Las primeras 200 líneas.
मैं फ़िदायीन हमला करना चाहता हूँ।
मेरे पिता, वो फ़िदायीन हमले में अल्लाह को प्यारे हो गए।
मेरा एक भाई है, मेरा भाई डरता है।
मुझे कोई ग़म नहीं मैं ये करने जा रहा हूँ।
मुझे ये नहीं, ये बटन दबाना है।
मेरी आख़री ख़्वाहिश है
कि मेरा भाई भी इसी रास्ते को अपनाए।
जिहाद को अपना रास्ता बनाए।
अफ़ग़ानिस्तान, 10 साल पहले
नाम: ओमर उम्र: 10 साल, मृत: 22
आत्मघाती बम विस्फ़ोटों के लिए बच्चों का उपयोग 2007 में अफ़ग़ानिस्तान में शुरू हुआ
- चल! - चल मार!
- लात मार! - उससे ले ले!
सारे भाग गए!
चलो।
कंधार, अफ़ग़ानिस्तान पाक़िस्तान के नज़दीक, 2012
मैं करता हूँ।
- हे, गोली मत चलाना! - गोली मत चलाना!
- बच्चा है। -चॉकलेट?
बाज़!
बाज़!
- नहीं! - जाओ! तुरंत जाओ!
वक़्त हर ग़म भर देता है।
जाओ। तुरंत जाओ।
- दूर रहो! - दूर रहो!
अल्लाह से बढ़कर कुछ नहीं।
- ये औरत एक आत्मघाती हमलावर है! - हमें फंसाया गया है!
खुश्त गरदेज़ पास पूर्वी अफ़ग़ानिस्तान, 2014
अल्लाह के अलावा इबादत का हक़दार कोई नहीं और मोहम्मद उनका पैगम्बर है
अस्सलामु अलैकुम। अल्लाह की रहमत, सुकून और इनायत आप सब पर बनी रहे।
मैं अब्दुल्ला कज़ार।
कुन्नार से ले के नूरिस्तान का कमांडर हूँ।
इस क्षेत्र से सब ने मात खाई, रूस ने भी और अमेरिका ने भी।
इसको तबाह करना मतलब
पूरे अफ़ग़ानिस्तान पर कब्ज़ा।
इनको हम तालिबानियों से बहुत ख़ौफ़ है।
इनको यहाँ इनकी मरकज़, यानी इनकी चौकी पे निपटा के
फ़िर काबुल में निपटेंगे।
नाटो कैंप काबुल के नज़दीक
ये बाहर के सब लोग
सिर्फ़ अपनी हुक़ूमत के लिए आए हैं।
पश्चिमी ताक़तों का साथ देने वाला अफ़ग़ान
और दूसरे मुल्क़ भी हमारे दुश्मन हैं।
हमारे निशाने पर है।
शुभ संध्या, सर।
कज़ार के बारे में पक्की रिपोर्ट है,
कि वो इसी गाँव में बैठा है।
खुश्त के प्रवेश द्वार के पास नीचे वाला सारा इलाका तालिबान का है।
हमें गाँव पर बमबारी करनी चाहिए।
सर, हमारे…
सर, वो हमारे लोग उस इलाके में रहते हैं।
ये बाहर के लोग इंसान नहीं, शैतान हैं।
काफ़िर।
और इस मुल्क़ अफ़ग़ानिस्तान का बच्चा-बच्चा इनका दुश्मन है।
नूरिस्तान और काबुल अमरीकियों के कसाईखाने हैं।
अब इनका मरकज़, इनके ठिकानो पे इनकी क़ब्र बनेगी।
जाओ। पकड़ो उन्हें!
यहाँ लाओ।
ख़ुदा कसम!
हम अपने बच्चों को आत्मघाती हमलावर बनाकर यह मक़सद पूरा करेंगे।
बंदूक लो।
चुप रहो वरना जान से मार दूंगा!
दिल्ली एयरपोर्ट भारत, 2018
हाँ, मैं उन्हें ही ढूंढ़ रही हूँ।
सुनिए, सर। क्या आप ही मिस्टर नासिर ख़ान हैं?
माफ़ कीजिएगा, सर।
क्या आप मिस्टर नासिर ख़ान हैं?
आप ठीक तो हैं?
बोर्डिंग के लिए आख़री कॉल है, सर। प्लीज़ बोर्डिंग के लिए आइए।
मैंने अपना बोर्डिंग कार्ड खो दिया है।
नासिर ख़ान
काबुल एयरपोर्ट अफ़ग़ानिस्तान
हेलो, मेरे दोस्त। स्वागत है।
कई दिनों बाद मिले।
आने का शुक्रिया।
जानती हूँ यह आप के लिए मुश्किल था। शुक्रिया।
माफ़ कीजिएगा, मैंने आपके फ़ोन कॉल और ई-मेल का जवाब नहीं दिया।
जानती हूँ। मैं समझ सकती हूँ।
पर भरोसा था कि आप आएँगे।
इसलिए हिम्मत नहीं छोड़ी।
-ये अब्दुल्ला। -सलाम, साहब।
अब्दुल्ला आपको गेस्ट हाउस छोड़ देगा।
सर, आप को शवर्मा और फालाफेल पसंद है?
अब नहीं मिलेगा काबुल में।
वो था न, वो लेबनानी रेस्टोरेंट, नूर-ए-लबाब, तबाह हो गया।
और वो दूसरा शालीमार।
बहुत अच्छी बिरयानी मिलती थी, वो भी गई।
तक़रीबन, सर, कुछ 54 लोग मारे गए।
और, सर, वो ली जार्डिन था न, वो फ़्रांसिसी रेस्टोरेंट, वो भी गया।
लेकिन उधर ज़्यादा नहीं, बस 12 ही गए।
और वो लेबनानी रेस्टोरेंट में कितने मरे?
- ज़्यादा नहीं। बस पांच ही गए। - गाड़ी रोको।
जी, सर। आप ने बुलाया?
वो लेबनानी में पांच मरे।
-और ली जार्डिन में 12 मरे। -हाँ, बराबर।
क्यों?
अब चार-पांच तो मरते रहते हैं न, सर। इतना तो सामान्य है।
बाग़रामी
टुमॉरोज़ होप शरणार्थी कैंप काबुल के नज़दीक, अफ़ग़ानिस्तान
और, सादिक़, क्या चल रहा है उधर?
कोई कैमरा वाला आया है क्या इंटरव्यू के लिए?
उसको छोड़!
वो जो तीन लड़के आएं हैं न, जो पाकिस्तानी शरणार्थी शिविर से आए हैं इधर,
उनके पास असली गेंद है, क्रिकेट की गेंद।
जिससे मैच खेलते हैं।
असली क्रिकेट की गेंद? पाक़िस्तान से?
- गेंद दिखाना। -दिखाना।
गेंद दिखा दे।
बोल न इसको गेंद दिखाने। हम थोड़ी न निगल जाएंगे इसकी गेंद।
दिखा दे गेंद।
अरे, बाज़! गेंद दिखाना!
चोरी किया क्या?
दो दिन पहले आया और चोरी शुरू!
खेलेंगे।
सब खेलेंगे!
अरे।
अमेरिकी कंपाउंड के उधर गेंद गुम गया था मेरा लाल वाला।
गुलाब भाई, उड़ा लिया इसने!
क्या बोल रहा है तू? हम लोग पाकिस्तान से लाए हैं ये गेंद?
दूर से देखो।
असली गेंद है।
अफ़्रीदी भी खेला है इस गेंद से।
छह विकेट लिए हैं उसने इससे, छह।
अफ़्रीदी की गेंद तुम को कहाँ से मिली?
कहाँ से क्या। मैच से मिली है ये गेंद।
हम तो अक़्सर मैच देखने जाते हैं पाक़िस्तान में।
हम तो सारे खिलाड़ियों से मिले हैं पाक़िस्तान में।
विराट कोहली से भी मिले हैं।
झूठ बोलता है!
झूठे हैं ये लोग!
अब्बू कसम! सारे खिलाड़ियों से मिले हैं पाक़िस्तान में।
पाक़िस्तान में तो सारे खिलाड़ी आते हैं,
अफ़ग़ानिस्तान में नहीं।
बम विस्फ़ोटो से डरते हैं न।
इस कैंप में सब का बाप कौन?
गुलाब-उद-दीन।
गुलाब-उद-दीन।
आज से ये गेंद मेरा हुआ।
- बाज़, नहीं, बाज़। रुक जा! - बाज़, नहीं!
साले! कमीने!
भागो!
- गुलाब भाई, गेंद? -गधे!
खड़े होकर देख क्या रहा है? पकड़ उसको!
चल, बाज़!
हम जीत गए!
अल्लाह!
अल्लाह!
गुलाब भाई,
मेरी सलाह है झगड़ा ख़त्म करो।
बात करो।
गेंद हमारी है।
खेलना है, तो बल्ला लेकर आओ।
असली गेंद के साथ असली बल्ला। है न , बाज़?
ठीक है।
-अली शेर। - हाँ?
तू बल्ला ला के देगा।
तेरे अब्बा के कारख़ाने से।
चलो।
गुलाब भाई।
ये वही है तालिब
जो पिछले पाक़िस्तान से आया था।
इसकी माँ भी क़ातिल थी!
शुक्रिया।
आज अफ़ग़निस्तान के बच्चों के लिए, तुम सब की क्या ज़रूरतें हैं?
- पढ़ाई। - सभ्यता।
-खाना और घर। -अमन।
अमन।
इन बच्चों के सपनो को साकार करना ही टुमॉरोज़ होप का सपना है।
तो हमारे साथ जुड़िए और इन लोगों के जीवन में उम्मीद की एक किरण लाइए।
सलाम। शुभ संध्या।
दारी में कहते हैं, यह आपका घर है।
पिछले 30 साल से, हम ये तबाही झेल रहे हैं।
रूस के हमले के वक़्त, मेरे अब्बू ने मुझे यू.एस.ए भेज दिया।
वहाँ पढ़ते वक़्त, मेरा बस एक ख़्वाब था।
कि अपने मुल्क़ वापस आकर अपने लोगों के लिए काम करूँ।
लेकिन वापस आई तो देखा कि यहाँ की हालत और भी बदतर थी।
उस वक़्त मीरा जान मेरी ज़िन्दगी में आई।
उसने हौसला और मक़सद दिया।
टुमॉरोज़ होप।
आज तक़रीबन-तक़रीबन एक हज़ार बच्चों और उनके परिवारों का घर है।
आज मीरा जी के पति, डॉक्टर नासिर खान, यहाँ हमारे साथ हैं।
मैं उन्हें मंच पर बुलाना चाहूंगी।
आज़ादी
फ़ोटो?
अल्लाह को निकम्मे पसंद नहीं
मंडावी बाज़ार काबुल
सर, आप इधर-उधर ऐसे क्यों घूमते हैं?
आजकल हिन्दुस्तानियों पर भी निशाना है इनका।
पाँच साल बीत गए, आएशा।
वक़्त बदल गया।
जज़्बात और ख़याल भी।
मैं जानता हूँ तुम मेरी मदद करना चाहती हो लेकिन उन बच्चों के चेहरे…
आएशा, कुछ चीज़ें ज़िन्दगी में बख़्शी नहीं जातीं।
नासिर, एक मक़सद होना भी तो ज़रूरी है।
इन लोगों की मदद करना मीरा का मक़सद था।
तुम्हें उसपर गर्व नहीं होता?
जाने से पहले प्लीज़ एक बार उस शरणार्थी कैंप में आकर देखो।
मीरा के सपने ने कितने लोगों को ज़िन्दगी दी है।
प्लीज़, नासिर।
मैं परसों निकल रहा हूँ।
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