाँकि निर्माण-कार्य में गोरों का जवाब नहीं, लेकिन...

यह हाईवे बानने के बाद,

सूर्या कंस्ट्रक्शंस का नाम 500 साल तक जिंदा रहेगा, देखना आप।

काम खत्म हो जाए, बाद में देखते हैं।

सान्वी, छोड़ो उसे।

यह गंदा है, ना?

अम्मा, इनको क्या हुआ?

इनकी बलि चढ़ी है ताकि राक्षसों का साया हम पर ना पड़े।

हमें यहाँ से एक घंटे में निकलना है, मुधलवनजी।

बिलकुल। खुदाई करने वाले आते ही होंगे, बस।

लेफ्टेनंट कर्नल जॉन पी लाइनडोख

"यह स्मारक श्रद्धांजलि में बनाया गया..."

-अम्मा। -हाँ?

- "लेफ्टिनेंट कर्नल जॉन लाइनडॉक..." - "जॉन लाइनडॉक..."

"...नव्वेवां टांटन वालंटियर्स से।"

मतलब?

यह क्रान्तिकारिओं का अड्डा हुआ करता था।

जब 1857 की लड़ाई शुरू हुई थी ना,

बहुत से अँग्रेज़ मरे थे यहाँ।

अच्छा ही है। जान छूटी।

साहब...

- क्या रे? - समस्या हो गई, साहब।

हम ऐसा नहीं होने देंगे! हम यहाँ सड़क नहीं बनने देंगे!

- सीएम को तारीख दिया है, याद है? - बिल्कुल, याद है, सर।

क्या है, यह लोग हमारे लिए कदम-कदम पर रूकावट खड़ी कर रहे हैं।

थोड़ी देरी हो रही है। वास्तव में...

एक और बंद पड़ गई।

- इस हफ्ते तीसरा मशीन है... - हाँ, वह मशीन है, बंद पड़ती रहती है।

इस शुक्रवार को सीएम यहाँ पर आने वाले हैं,

आपके इस मशहूर सुरंग के उद्घाटन की पूजा करने के लिए।

और यह दोबारा काम विलंबित हुआ और तब तक बारिशें शुरू हो गई...

मुझे 24 घंटे का वक़्त दो।

बारिश तक बात ही पहुँचने नहीं दूँगा।

-मैं यूं सुरंग खुलवाता हूँ। -देरी नहीं होनी चाहिए।

जो करवाना है, जैसे करवाना है, जल्दी करवाओ।

मेरी ज़िम्मेदारी।

वादा तो कर दिया आपने,

लेकिन आदिवासिओं को कैसे हटाएंगे हम।

यहाँ कौन आदिवासी है?

यह सब नक्सल है। और यह खबर सब को जल्दी पता चल जाएगी।

हम्म?

"सिटीज़न नेटवर्क में आपका स्वागत है।

आज के हमारे बहस का विषय है,

'क्या कैम्पा के जंगलों में होने वाली नागरिकों की मृत्यु के लिए

सीआईपीडी को ज़िम्मेदार ठहराना चाहिए या नहीं?'

हमारे साथ प्रोफेसर रहीम हैं।

वे अंतर्राष्ट्रीय संबंध,

केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्रोफेसर हैं।

तो प्रोफेसर, इस पर आपका क्या कहना है?

कैम्पा के जंगलों से उग्रवादिओं को हटाने के नाम पर आप वहाँ की आदिवासी समुदायों

लाचार, गरीबों को उनके घर से बेघर कर रहे हैं।

क्या आप कहने चाहते हैं, प्रोफेसर कि जो लोग सभ्यता से कटे हुए हैं,

उन्हें तरक्की या विकास का एक भी मौका नहीं मिलना चाहिए?

गरीब मूल निवसिओं को उनकी समृद्ध भूमि से हटाना

कौनसा विकास होता है?

इस ढोंग को विकास का नाम मत दीजिए आप।

आप सीधी बात नहीं कर रहे हैं।

हाँ, अगर... अगर यहाँ किसी की तरक्की हो रही है,

तो वह सूर्या डेवेलपमेंट जैसी कंपनियां, निजी कंपनियों को हो रही है।

- जो अपनी जेब तो भर ही रहे हैं... - सुनो... सुनो...

प्रश्न का उत्तर दें।

...साथ ही साथ आप जैसे लोगों को अपने पैसे के दम पर नचा रहे हैं।

आप उदारपंथी और घटिया वामपंथी हैं।"

हीरो का जवाब

"हमारे साथ हैं, कमान्डेन्ट त्यागी, बाज़ दस्ता, सीआईपीडी।"

"क्या आप भारतीय सीआईपीडी की अखंडता पर ऊँगली उठा रहे हैं?

आपको कुछ बताऊं, प्रोफेसर।

जब भी इस देश को जरूरत पड़ी है,

तो उसकी रक्षा के लिए, हम लड़े हैं।

मंगल पांडे, भगत सिंह, सुभाष चंद्र बोस के साथ

कंधे से कंधा मिलाकर, हम चले हैं।

अपनी परवाह न करते हुए हथियार हम उठाते हैं

ताकि आप जैसे नकली बुद्धिजीवी चैन की नींद सो सकें।"

"क्योंकि आप अच्छी तरह से जानते हैं,

हम अपनी जान देंगे

इससे पहले की कोई नुकसान पहुंचे, इस राष्ट्र या इसके लोगों को।"

बढ़िया, त्यागी मैडम। बढ़िया!

"अब मैं आप से एक सवाल करना चाहूँगी, प्रोफेसर।

अगर आपको हमारे देश से, हमारी सरकार से इतनी ही शिकायतें हैं...

तो, जब जिन्नाह ने आपको मौका दिया था...

तो आप कम*** पाक***वापस क्यों नहीं गए?"

हाँ!

बहुत बढ़िया!

ए। चुप! क्या? क्या?

- "...हमेशा उदाहरण देते रहते हैं।" -क्या बात है!

भाई, अब हमें आजादी दिलाने का श्रेय भी मैडम ने ले लिया।

वाह जी वाह, त्यागी जी,

क्या बात है। वाह-वाह! उत्तम।

असाधारण अफसर हैं, त्यागी मैडम।

देखना आहलू, एक दिन मैं इनके जैसा बनूंगा।

हाँ भाई, क्यों नहीं, क्यों नहीं।

आखिरकार तुम्हारी आदर्श जो ठहरीं।

वे कहेंगी तो तुम तो कुँए में भी कूद जाओगे ना, वह भी बैक-फ्लिप करके।

क्यों? तू नहीं करेगी?

"कितनी अजीब बात हैं ना

कि हम जैसे लोग आप जैसों के हक के लिए लड़ते हैं?

वह हक जो आपको खुली छूट देता है हम पर इलज़ाम लगाने का।

मैं शिकायत नहीं कर रही हूँ, प्रोफेसर साहब

क्योंकि यह हमारा कर्तव्य है।"

ऑपरेशन समीर निवास एंकाउंटर:

आदिवासियों का आरोप नक्सली नहीं बेगुनाह गाँववालों को मारा सीआईपीडी ने।

"सिरोही, कम इन। सुन रहे हो?"

नकली समाचार।

सुन, ओय...

समीर निवास में जो कुछ भी हुआ...

उसके बारे में तू मुझसे कभी भी बात कर सकता है।

मुझे उम्मीद है कि तू यह जानता है। हम्म?

सर!

नादिर हक। नया सिपाही।

हेल्लो।

बाज़ दस्ते में स्वागत है।

यहाँ आकर बहुत गर्वित हूँ, सर।

इनसे मिलो। यह हैं डिप्टी कमांडेंट आहलूवालिया।

हेल्लो, मैडम।

चेहरा नहीं, आँखों में देख के बात कर।

माँ नहीं हूँ तेरी। चुतिया।

क्षमा करें, मैडम।

- सर... - हाँ?

आप... मेरे हीरो हैं, सर।

काफी देर से लेख एकत्र कर रहा हूँ।

जब से आप लोगों के बारे में पढ़ा है,

तब से बस एक ही मुराद थी कि... मैं भी आप जैसा बनूँ।

एक आपके नाम का लेख भी है, सर।

स्थानीय जांबाज़।

देसी हीरो।

बस यही बाकी रह गया था।

बचपन से इसे समझाता आ रहा हूँ,

जो ज्यादा हीरो बनते हैं ना, वे सीधा ऊपर जाते हैं।

मैं तो अब तक यहीं हूँ।

अभी हो...

बाद का किसे मालूम?

यह मेरा मौसेरा भाई है, नादिर।

इसको अभी बहुत सीखना है और यह मेरा काम है, इसे सिखाना।

और तू… हम्म?

आते ही सिर पर चढ़ाने लगा?

और वैसे भी...

अखबार में जो लिखा होता है ना...

वह सब कुछ सच नहीं होता।

यार, यह बात मैं सिरोही को कब से बताने की कोशिश कर रही हूँ।

[इंटरनेट मॉडेम की ध्वनी

यह रास्ता मत चुनो, सिरोही। यह अंधेरी जगह ले जाता है।

देखो, टीम की सुरक्षा के लिए, देश की सुरक्षा के लिए

कई बार हमें आकस्मिक निर्णय लेने पड़ते हैं।

हाँ, मैडम।

मीडिया वालों का तो काम ही यह है अनाप-शनाप लिखना।

वे हमारे बलिदानों को कभी नहीं समझेंगे।

कई बार ऑपरेशन की सफलता के लिए...

हमें नियमों को मरोड़ना पड़ता है।

और यह सब, हम सब की भलाई के लिए तो कर रहे है।

है की नहीं?

और उसके लिए, अंतिम समाधान, साधनों को सही ठहराता है।

समझ रहे हो?

हाँ, मैडम।

बढ़िया।

मैडम, आपको टीवी पर देख के सब बहुत खुश हो गए थे।

बकवास है सब।

अब यह...

निलजा गाँव।

कहने को तो यह आधुनिक भारत का हिस्सा तो है...

मगर यहाँ के लोगों के पास बुनियादी सुविधाएं तक नहीं है।

पास के जंगलों में पुराने अंग्रेज़ी सैन्य बैरकें है,

जो अब खंडहर बन चुके हैं।

गाँव के बड़े-बूढ़े वहाँ बरसों से रह रहे हैं।

पूरा जंगल नक्सलों से भरा है

और वे नहीं चाहते कि यह जगह विकसित हो।

सिरोही, तुम तो जानते ही हो,

कि अशांत क्षेत्र की सफाई करने का एक ही तरीका है -

इसे दुनिया से जोड़ना।

हमारा मकसद है...

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