Le prime 200 righe.
स्वर्ण मंदिर अमृतसर में, ऑपरेशन ब्लू स्टार 1 जून से 10 जून 1984
के बीच चलाया गया था।
ऑपरेशन के चलते मंदिर काफी क्षतिग्रस्त हुआ जिसके कारण पूरे विश्व में
सिख समुदाय के बीच आक्रोश
और क्रोध का माहौल पैदा हो गया।
चार महीने बाद 31 अक्टूबर 1984
सुबह 9:00 बजे दिन 1
त्रिलोकपुरी
उसको मार!
-हाँ, चल! -ये रहा!
सत श्री अकाल जी।
मार, प्रभ!
ओ 9 बज गए! कितना लेट हो गया पापा जी।
-दीदी, मेरे पराठे दे दे। -ला रही हूँ।
आपको कितना खाना है? पेट फट जाएगा।
मम्मी, फिर बस में उल्टियाँ करते हैं ये।
ओ यार, खाने दे ना पापा जी को आराम से।
- यार, दे दे दीदी! -आ गई, आ गई।
आ गई, चलो।
-ले ले, गरम। -ले ले।
ओ ला, यार।
कोई पराठा-वराठा नहीं मिलने वाला आपको।
-अरे! -ओ क्या हो गया, मेरी हीर?
अच्छा चल, आधा दे दे।
बहुत हो गया। अब उठो और दुकान जाओ।
-लो प्रभ भी आ गया। -प्रभ भी आ गया!
भाई आप लोग दोनों ना, शाम को जल्दी आ जाना।
हीर ने कॉलोनी के बच्चों को बुलाया है।
ठीक 6:00 बजे ना हम केक काट देंगे, बाद में ठंड बड़ी बढ़ जाती है।
पापा जी, आप कब फ्री हो रहे हों ऑफिस से?
भाई देखो, आज मेरी रिटायरमेंट का दिन है।
बस जाके रजिस्टर में साइनिंग होगी, छोटी मोटी स्पीच होगी।
फिर ऑफिस वाले मिठाइयाँ बाँटेंगे, गिफ्ट देंगे।
बस दो ढाई घंटे का काम है।
आज तो पार्टी डबल होनी चाहिए।
पापा जी? थोड़ा-थोड़ा…
ओ चुप हो जाओ आप! बड़े आए थोड़ा-थोड़ा वाले।
ओह मेरी माँ, मैं नागपाल की लस्सी की बात कर रहा हूँ।
थोड़ा-थोड़ा…
मम्मी, वैसे आपने पराठे स्वादिष्ट बनाए हैं।
अच्छा?
शाम को आते हुए ना प्रभ के लिए एक बड़ा सा गिफ्ट ले कर आना।
प्रभ से भी बड़ा?
कितना खाएगा, यार तू? उम्र देख अपनी ले और ठूँस ले।
ले, दही चाहिए, दही चाहिए? ले।
अच्छा ठीक है फिर।
अब ना थोड़ा अचार भी दे दो, ओ जोगी मामू।
चल, बहुत खा लिया चल। मुझे नहीं खाना, मेरा पेट भर गया।
- ये ले इसको पकड़। -ओहो बेटे, नाश्ता करके जा, ऐसे नहीं जाते।
-चलो, चलो। -खाली पेट नहीं निकलते घर से।
चल खा, ओहो!
ये मेरा सूट और चुनरी, ये मेरा गोटा।
उनको यही गोटा बोलना।
जोगी, वापस आते वक़्त केक लेते आना।
- पिछली बार दूसरा लगा दिया था। -चल, देर हो रही है।
यही वाला है।
-सत श्री अकाल भाई! -सत श्री अकाल।
-चलो जल्दी आ जाओ। -सत श्री अकाल बहन जी।
-सत श्री अकाल, जोगी भाई। -चल।
ये लो।
जोगी, शाम को टाइम पे आ जाना। सारे गुब्बारे तुम्हें ही फुलाने हैं।
-और तू भी चल। -बाय, जोगी मामू।
ठीक है पापा जी, मैं इनको घर छोड़ कर दुकान पे निकल जाऊँगा।
-आ जा अब! -ओ चल, तू कहाँ रह गया?
चल।
चल, जीता रह।
-बाय, जोगी। -बाय!
और जोगी भईया, कहाँ?
तुम दोनों कहाँ? स्कूल नहीं जाना तुम्हें?
-जोगी भईया, बोलो पेंसिल। -पेंसिल।
- तो आज स्कूल कैंसल! - तो आज स्कूल कैंसल!
आज तो बस प्रभ का बर्थडे मनेगा, शाम को।
गिन्नी, सन्नी!
बोला था ना होमवर्क करना है?
बस आवारागर्दी करते हो तुम पूरा दिन।
चलो, चलो।
हमारा रिटर्न गिफ्ट ना भूलना।
तू भी टाइम से आ जाना, गुब्बारे में हवा तू ही भरेगा।
-चलो, पापा जी। -चलो।
सुबह 9:29 बजे नई दिल्ली
एक चौंकाने वाली घटना में
देश के प्रधानमंत्री को उनके दो अंगरक्षकों ने गोली मार दी है।
ये दोनों सिख समुदाय से बताए जा रहे हैं।
लोगों के बीच धारणा ये है…
कि ये हत्या इस जून अमृतसर में स्वर्ण मंदिर में हुई
घुसपैठ की प्रतिक्रिया है।
दिल्ली पुलिस
दिल्ली अग्निशमन सेवा
ए, रोक-रोक!
ओए, रुक जा!
ये लो पापा जी, सारी बस ही खाली पड़ी है।
मैं नहीं कह रहा था, मिल जाएगी सीट?
आप ना बेकार में चिंता करते रहते हों। सीट नहीं मिलेगी, सीट नहीं मिलेगी।
लो मिल गई सीट।
तू तो बहुत बड़ा एमएलए है ना, इस इलाके का!
सारी ख़बरें पहले तेरे कान में तो पड़ती हैं,
-नहीं? -हाँ, पड़ती हैं।
ए भाई, दो आईटीओ।
अरे, घूर क्यों रहा है? दो आईटीओ।
बस रोक, उतार इन दोनों को नीचे!
अरे क्यों उतार, भाई? तेरे बाप की बस है?
भाग जा, आतंकवादी!
-आवाज़ नीचे कर? -अरे, एक सेकंड, एक सेकंड।
-अरे, हो क्या गया है तुम्हें? -आतंकवादी! ये क्या बोल रहा है तू?
अरे क्या कर रहे हो?
-हट… -पापा जी को क्यों मार रहे हो?
खून का बदला, खून से लेंगे!
तुमने हमारी माँ को मारा है!
-क्या बातें कर रहे हो, यार? -हाँ!
साली, अपनी गलती क्या है?
तू सरदार है ना, यही तेरी गलती है।
- अरे, संभाल के! - मारो इसे मारो!
अरे, छोड़ो!
दिल्ली परिवहन निगम
पूरा देश सदमे में है।
और देश में चारों तरफ शोक की लहर है।
हमें अत्यंत दुख के साथ सूचित करना पड़ रहा है
-कि हमारे प्रधानमंत्री को -
गोली मार दी गई है।
उन्हें तुरंत अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान ले जाया गया…
-जहाँ उन्होंने अपनी अंतिम साँसें लीं। -
हाँ, बता।
अच्छा?
और त्रिलोकपुरी का क्या हो रहा है?
और शालीमार बाग?
सिर्फ दो?
सुन मेरी बात।
वोटर लिस्ट चाहिए मुझे।
एक-एक का नाम मार्क होना चाहिए, मैं आ रहा हूँ अभी।
तो उसमें घबराने की क्या बात है? सब साथ हैं हमारे।
ओय, क्या हो गया, भाई?
ओय! मेरा सामान!
मार दे साले को!
ओय, पीछे हटो, पीछे हटो!
-ओ पीछे-- -जला दे इस दुकान को!
ओए मुझे छोड़ दो!
भगवान के लिए मुझे छोड़ दो!
ओय! मेरी दुकान!
अरे-- अरे बंद मत करो!
अरे, छोड़ दो मुझे!
बाहर कर दो, भाई साहब!
साहब, बाहर कर दो!
- भगवान के लिए-- -जला दे!
देश के प्रधानमंत्री की हत्या के बाद
दिल्ली के कई इलाकों में ऐसी घटनाएँ देखी गई हैं…
ओ बचाओ, बचाओ!
ओ बचाओ मुझे!
ओह, भगवान!
बचाओ, बचाओ!
बचाओ!
बचाओ!
भाग भाई भाग! भाग यहाँ से भाग!
भाग!
-पापा जी, आप घर जाओ मैं आता हूँ। -जोगी!
- अपना खयाल रखना, बेटे! -ओ, जी चलो।
मार दो सालों को!
आगे निकल रहा है!
पापा, क्या हो रहा है?
पकड़ इनको!
- ये क्या कर रहे हैं? - हमें मार क्यों रहे हैं?
-पापा! -अरे, बच्चे हैं यार!
अरे! नहीं!
भाई, तू जा यहाँ से।
अपने बाबूजी का खयाल रखना।
नहीं भाई, नहीं। नहीं भाई, नहीं।
-तू जा! -हौसला रख, सब ठीक हो जाएगा।
-सब ठीक हो जाएगा। -जा मुझे कुछ नहीं होगा।
जा।
हौसला रख।
सतनाम…
वाहे गुरु।
खोल, ओय खोल!
खोल दरवाज़ा!
खोल नहीं तो तोड़ देंगे इसको!
केरोसिन डाल, यहीं जलाते हैं!
हाँ, जला दे! जला दे साले को!
- सब जला दे! - जलेगा, सरदार!
-साला, आतंकवादी! -आतंकवादी!
बाहर निकल!
राजधानी के अलग-अलग हिस्सों से ख़बरें आ रही हैं
कि सिख समुदाय के लोगों की दुकानें जला दी गई हैं
और लूट ली गई हैं।
पापा जी!
मम्मी!
सुखी भाई!
मम्मी जी, नहीं!
मम्मी जी, नहीं!
मम्मी जी!
मम्मी!
मम्मी, मेरे बाल मत काटो।
चुप कर!
भाभी, ये क्या कर रही हों आप?
जोगी, भाग यहाँ से!
भाग जा जल्दी, जोगी। हम सब जा रहे हैं।
-आपने मेरे घर वालों को देखा? -कुछ नहीं पता कहाँ गए, जोगी।
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