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24 कार्लटन टेरेस लंदन
एक बजे के आसपास,
अशरफ मारवान...
अशरफ मारवान
मिस्र का एक जासूस...
छज्जे से गिर गया...
कार्लटन टेरेस, मध्य लंदन में।
एहरोन ब्रेगमैन इतिहासकार
उसने कुछ शब्द बोले।
और वह मर गया।
जब मुझे बताया गया, मेरा दिमाग दौड़ने लगा।
मैंने खुद से पूछा, "क्या उसे धक्का दिया गया था?
क्या वह कूदा था?"
अफवाह थी कि, खासकर मिस्र में, वह एक हादसा नहीं था।
वह एक हत्या थी।
1948 में पलेस्टाइन में...
यहूदियों ने इज़रायल राज्य की घोषणा की।
अगले दिन, मिस्र और अरब पड़ोसियों ने आक्रमण कर दिया।
इसलिए, सालों तक, इज़राइल...
और मिस्र एक दूसरे से घृणा करते थे।
काइरो, मिस्र
और अशरफ मारवान जो बड़ा आधुनिक जासूस था
वह झगड़े के केंद्र में था।
व्यंग्यपूर्वक, इज़रायल मारवान को सबसे अच्छा एजेंट समझता था।
शब्तई शवित पूर्व मोसाद प्रमुख
इतिहास में कुछ एजेंट ऐसी...
बेहतरीन जानकारी देते थे।
इस दुनिया से परेह।
उसकी मौत एक रहस्य है।
ऐसी अफवाह थी कि वह एक हत्या थी।
और, उसके एक ही दिन पहले,
उसने मुझे बताया था कि वह अपनी जान को लेकर चिंतित था।
लेकिन यह किसने किया था?
मिस्र के जासूसों ने अशरफ मारवान को मार डाला,
क्योकि वह एक जासूस था।
इज़राइली मानते थे कि वह उनका आदमी था,
पर उसने इज़राइलियों को ठगा के वे उसको गंभीरता से लें।
उसने मिस्र को अच्छी सेवा दी।
अशरफ मारवान की पत्नी, मोना,
वह सोच रही थी कि उसकी हत्या इज़राइलिओं ने की होगी।
मेरा मतलब, मैं अभी उसके बारे में सोचता हूं...
मैं खुद से अभी भी पूछता हूं, "क्या मैं जिम्मेदार था?"
वह मैं ही था जिसने उसे दुनिया के सामने बेनकाब किया।
27वी जून, 2007 में मुझे एक कॉल आया...
कुछ ही घंटों पहले हुई रहस्यमई मौत के बारे में।
बेशक, मुझ पर साज़िश की गई थी। किस पर ना होती?
और, एक पत्रकार होने के नाते, मैं इसकी तह तक जाना चाहता था।
सबसे बड़ा मुद्दा यह था कि वह कैसे मरा?
क्या वह हत्या थी?
आत्महत्या थी? क्या वह कोई हादसा था?
तो यह वही जगह है जहां से वह गिरा था।
वह पांच मंज़िल से नीचे गिरा था।
परिवार का कहना था कि उसके पास बहुत सारी योजनाएं थी।
पारिवारिक उत्सव का हिस्सा बनना था।
उसकी एक व्यवसायिक बैठक थी उसी दिन उस इमारत में।
इसी वजह से परिवार को विश्वास है
कि उसकी आत्महत्या करने की अफवाहें सच नहीं हो सकतीं।
मैं सच तक पहुंचना चाहता था।
लेकिन मैंने जितना सोचा था वह उससे कहीं ज़्यादा पेचीदा था।
खैर, वो दिन जब वह मरा...
मैं उसकी कॉल का इंतज़ार कर रहा था।
मुझे लगा था कि रिसेप्शन पर कोई गड़बड़ थी।
इसलिए मैं ऊपर गया यह देखने कि उसने मेरे लिए कोई संदेश छोड़ा है कि नहीं।
लेकिन कुछ नहीं था।
मध्य पूर्वी युद्धों में मेरी हमेशा से रुचि रही है।
जब मैं सेना में था, यह बात सबको पता थी कि एक बड़ा जासूस था
जिसने इज़राइल की खुफिया सेवा के साथ काम किया था।
लेकिन इज़राइली सेना की सेंसरशिप ने...
यह सुनिश्चित किया कि उनके बारे में कुछ नहीं लिखा जाए।
एक बड़ा रहस्य।
पश्चिमी तट में छह अरब मारे गए, गाज़ा में सात।
1987 में जब फिलिस्तीनी विद्रोह शुरू हुआ...
वह मेरे लिए पराकाष्ठा का समय था।
मैंने एक इज़राइली सैनिक को एक फिलिस्तीनी को पीटते हुए देखा।
मैंने कहा, "यह पागलपन है।
तुम फिलिस्तीनियों को वही पीड़ा
पहुंचा रहे हो जो दूसरे देशों ने यहूदियों को पहुंचाई।
और मैं वापस नहीं आ रहा...
जब तक यह हिंसा ख़त्म नहीं हो जाती।"
"बड़ी बात है। एहरोन ब्रेगमैन वापस नहीं आ रहा।"
और मैं यू.के. चला गया।
जब मैंने अरब-इज़रायल झगड़े पर अपनी पी.एच.डी. पूरी...
मैं युद्ध अध्ययन के विभाग से जुड़ा
किंग कॉलेज लंदन में।
क्या हमने इस जासूस के बारे में इस कक्षा में बात की थी या नहीं? क्या उसका उल्लेख हुआ था?
- हां। - ठीक है।
और मैंने छह किताबों को प्रकाशित किया है...
जिसके बारे में तुम कुछ नहीं जानते।
यह एक मज़ाक है। इसका इस्तेमाल मत करना।
मैं इसका इस्तेमाल कर रहा हूं!
1998 में...
मैं एक मुख्य वृत्तचित्र का सलाहकार था।
मैंने इज़राइल में खुफिया सैन्य के निदेशक का इंटरव्यू लिया।
जेनेरल एली ज़ीरा।
जब हमारा इंटरव्यू ख़त्म हुआ,
हम कॉरिडोर में खड़े थे
और उसने जो मुझे तब कहा उससे मेरा सब कुछ बदल गया।
उसने कहा कि मोसाद का बड़ा जासूस...
एक दोहरा एजेंट था।
मुझे बहुत बड़ा झटका लगा।
दोहरा एजेंट होने की क्या उलझनें हो सकती है?
अगर वह एक धोखेबाज़ एजेंट था मध्य पूर्वी इतिहास में...
सबसे महत्वपूर्ण जगों में से एक के दौरान...
तो सभी जासूसी जानकारी...
जिन पर इज़राइलियों ने अपने निर्णय लिए उन पर संदेह उठने लगेगा।
इज़राइल अपनी खुफिया जानकारी पर निर्भर है।
उन्हें हमेशा सही मिलनी चाहिए।
और अगर उनका श्रेष्ठ जासूस उन्हें गुमराह करता है...
यह उनकी साख को बर्बाद कर देगा।
इसलिए, खुफिया सेवा...
इज़राइल रक्षा दल खुफिया अनुसंधान के पूर्व प्रमुख
...उनकी रुचि है...
क्या जोखिम में था? क्या दांव पर लगा था?
...कहानी को बरकरार रखने में।
यह एक संवेदनशील विषय है।
युवा ब्रेगमैन बहुत ही प्रेरित था।
ऐसी खबर की मैंने हमेशा से आशा की थी।
लेकिन फिर मैंने सोचा कि यह बहुत बड़ा खतरनाक खेल हो सकता है।
काइरो, 1967
अशरफ मारवान...
एक आर्मी जनरल का बेटा था।
और लोगों को उसमें सामाजिक वरिष्ठता की निशानी नज़र आती।
उसने रसायन विज्ञान में अपना स्नातक किया।
उसी समय...
वह मोना से मिला...
गमाल अब्देल नासिर की बेटी...
मिस्र का राष्ट्रपति।
वे प्यार में पड़ गए।
वह जानता था कि कैसे...
शारीरिक संबंध बनाया जाए।
उसने नासिर की बेटी के साथ शादी की। सर्वशक्तिमान नासिर।
नासिर अरबों के देवता की तरह था।
प्रतिमा।
नासिर।
1967। नासिर के लिए एक मुश्किल समय था।
इज़राइल ने ज़मीन पर मिस्र की वायु सेना को अपंग कर दिया।
छह दिन की जंग, 1967
और फिर मिस्र सिनाई प्रायद्वीप हार गया। मिस्र को धक्का लगा कि उनके साथ ऐसा हुआ।
यह देश की गरिमा के लिए ठेस थी।
और सेना फिर से बनाने की प्रक्रिया शुरू हुई...
एक उद्देश्य के साथ, युद्ध शुरू करना...
सिनाई को वापस पाने के लिए
और उस गर्व को वापस पाने के लिए जो मिस्र का हर इंसान महसूस करता था
1967 से पहले।
मुश्किल की घड़ी में मारवान नासिर के परिवार में दाखिल हुआ।
वह महत्वपूर्ण बनना चाहता था...
लेकिन नासिर ने उसे नहीं सौंपें ऐसे मिशन
जो अशरफ मारवान को लगता था कि उसे मिलेंगे, "अब, जब मेरी इस घर में शादी हो गई है, मुझे वे मिल जाऐंगे।"
नासिर...
उसे महसूस हुआ कि यह आदमी उसकी बेटी से उसके व्यक्तित्व की वजह से शादी नहीं करना चाहता।
वह राष्ट्रपति की बेटी से शादी करना चाहता था।
इसलिए नासिर ने अशरफ मारवान को अपने अध्यक्षपद में जूनियर पद दिया।
यह ऐसा था जैसे तुम्हारा कोई विरोधी राजनीतिज्ञ हो।
तुम उसे पास लाए तुम्हारी निगरानी में रखने के लिए।
उसे परेशान करने के लिए खुला छोड़ने की अपेक्षा।
उसे, एक तरह से, अपमानित, दंडित महसूस हुआ,
और इस वजह से वह नासिक से नाराज़ था।
तो वह अपनी नई पत्नी के साथ लंदन आया।
लेकिन देश में यह रिपोर्ट था...
जो दर्शा रहा था कि उसे...
एक महंगी जीवन शैली पसंद थी।
नाइट क्लबों...
रेस्तरां...
कितना कमाता उससे कहीं ज़्यादा खर्चा करता।
आम मिस्र लोगों के।
नासिर बहुत ही किफायती ज़िंदगी जीता था
और उसे यह बहुत संकोचशील लगता था।
नासिक ने उन्हें वापस काइरो भेज दिया।
अशरफ को लगा कि वह नासिर के साथ फंस गया है।
तो वह अपने ससुर से बदला लेना चाहता है।
'67 की छह दिन की लड़ाई मिस्र के लिए एक विपत्ति थी
और इज़रायल के लिए एक अद्वितीय जीत
इज़रायल के नेता इसे मिस्र की सिलाई ताकतों का पूरा खात्मा कहते हैं।
मिस्र ने बदला लेने की ठानी
'67 की छह दिन की लड़ाई के तुरंत बाद...
मिस्र के साथ आगे होने वाली संभव लड़ाई का मुद्दा...
मोसाद के लिए सबसे पहली प्राथमिकता थी।
नासिर ने गठबंधन की पुनर्स्थापना करना शुरू किया
हर देश, हर सरकार को अपने दुश्मनों के इरादों का सामना करना पड़ता है।
और तुम इसके बारे में जितना जानते हो...
तुम उतने ही अच्छे तरीके से जंग को रोक सकोगे।
इसलिए सैनी जासूसी मोसाद के लिए बहुत, बहुत महत्वपूर्ण था।
मोसाद...
ज़िम्मेदार है...
संग्रह करने और विशेष ऑपरेशन चलाने के लिए।
1972, म्यूनिख ओलंपिक में इज़रायलियों के हत्याकांड का बदला
घसन कनाफानी की गाड़ी में बम विस्फोट
मोरडेचाई वानुनु का अपहरण
हर्बर्टस कुकर्स, ज़ुहैर मोहसिन, येहीआ-एल-मशाद,
गेराल्ड बुल, आतेफ सैसो, फतही शकाकी, इज़ एल -दीन शेख़ खलील की हत्या
यह सी.आई.ए. नहीं है।
सी.आई.ए. दुनिया से जूजती हैं।
उसके एजेंट दक्षिण अमेरिका और अफ्रीका में हैं।
शायद उत्तरी ध्रुव में भी, मुझे नहीं पता। पूरी दुनिया में हैं।
यहां, इज़राइल में, वह केंद्रित है।
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