पहली 190 पंक्तियाँ।
यह फ़िल्म पूर्णतः काल्पनिक कृति है और इसका उद्देश्य किसी की भी
धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना नहीं है। फ़िल्म में कुछ दृश्य और भाषा कठोर हो
हो सकती है। दर्शकों से अपने विवेक का इस्तेमाल करने का अनुरोध है।
फ़िल्म निर्माण के दौरान किसी भी जानवर को क्षति नहीं पहुँचाई गई है।
फ़िल्म में चित्रित धार्मिक सामग्री पूर्णतः काल्पनिक है।
जो भी श्रद्धालु-गण देश के कोने-कोने से आए हैं
सभी का महाकाल नगरी में स्वागत है।
जय श्री महाकाल!
जय श्री महाकाल!
जय श्री महाकाल!
जय श्री महाकाल!
जय श्री महाकाल!
जय श्री महाकाल!
जय श्री महाकाल!
जो भी लोग काफ़ी देर से स्नान कर रहे हैं
घाट छोड़कर दूसरे लोगों को भी स्नान करने दें।
जय श्री महाकाल!
जय श्री महाकाल!
जय श्री महाकाल!
शांति बनाए रखें! शांति बनाए रखें!
जो भी श्रद्धालु-गण देश के कोने-कोने से आए हैं
सभी का महाकाल नगरी में स्वागत है।
शोर ना करें।
थोड़ी देर में भस्म-आरती शुरू होगी।
शोर ना करें।
सेल्फ़ी अलाउ नहीं है।
जय श्री महाकाल! मोबाइल बंद कर दें भईया।
मोबाइल बंद कर दें, मोबाइल अलाउ नहीं है।
बच्चों का हाथ पकड़ कर रखें।
सेल्फ़ी अलाउ नहीं है। ओ लाल-शर्ट वाले भईया, हाँ?
सेल्फ़ी अलाउ नहीं है।
मंदिर प्रांगण में सेल्फ़ी अलाउ नहीं है।
- मोबाइल को जेब में रखिए। -जय श्री महाकाल!
भगवान को भक्ति चढ़ेगी!
-जय श्री महाकाल! - सभी शांति से देखेंगे।
भगवान को भक्ति चढ़ेगी। सभी शांति से देखेंगे।
जय श्री महाकाल!
श्रद्धालु समस्त श्रद्धालु, शांति से देखें।
भगवान को भक्ति चढ़ती है, शांति से देखें।
कांति कलश!
पूजा का थाल।
जय श्री महाकाल!
जय श्री महाकाल!
जय श्री महाकाल!
जय श्री महाकाल!
-आज्ञा करें! -आगे बढ़ो।
जय श्री महाकाल!
बजाते रहिए। बजाते रहिए। जय श्री महाकाल!
आ जाओ, आ जाओ! महाभक्त आ जाओ!
आ जाओ! महाकाल की बहनों आ जाओ! और भाई आ जाओ!
दुकान मेरी नहीं महाकाल बाबा की है।
यहीं तो फूल प्रसाद सबसे पहले चढ़े है बाबा को।
अरे आ जाओ! आ जाओ! उठालो फटाफट प्रसाद उठालो!
आ जाओ! चलो आ जाओ! आ जाओ!
आइए! आइए! प्लीज़ आइए!
इस तरफ़, इस तरफ़।
11, 21, 51, 101 जैसी आपकी श्रद्धा।
जूते चप्पल इधर। बड़े भगवान।
कितने बहन-भाई हैं?
अरे भईया, कोई नहीं है। सब पूछ रखा है मैंने।
पहली माँ से तीन बाप हैं, और पहले बाप से दो माँ।
जय श्री महाकाल!
-जय श्री महाकाल! -जय श्री महाकाल!
चंदू।
हाँ।
ये बस्ता किसका है?
पता नहीं। कोई ग्राहक भूल गया।
पंडित जी, आज चाय पीकर जाइए।
-आऊँगा, फिर कभी। -जय बाबा!
जय श्री महाकाल!
शंभू!
दमू!
ओ दमू बेटा।
अरे थोड़ा चाय पिलायी दे।
बेटा उसके पहले पानी दे दे बेटा पानी।
शिव-शिव!
बोल रही हूँ कब से, वो पढ़ने गयी है सान्या के यहाँ।
तुम फिर भी दमू-दमू का जाप लगा रहे हो।
तुम कब बोली? मैंने तो नहीं सुनी।
तुमने मेरी सुनी है, आजतक?
सुनते तो कहीं का कहीं ना पहुँच जाते!
विराजो।
होटल में भी ऑर्डर के बाद पाँच मिनट लगते हैं।
बेटा विवेक!
पढ़ने गया है, ज़हीर के घर।
रात वहीं रुकेगा।
क्या कर रहे हो, बाबा?
-बाबा... -अरे बेटा ये लग ही नहीं रहा।
इसका मेल और फ़ीमेल भी तो देखो ना।
क्या-क्या?
मेल-कॉर्ड, फ़ीमेल-स्लॉट।
घुसेगा इसमें?
टूट जाएगा ना?
जाओ-जाओ।
जाकर विवेक से माँगो। उसके पास है।
ये किसका बैग है?
अरे बेटा वो कोई ग्राहक भूल गया था दुकान में। ऊपर रख दे।
रखवा दे ऊपर।
चाय-पाउडर जो दिया था, बरामदे में।
जो आज्ञा महाराज।
उसके बाद चाहें तो खजुराहो और ये ओंकारेश्वर भी जा सकते हैं देखने।
फिर इसके बाद हरसिद्धि माता।
फिर काल भैरव।
वहाँ प्रसाद नहीं चढ़ता है, मदिरा चढ़ती है।
ठीक है?
एक सेकंड।
हाँ जी, क्या हुआ?
कैसे?
आ रहा हूँ।
बता देगा, चंदू बता देगा।
- मैं बताता हूँ आपको। -कौन सा हॉस्पिटल?
- विवेक! - अरे चुप हो जाओ मम्मी!
देखो-देखो, पापा आ गए।
क्या हुआ?
अरे क्या हुआ? इन्दु...
अरे, क्या हुआ? क्या हुआ?
चुप हो जाओ!
-विवेक कहाँ है? -अंकल उसे एडमिट किया है।
-एडमिट किया है? -अरे बाबा कोई कुछ नहीं बता रहा है।
डॉक्टर साहब बोले हैं सिर्फ़ आपसे ही मिलेंगे।
हमसे? विवेक कहाँ है?
नहीं-नहीं, डॉक्टर-डॉक्टर कहाँ है?
-अरे चुप हो जाओ! चुप हो जाओ, बैठो! -अरे चलो माँ।
रुको-रुको, आप अंदर नहीं जा सकते।
हम अंदर नहीं जा सकते?
अंदर नहीं जा सकते!
-अंदर पेशंट है। -ओह, अंदर पेशंट है!
- मम्मी... - मेरा बेटा भी तो पेशंट है।
प्रोटेक्शन तो लगा रखा था।
उसके बाद भी पता नहीं, घरवाली फिर प्रेगनेंट हो गयी।
कैसा प्रोटेक्शन?
कोई दाने-दाने वाला था कोई।
दाने वाला?
हाँ वो... कुछ तो नाम था उसका।
मैं समझाता हूँ।
एक बार एक शिकारी भूल से,
बंदूक की जगह छाता ले कर जंगल चला गया शेर का शिकार करने।
अच्छा।
तभी रास्ते में शेर आ गया।
उसने छाता बंदूक की तरह ताना और धाँय!
शेर मर गया।
अरे क्या मज़ाक कर रहे हो, डॉक्टर साहब!
छाता से कभी कोई शेर मरता है?
गोली किसी और ने चलाई होगी, हाँ।
वही तो मैं समझा रहा हूँ।
गोली किसी और ने चलाई होगी।
तभी तो...
ध्यान रखिएगा!
माँ का लाल! झोला छाप! गंदा आदमी!
डॉक्टर है ये? हैं?
घर चल, तुझसे बात करनी है।
चल!
डॉक्टर महाराज।
आइए-आइए प्लीज़।
आप पान तो नहीं खाते?
मैं विवेक का बाबा हूँ।
क्या हुआ विवेक को?
-कुछ नहीं-कुछ नहीं। -कुछ नहीं?
फिर उसको एडमिट क्यों किया?
और मुझसे क्यों मिलना था आपको?
-कुछ सीरियस तो नहीं? -घबराइए नहीं।
कुछ सीरियस नहीं है।
प्लीज़, आप पानी पीजिए।
मादा प्रजनन प्रणाली
नर प्रजनन प्रणाली
ये है सस्ती-लोकल वायैग्रा।
क्या महाराज? क्या है?
डॉ गगन मालवीय
मैं समझाता हूँ।
-हाँ। -कांति जी, ये जो गोली है...
ये रात भर जगाए रखने के लिए है।
अरे, समझ गया महाराज।
विवेक बहुत अच्छा बच्चा है, होनहार पढ़ाई-लिखाई में।
-तो रात को नींद ना आए-- -ना-ना-ना!
इसका पढ़ाई से कोई लेना देना नहीं है।
ये तो सिर्फ़ रात-भर जगाए रखने के लिए है।
महाराज जगेगा नहीं तो पढ़ेगा कैसे?
इसका इस्तेमाल लोग जो हैं ना...
देर तक आनंद उठाए रखने के लिए करते हैं।
एकदम देर तक आनंद उठाएँ।
समझ रहे हैं आप?
अगर आप एक गोली लोगे ना तो बस।
समझ रहे हैं आप?
महाराज आप किसकी बात कर रहे हो?
विवेक की बात कर रहा हूँ।
उसका दोस्त ज़हीर उसको मेरे पास लेकर आया।
विवेक ने तीन गोलियां इस्तेमाल की है।
और वो रात भर लगा रहा।
मास्टरबेट करता रहा।
क्या-क्या बेट?
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