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Opublikowano: 2022-06-09
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Pierwsze 200 wierszy.

कॉमिकस्तान

राजमोहन

कार्तिक

प्रवीण

विद्युलेखा

मर्विन

कॉमिकस्तान - व्हाट ए कॉमेडी

हैलो!

हैलो!

हैलो, दोस्तो। अमेज़न प्राइम वीडियो के कॉमिकस्तान में स्वागत है।

सबसे ज़्यादा हँसाने वाले तमिल स्टैंड-अप कॉमेडियन की सबसे बड़ी खोज!

कॉमिकस्तान जैसे शानदार शो के पहले प्रस्तुतकर्ता बनकर हम बहुत ख़ुश हैं।

-मैं हूँ मर्विन रॉज़। -और मैं हूँ विद्युलेखा।

मर्विन रॉज़ विद्युलेखा रमन

हमसे अक्सर कहा जाता है कि हमें नौकरी करनी चाहिए, पैसे कमाने चाहिए और घर बसाना चाहिए,

और उस बात को हँसी में नहीं उड़ाना चाहिए।

पर वक्त बदल गया है और कई लोगों ने स्टैंड-अप कॉमेडी को

एक सफल करियर बनाया है।

तमिल स्टैंड-अप कॉमेडियन पूरी दुनिया में दर्शकों से खचाखच भरे शो कर रहे हैं।

हाँ, तमिल स्टैंड-अप कॉमेडी के क्षेत्र में इन छिपे हुए हीरों को पहचानना

और उनके हुनर की कद्र करना ही कॉमिकस्तान का लक्ष्य है।

हिंदी में दो शानदार सीज़न के बाद, कॉमिकस्तान अब आ गया है तमिल में भी!

दुनियाभर से कई प्रतियोगी इसमें शामिल होने को आए

और उनमें से सर्वश्रेष्ठ छह चुने गए।

मायांडी करुणानिधि कार्तिगेयन दुरई

श्यामा हरिणी योगेश जगन्नाथन

अभिषेक कुमार अन्नामलई लक्ष्मणन

और उनकी प्रतिभा को दिशा देने के लिए, हमारे साथ हैं स्टैंड-अप कॉमेडी के सरताज,

हमारे जज।

कार्तिक कुमार।

कार्तिक कुमार

पहले, मर्द होने की परिभाषा हुआ करती थी,

"तुम जानते नहीं मैं क्या कर सकता हूँ? मैं एक मर्द हूँ।"

मी-टू आंदोलन के बाद, वह बदलकर हो गई है, "मैंने कुछ नहीं किया।"

राजमोहन अरुमुगम

राजमोहन।

भूमिका बाँधना

श्री तमिलनाडु, कृपया आइए।

जब हम टोकन ख़रीदकर पास जाकर खड़े होते हैं, तो वे कहते हैं,

"हटिए, हटिए।"

प्रवीण कुमार

प्रवीण कुमार।

वहाँ पर मरीज़ वाली कुर्सी थी। उसने मुझे बैठने को कहा।

मेरे बैठने के बाद, वह कुर्सी को पीछे झुकाने लगा।

वह पीछे करता गया और एक समय मेरे पैर मेरे सिर के ऊपर चले गए थे।

मैं एक जीता-जागता नाइकी लोगो लग रहा था।

हमारे जजों से मार्गदर्शन लेते हुए हमारा हर एक प्रतियोगी सीखेगा

"किस्सा संबंधी" कॉमेडी

भूमिका बाँधना डरावने हालातों की कॉमेडी

कॉमेडी की अलग-अलग शैलियों को और मंच पर अपना कॉन्टेन्ट पेश करना।

ऑबज़र्वेशनल कॉमेडी स्केच कॉमेडी

प्रासंगिक कॉमेडी

बेहया कहीं के।

गोदावरी महाराष्ट्र से बहकर आती है।

नदी के साथ केवल पानी ही नहीं आएगा, साथ में हिंदी भाषा भी लटक लेगी।

प्रवीण

वह एक रिश्तेदार जिससे हम मिलना नहीं चाहते

हमारी बैठक में आकर तशरीफ़ रखेगा

और बार-बार हमसे पूछेगा कि हम बच्चा क्यों नहीं कर रहे हैं।

-वाह! -कमाल की पेशकश थी।

कुछ लोग लड़कियों को फ़ेसबुक पर अपने लिंग की तस्वीरें भेजते हैं।

दोस्त, जिन लड़कियों को मैट्रिमोनियल वेबसाइट पर तुम्हारी शक्ल नहीं पसंद आती,

वे तुम्हारे लिंग की तस्वीर देखकर गदगद हो जाएँगी?

बहुत ख़ूब। शाबाश!

तुम्हारी पेशकश ने तो धरती हिला दी। लाजवाब!

हमारे देश में हम मुफ़्त की चीज़ों को चोरी की चीज़ें मानकर इस्तेमाल करते हैं।

क्या किसी को पता है भारत के उप-राष्ट्रपति क्या करते हैं?

उसी तरह, मुझे भी नहीं पता कि इन रंग-बिरंगे बटनों का क्या औचित्य है।

मैं बहुत ही कम वक्त में तुम्हारा फ़ैन बन गया हूँ।

तुम्हें देने के लिए और अंक तो नहीं हैं,

तो बदले में तुम्हें गले लगाऊँगा। मैं वहाँ आ रहा हूँ।

स्टूडियो के दर्शकों को जजों की तरह ही

वोट करने और अंक देने का मौका दिया जाता है।

इस सफ़र में, केवल तीन प्रतियोगी ही ग्रैन्ड फ़िनाले तक पहुँचेंगे।

कॉमिकस्तान फ़िनाले

और विजेता को मिलेगा "सबसे मज़ाकिया तमिल स्टैंड-अप कॉमेडियन" का ख़िताब,

और 10 लाख रुपए का नक़द इनाम।

उसने मुझसे कहा, "वहाँ जाकर परफॉर्म करो, वे तुम्हें 10 लाख रुपये देंगे।"

जब मैं यहाँ आया, तो मुझे एहसास हुआ

कि इनके पास तो दीवार रंगने के पैसे भी नहीं हैं।

तो कॉमिकस्तान के इस आरंभिक एपिसोड के साथ

इस रोमांचक सीज़न की शुरुआत करते हैं!

देवियो और सज्जनो, तीनों कमाल के जजों के लिए तालियाँ हो जाएँ!

सदाबहार, सदा मशहूर राजमोहन!

जाँबाज़ कार्तिक कुमार!

और पारिवारिक व्यक्ति प्रवीण कुमार!

चलिए हमारे सर्वश्रेष्ठ छह प्रतियोगियों का ज़ोरदार तालियों से स्वागत करते हैं!

तो, विद्यु, हमारी पहली कॉमिक... उसके बारे में संक्षेप में बोलें तो,

उसे पूरा विश्वास है कि वह सारे घमंडी लड़कों को

उनकी औकात दिखाने का बूता रखती है।

देवियो और सज्जनो, तो आ रही हैं श्यामा हरिणी!

नमस्कार। हैलो। मेरा नाम श्यामा हरिणी है।

मैं एक तेलुगु लड़की हूँ, पर घबराइए मत, मेरा नाम बस श्यामा हरिणी ही है।

श्यामा हरिणी

मैं आपको यह इसलिए बता रही हूँ क्योंकि मेरा एक चचेरा भाई है

जिसका नाम इतना लंबा है कि उसे लेने में दो एपिसोड भी छोटे पड़ेंगे।

इसी लिए मैंने इसका ज़िक्र किया।

मैं एक तेलुगु लड़की हूँ, मेरा परिवार आंध्र प्रदेश से है।

पर अब नहीं। अभी मैं अशोक नगर से आई हूँ।

मेरे माँ-बाप यहाँ कई साल पहले आकर बस गए थे।

भले ही हम एक तेलुगु परिवार हैं,

पर हमारे माता-पिता ने कोई तेलुगु रीति-रिवाज़ नहीं माने।

उन्होंने हमें आईआईटी में नहीं पढ़ाया।

हमें अमरीका भेजने के लिए वीज़ा नहीं दिलाया। उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया।

हमारी परवरिश तमिल बच्चों की तरह हुई।

हाँ, मेरे भाई ने इंजीनियरिंग पढ़ी और मैंने आर्ट्स।

पर जब मैं लोगों से कहती कि मैं स्टैंड-अप करती हूँ, तो वे हमेशा पूछते हैं,

"श्यामा, तुम स्टैंड-अप कॉमेडी महिलाओं की परेशानियों पर बात करने के लिए करती हो न?"

बिल्कुल नहीं। मैं यहाँ अपनी परेशानियों के बारे में बात करने आई हूँ।

कई लोग पहले से ही महिलाओं की परेशानियों के बारे में बात कर रहे हैं।

मेरी परेशानी सुनने वाला कोई नहीं है।

उनका अगला सवाल होता है, "श्यामा, तुमने स्टैंड-अप कॉमेडी इसलिए चुनी न

"क्योंकि इस क्षेत्र में बहुत कम लड़कियाँ हैं?"

नहीं। उसमें बहुत सारे लड़के हैं, इसी लिए मैंने इसे चुना।

बस उनके साथ घुलने-मिलने के लिए।

क्योंकि मैं अकेली हूँ।

पता है मैं कितनी अकेली हूँ? मुझे दोस्त का दर्जा नहीं, आंटी का दर्जा दिया गया है।

जिन्हें अंदाज़ा नहीं है उन्हें समझाती हूँ।

मेरे घर के पास एक दफ़्तर है।

वहाँ कभी-कभी अच्छे दिखने वाले लड़के आते हैं।

मैं आंगन में खड़े होकर घर के काम करने का बहाना करती हूँ

और उन्हें कनखियों से देखती हूँ।

क्योंकि मैं एक औरत हूँ,

मैं उन्हें छिछोरों की तरह घूर-घूरकर नहीं देख सकती,

तो मैं काम करने का बहाना करते हुए उन्हें ताड़ती हूँ।

और फिर उस लड़के ने मुझे देखा,

और जैसे ही हमारी निगाहें मिलीं, एक आवाज़ ने टोककर कहा,

"आंटी, प्लीज़ बॉल दे दीजिए!"

बगल वाले घर का बच्चा।

हमने पहले कभी बात नहीं की थी।

पर आज वह बोला, "आंटी, प्लीज़ बॉल दे दीजिए!"

आप सोच रहे होंगे कि इस उम्र में आंटी बुलाए जाने पर

मुझे इतना बुरा क्यों लग रहा है।

जब यह वाकया हुआ था, तब मैं 15 साल की थी।

समझे...

पर कई लोग मुझसे कह चुके हैं कि

"श्यामा, तुम केवल इसलिए अकेली और आंटी बुलाई जाती हो क्योंकि तुम मोटी हो।"

यह सच है। ऐसा सच जो मैं छिपा नहीं सकती...

इसी लिए मैंने ढीले कपड़े पहने हुए हैं।

हाँ, यह सच है, पर लोग मोटे लोगों का मज़ाक उड़ाते हैं और उन पर तंज कसते हैं।

प्लीज़ ऐसा मत कीजिए। यह ग़लत है।

मोटे लोग बहुत भले लोग होते हैं।

हमें उनके लिए मंदिर बनाकर उनकी पूजा करनी चाहिए।

तमिलनाडु में ऐसा हो चुका है।

कभी ग़ौर किया है कि कैसे फ़िल्मों में हमेशा हीरोइन की एक मोटी दोस्त होती है?

वह उसकी सबसे अच्छी दोस्त होती है और अंत तक उसके साथ रहती है।

हम भले ही साइज़ ज़ीरो न हों, पर ज़ीरो जैसे तो यकीनन होते हैं।

हममें से जितनों को अपनी ज़िंदगी में जोड़ो, हम उसकी कीमत उतनी ही बढ़ा देते हैं।

पर मोटे लोगों को प्रभावित करना और उनसे दोस्ती करना बहुत आसान है।

चुटकियों में किया जा सकता है। बस पाँच शब्द कह दो

और हम हमेशा के लिए आपके साथ रहेंगे।

कोई बड़ी बात नहीं है। मैं बताती हूँ क्या कहना है।

"तुम्हारा वज़न घट गया है!"

यह था मेरा सेट, बहुत-बहुत शुक्रिया!

-श्यामा हरिणी के लिए तालियाँ! -श्यामा!

बहुत ख़ूब, श्यामा।

-शुक्रिया। -इकलौती लड़की, दोस्तो। चलिए।

बस इस बात के लिए तालियाँ हो जाएँ।

शुक्रिया।

-तुम्हारा सेट बहुत पसंद आया। -बहुत बढ़िया था।

पता नहीं क्यों, पर मुझे उसमें अपनी ज़िंदगी की झलक दिखाई दी।

तुम्हें वाकई नहीं पता क्यों?

-मेरे ख़याल से यह बस एक इत्तेफ़ाक है। -हाँ।

तो, तुमने कमाल का बोला, श्यामा।

-शुक्रिया। -अपनी ज़िंदगी से बहुत मिलता-जुलता लगा।

सारी लड़कियो, तुम्हें वह अपनी ज़िंदगी से मिलता-जुलता लगा?

श्यामा, यह अपने में ही बहुत बड़ा सबूत है। तुम्हें और क्या चाहिए?

मुझे अंक चाहिए।

इसकी निगाह इनाम पर है।

पर श्यामा, मुझे तुम्हारे सेट से भी ज़्यादा तुम्हारी फ़ोटो पसंद आई।

हम एक बार फिर देख सकते हैं?

बहुत हुआ, यार।

ऐसा लग रहा था मानो तुम शॉपिंग मॉल के विज्ञापन के लिए पोज़ कर रही हो।

शुक्रिया।

अच्छा, चलिए देखते हैं। सुनिए, प्लीज़, एक बार और दिखाइए।

हम एक बार फिर से देख सकते हैं?

बहुत अच्छे, श्यामा!

श्यामा, एक बार फिर वह पोज़ करके दिखाओ।

-हे भगवान! -मर्विन की ख़ातिर।

यह मत कहो कि तुम्हें पोज़ करना नहीं आता।

शुक्रिया। बहुत-बहुत शुक्रिया।

वक्त आ गया है श्यामा को अंक देने का।

जजेज़ और दर्शको, आप अपने व्यक्तिगत वोटिंग पैड्स पर

एक से दस के अंकों के बीच वोट करेंगे।

जजों और दर्शकों को मिलाकर मिले औसत अंक

प्रतियोगी के आज के अंक माने जाएँगे।

और आपका समय शुरू होता है अब!

और समय ख़त्म!

तो, जजेज़, श्यामा की पेशकश की बात करते हैं।

मैं शुरुआत करूँगी प्रवीण जी से!

प्रवीण सर।

सरल शब्दों में कहूँ तो

तुम्हारे इस ख़िताब को जीतने के काफ़ी आसार हैं।

-क्या बात है। -वाह!

-वाह! -शुक्रिया, सर। बहुत-बहुत शुक्रिया।

सेट बहुत ही कमाल का था।

-मुझे एक छोटी सी सलाह देनी है। -प्लीज़ कहिए, सर।

"मेरे माँ-बाप आंध्र से हैं, पर उन्होंने हमारी वैसी परवरिश नहीं की,

"उन्होंने हमें आईआईटी में नहीं पढ़ाया..." तुमने यह सीधे कह दिया।

पर अगर तीन का नियम लागू किया होता, तो इसमें चार चाँद लग जाते।

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