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एलओएल हँसे तो फँसे
एक एक इंसान पर अलग अलग आदमी नजर रख रहे हैं।
इतने सारे कैमरामैन हैं।
आपके ऊपर नजर रखी जा रही है कि आप हँस तो नहीं रहे।
हैलो, निदेशक मण्डल।
हाँ! बताइए क्या कहना है?
कैसा चल रहा है?
जो रचनात्मक गतिविधी है… आपका कैसे चलता है?
सर, यह एक थेस्पियन है।
थेस्पियन का मतलब है कि मैं रिटायर हो चुका हूँ। मैं जा चुका हूँ।
दुनिया का सबसे ऊपर।
उसके बाद नीचे से ये देख रहे हैं उनको।
मुझे लग रहा है, ये हँस रहा है। ये हँस रहा है यार।
- चलो। -चलो।
- - ये क्या है?
अब हम हँस सकते हैं।
हो गया।
रुक गया।
हमें नहीं पता।
मल्लिका पूरी बोर कर रही है यार।
लाजवाब।
बिलकुल ही लाजवाब।
पीला कार्ड है कि लाल कार्ड है?
चलिए देखते हैं…
पुनः प्रदर्शन
अच्छा। मतलब, बस इतने भर से!
बहुत अच्छा।
-सबका दिन आएगा भाई। -तुम्हें पीलिया हो गया है।
सबका नंबर आएगा।
सुरेश वो आपके मसूढ़ों वाली बात बताओ न?
-वो जो आपके गाल में कुछ हो गया था। - हाँ।
वो डेन्टिस्ट इधर दाँत के गड्ढे भर रहा था।
खोद रहा था।
जैसे आपको वो वाली बीमारी है वैसे ही इनको ऐसे ऐसे करने की बीमारी है।
मैं असल में इन दोनों से थोड़ा बचने की कोशिश कर रहा हूँ।
गेरा और सुनील।
तो वहाँ पर काबू रखना थोड़ा सा मुश्किल हो गया।
और फिर मैंने कोशिश की ऐसे।
लेकिन वो निकल जा रहा है।
भगवान ने इतना मुस्कुराता हुआ चेहरा दिया है। क्या करूँ?
अदिति के तुरंत बाद सुरेश सर का कार्ड, तो मतलब है
कि किसी की खैर नहीं है।
पर मैं इसका विरोध करता हूँ
-क्योंकि यह दक्षिण भारतीयों के खिलाफ है। - चुप करो।
आप एक मलयाली को गेम से बाहर करने की कोशिश कर रहे हो।
अकेले क्या करेगा विरोध करके?
हाँ यार। धत तेरे की!
- चलो, शो चालू करो। - शो चालू करो, चलो।
हाय, मैं हूँ सायरस बरोचा।
मैं हूँ सायरस बरोचा।
- तो ऐसे रहता है वो। - सायरस ऐसे चलता है।
शादी पर भी शॉर्ट्स पहन कर गया था।
हँसे तो फँसे, एलओएल में…
बरोचा सबसे ज्यादा प्रतिभाशाली कोमेडियन है।
बहुत कम कोमेडियन को देखा है, जो एक ही तरीके के प्रतिभाशाली होते हैं।
हाँ मैं हूँ बरोचा, बोलो। बोलो भाई!
- भाई, एक सेकंड। - हाँ।
भाई आपको क्या लगता है यह चित्र क्या है?
-कौन सा? -ये वाला।
ये बहुत अच्छा है।
और इसमें ऐसा लग रहा है कि ज़िंदगी में सिर्फ पाँच मिनट बचे हैं।
-हाँ। -पाँच घंटे असल में।
- बहुत बढ़िया। - और कम होते जा रहा है।
तो जितनी ज़िंदगी है उसे मजे लेकर जियो।
-अच्छा। -और जितना चाहिए खूब हँसो।
- बात करते रहो, हाँ। -हँसो हँसो, हँसते रहो।
हँसते रहो। और कोई हँसो।
हँसते रहो।
हँसते रहो।
अच्छा।
- -
शो टाइम आदर मलिक
ठीक है।
-शो टाइम। - शो टाइम।
ये सभी लोग परफॉरमर और एक्टर हैं।
हम सभी लोगों को ज़िंदगी में एक बार तो…
किसी न किसी तरह के एक्टिंग वर्कशॉप में जाना पड़ा है।
और हम सब लोग कभी न कभी ऐसे…
टीचर से ज़रूर मिले हैं जो मतलब इतने सनकी होते हैं।
मतलब आज तक कुछ उखाड़ा नहीं उसने अपनी ज़िंदगी में एक्टिंग करके।
और वही किरदार अब मैं करने जा रहा था।
पीछे जाके कर लो, थोड़ा पीछे जाकर कर।
गेरा पूरा तूफानी हो रहा है।
दोस्तो, इकट्ठे हो जाओ। आप लोगों का बहुत बहुत शुक्रिया।
चलो ताली बजा कर शुरुआत करते हैं।
चल आदर। शाबाश बेटा।
चल!
और जिस बारे में मैं आप लोगों से बात करना चाहता हूँ…
वो है सच्चा थिएटर।
बहुत ही दिलचस्प है अभी तक।
यह सच में काफी दिलचस्प है। मैंने…
ज़िंदगी भर एक थेस्पियन के तौर पर लोगों को तैयार किया है।
- यह थेस्पियन क्या है? - मैं चाहता हूँ आप लोग खड़े
-हो जाए। -वो जिसको बहुत प्यास लगती है न।
मैं आप लोगों को बताना चाहता हूँ कि एक थेस्पियन होने का
क्या मतलब होता है?
मैं चाहता हूँ आप खुल कर सामने आओ।
ओय सर।
अंग्रेज़ी नहीं। हिन्दी में।
थिएटर का नाम है सच्चा थिएटर।
इससे ज्यादा नहीं। बस हो गया।
तो सभी लोग यहाँ पर आ जाओ।
अपना पार्टनर बना लो।
और सभी को अपने कपड़े उतारने हैं?
नहीं। कोई अपने कपड़े नहीं उतारेगा।
क्योंकि वो बाद में होगा। ठीक है?
तुम दोनों साथ में खड़े हो जाओ, तुम दोनों, तुम दोनों…
वो फिल्म में होता है, थिएटर में नहीं होता है। फिल्म में होता है।
-आप दोनों सर। अपना पार्टनर… -मुझे इनके साथ क्यों?
प्यार-व्यार का सीन नहीं है।
यह बस एक साधारण एक्टिंग है।
हैलो।
बहुत हो गया। बहुत हो गया यह नौटंकी।
-सॉरी। - मैं मॉनिटर बन सकता हूँ?
नहीं तुम मॉनिटर नहीं बन सकते।
क्योंकि यह मेरा शो टाइम है। ठीक है?
बाबा, यह नाटक कब चालू होगा? मेरा वो…
मैंने नाटक चालू कर दिया है।
चलो जल्दी करो… मुझे इस माइक की भी ज़रूरत नहीं है।
थिएटर इन सब चीजों से नहीं होता है।
आगे झुको और ऐसे झूलो, सभी लोग।
सब कुछ ढीला कर लो।
पीछे गांड तक पूरा ढीला कर लो।
अपने पार्टनर को देखो।
सभी लोग अपने पार्टनर को देखो।
अपने पार्टनर की आँखों में देखो।
अपने पार्टनर की आँखों में देखो सर।
अपने पार्टनर की आँखों में देखो।
अगर मैं इन लोगों को एक दूसरे की आँखों में देखने के लिए बोलूँ।
अगर मैं…
सालों ने सुन ली होती न मेरी, तो हँस देते…
और फँस जाते? पर सभी साथ मिल गए मेरे खिलाफ?
ठीक है। सभी लोग गहरी साँस लो।
कितना गहरा?
जितना गहरा ले सकते हो सर।
ऐसा है कि आप इस थिएटर को ख़ुद में भर रहे हो।
एक आदमी की क्षमता होती है।
-उससे ज्यादा अंदर वो नहीं कर सकता। - हाँ, वो आपकी क्षमता है।
- जितना कर सकते हो करो। -पर फिर बोलो न।
मरने के पहले तुम हमें बता देना।
सभी लोग शांत हो जाइए। गहरी साँस भरिए।
और साँस बाहर वैसे ही फेंकना जैसे तुम लोग डायलोग बोलते समय करते हो।
मन से करो।
- मैंने महसूस किया। - पूरे मन से करो।
- बस कुछ और नहीं। - सुरेश इधर ध्यान दो यार।
काका!
सुरेश थोड़ा ध्यान दो, सुरेश।
सर, मैं आपके हाथ जोड़ता हूँ, वो कुछ कर रहे हैं।
मैं इसे कसरत करा रहा हूँ।
ठीक है सुरेश। कोई बात नहीं।
माफ़ी चाहता हूँ सर।
अब हम एक सबसे प्रसिद्ध मोनोलोग उठाएँगे,
जो हमारे ध्यान में आता है। ठीक है?
- हो जाऊँ या ना होऊँ… - यही तो सवाल है।
अब मैं चाहता हूँ कि तुम में…
से हर कोई अपनी पंक्तियाँ पढ़ना चालू करे। ठीक है?
हो जाऊँ या ना होऊँ…
नहीं मैं चाहता हूँ कि ऊ अंदर रहे।
ऊ में डाल अपना ऊ!
-ऊ क्या? - ऊ को-- चुप करो?
ऊ के अंदर में ऊ।
तुम्हारा मौका भी आएगा लड़की।
-आएगा तुम्हारा मौका। - या ना होऊँ?
मेरे ख्याल से यह लिंग-भेदी है।
सायरस, ऊ अंदर।
- हो जाऊँ या ना होऊँ… - या ना होऊँ…
मैं भी सुर लगाता हूँ तुम्हारे साथ।
ठीक है, सभी लोग, एक साथ।
आज सभी लोगों को यहाँ पर कुछ सुंदर अनुभव हासिल हुआ है।
आप लोगों का बहुत शुक्रिया।
शो टाइम।
- बहुत बहुत शुक्रिया। - शुक्रिया।
शुक्रिया। बहुत अच्छे। यह तुम्हारा है।
गेरा, तुम्हें पता है यह मुझे किसकी याद दिलाता है?
विद्या बेलन।
क्या?
मेरे परिवार में वैसे तो बहुत सारे लोग होते थे?
पर मेरे रवैये के कारण सबने मेरे को छोड़ दिया।
इतना खराब था क्या तुम्हारा रवैया?
बहुत अकड़ है यार मेरे में।
जितना तुममें है न ये वाला…
अरे, वो बस एक आदत है।
मेरे भी उतनी ही अकड़ है।
आप न बड़े ठंडे मिजाज के हों वैसे।
काका को खाना खाना है?
जब आप वीजे थे न, मैं उसी समय पैदा हुई थी।
-काका अपना जन्मदिन मनाओ। -काका केक खाएँगे।
मिस्टर "हो जाऊँ या ना होऊँ'" बहुत गुस्सा वाले हैं आप।
-ये… -अब ज्यादा नहीं।
बहुत हो गया।
बहुत हो गया। और नहीं। और नहीं। बहुत चर्बी है उसमें।
इसमें चीनी की मात्रा है।
आपको शुगर हो जाएगी।
आप पहले भी शुगर से दो बार मर चुके हैं।
-सुरेश सर। -हाँ?
अपने काका का ध्यान रखो न अब।
काका का आपने सारा पुर्जा ही निकाल दिया है।
और बहुत जल्दी हड्डी-विहीन काका होने वाले हैं।
उसकी एक भी हड्डी नहीं बचने वाली है।
ये काका का कौन सा पुर्जा है।
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