The Platform

The Platform (El hoyo)

د Hindi ژباړه ډاونلوډ کړئ

د خپرونې معلومات

The Platform 2019 SPANISH WEBRip x264-VXT Hindi
د لخوا تبصره nortwing
Netflix Official Subtitle , runtime 1 h 34 min , 25.000 fps

تګونه

webrip
web
x264
BRip
په خپور شو: 2020-03-20
ډاونلوډونه: 87
د اوریدلو معیوبیت: No

د Hindi سرليکونو مخکتنه

لومړۍ 200 کرښې.

‎NETFLIX प्रस्तुत करता है

‎तीन तरह के लोग होते हैं।

‎कुछ जो ऊपर होते हैं,

‎कुछ जो नीचे होते हैं,

‎और कुछ जो गिर जाते हैं।

‎मंज़िल 48।

‎-कोठरी। ‎-हाँ।

‎कोठरी।

‎और महीने की बस शुरुआत हुई है।

‎इसलिए सवाल यह है...

‎कि हम क्या खाएँगे?

‎हम क्या खाएँगे?

‎ज़ाहिर है, ऊपर वालों का बचा-खुचा।

‎-ऊपर क्या है? ‎-मंज़िल 47। ज़ाहिर है।

‎मेरा नाम गोरेंग है।

‎कृपया कोठरी में अपनी तरफ़ ही रहो।

‎गोरेंग।

‎आपका क्या नाम है?

‎हाँ।

‎हमें एक-दूसरे का नाम पता होना चाहिए।

‎काफ़ी वक्त एकसाथ बिताएँगे।

‎या फिर नहीं।

‎क्या पता?

‎मेरा नाम त्रिमगासी है।

‎मिस्टर त्रिमगासी, ‎आपको कोठरी के नियमों के बारे पता है?

‎ज़ाहिर है, बात सिर्फ़ खाने की है।

‎कभी-कभी बहुत आसान होता है।

‎कभी बहुत मुश्किल होता है।

‎मंज़िल पर निर्भर करता है।

‎खुशकिस्मती से, ‎मंज़िल 48 के हालात अच्छे हैं।

‎क्या नीचे कई लोग हैं? ‎रुकिए, बताने की ज़रूरत नहीं।

‎ज़ाहिर है।

‎बहुत जल्द, वहाँ इतने लोग नहीं होंगे।

‎-ए, मेरी आवाज़ सुनाई दे रही है? ‎-उन्हें आवाज़ मत दो।

‎-क्यों नहीं? ‎-क्योंकि वे नीचे हैं।

‎ऊपर वाले जवाब नहीं देंगे।

‎-क्यों? ‎-ज़ाहिर है, क्योंकि वे हम से ऊपर हैं।

‎आपके लिए हर बात ही ज़ाहिर है, क्यों? ‎आप काफ़ी वक्त से यहाँ हैं।

‎महीनों से। कई महीनों से।

‎फिर भी कहता हूँ, ‎मंज़िल 48 के हालात अच्छे हैं।

‎खुद को ख़ुशकिस्मत समझो।

‎हम कब तक इस अच्छी मंज़िल पर रहेंगे?

‎कम से कम एक महीना।

‎उसके बाद देखेंगे।

‎और अब मैं किसी और सवाल का जवाब नहीं दूँगा।

‎बात करने से मुझे थकान होती है।

‎ख़ासकर तब, जब जितना पता चलता है, ‎उससे ज़्यादा बताना पड़े।

‎ज़ाहिर है, यह ठीक नहीं है।

‎इसलिए अब से,

‎जितना तुम मुझे बताओगे, ‎मैं भी तुम्हें उतना ही बताऊँगा।

‎लाल बत्ती बंद है। हरी बत्ती जल रही है।

‎मैंने आपको जानकारी दी। ‎अब जवाब में आपको कुछ बताना होगा।

‎लाल बत्ती बंद क्यों हो गई?

‎यह तो खाया हुआ खाना है।

‎ज़ाहिर सी बात है, ‎मैं "ज़ाहिर है" नहीं कहने वाला।

‎सरासर घटियापन है।

‎अच्छा।

‎अगर हमारे ऊपर 47 मंज़िलें हैं, ‎और हर मंज़िल में दो लोग हैं,

‎तो हम 94 लोगों का बचा-खुचा खा रहे हैं।

‎चिंता मत करो।

‎जल्द ही, ऊपर इतने लोग नहीं होंगे।

‎-खाओगे नहीं? ‎-मुझे भूख नहीं है।

‎भूख लगेगी।

‎लोग कैसे कम हो जाएँगे?

‎यह तो नहीं कहूँगा कि ज़ाहिर बात है, ‎क्योंकि ज़ाहिर बात नहीं है।

‎जब तक मैं मंज़िल आठ पर नहीं गया था, ‎मैं खुद भी समझ नहीं पाया था।

‎शराब!

‎ऊपर की मंज़िल वाले मुसलमान ‎और शराब न पीने वाले रहे होंगे।

‎आमतौर पर, शराब यहाँ तक नहीं पहुँच पाती।

‎तुम सच में नहीं खाओगे?

‎बाद के लिए है।

‎आपने ऐसा क्यों किया?

‎नीचे वाले इसे खा सकते हैं।

‎ऊपर वालों ने भी यही किया हो तो?

‎शायद करते ही होंगे।

‎कमीने कहीं के।

‎-गर्मी लग रही है क्या? ‎-गर्मी बढ़ेगी।

‎बढ़ेगी?

‎एक मिनट में हमारा उबलने जैसा हाल होगा।

‎अच्छा? क्यों?

‎तुम्हारी वजह से।

‎बिना किसी रोक के, तापमान बढ़ेगा, अगर...

‎-अगर क्या? ‎-अगर तुमने वह सेब न गिराया।

‎जब तक मंच हमारी मंज़िल पर है, ‎तभी उस खाने पर हमारा हक है।

‎अगर तुम कुछ रख लेते हो ‎तो तापमान इतना बढ़ेगा कि हम झुलस जाएँगे।

‎या फिर तब तक कम होगा ‎जब तक जमकर मर नहीं जाते।

‎कभी कुछ, तो कभी कुछ।

‎धत्।

‎आई बात समझ में?

‎आई बात समझ में?

‎क्या?

‎यह बात समझ में आ गई कि अंदर आने पर, ‎मियाद पूरी होने से पहले नहीं जा सकते?

‎तो, मुझे अपना लिया गया है।

‎अभी नहीं।

‎क्या वह चीज़ किताब भी हो सकती है?

‎तुम्हारी ज़रूरत की कोई भी चीज़ हो सकती है।

‎द इंजीनियस जेंटलमैन - डॉन क्विकज़ोट

‎आपको अपने यहाँ होने की वजह ‎बताना चाहता हूँ।

‎किस लिए?

‎ताकि आप भी मुझे ‎अपने यहाँ होने की वजह बताएँ।

‎ज़ाहिर सी बात है।

‎मैं सिगरेट छोड़कर ‎"डॉन क्विकज़ोट" पढ़ना चाहता था।

‎मुझे कहा गया था कि साथ में ‎कोई चीज़ ला सकता हूँ और मुझे लगा...

‎अपनी मर्ज़ी से यहाँ आए हो?

‎एक अधिकृत डिप्लोमा लेने के बदले ‎छह महीने रहना था।

‎एक अधिकृत डिप्लोमा?

‎क्या मतलब है तुम्हारा?

‎फिर तो मुझे दो मिलने चाहिए।

‎मैं यहाँ एक साल के लिए रहूँगा।

‎आप यहाँ किस लिए हैं?

‎तो, इसे एक मिलेगा और मुझे कुछ नहीं मिलेगा?

‎तुम्हारी जगह मैं होता तो निकल जाता।

‎-तुम आज भी नहीं खाओगे? ‎-ज़ाहिर है, नहीं।

‎सब बेकार है।

‎तुम इस मंज़िल के लायक ही नहीं हो।

‎आपने बताया नहीं कि आप यहाँ कैसे आए।

‎चलिए, अब बताइए।

‎ठीक है, पर अगर तुम वादा करो ‎कि "ज़ाहिर है" शब्द को नहीं चुराओगे।

‎घर पर एक दाढ़ी वाले को देख रहा था जो चाकू ‎धार करने वाले औज़ार का विज्ञापन कर रहा था।

‎उसने कहा, "सामुराई-मैक्स से हर चाकू की धार ‎बना सकते हैं, सीधी हो या दाँतेदार।"

‎"इस चाकू को देखिए।

‎कितना बेजान है, इससे एक स्पंज भी न कटे।

‎सामुराई-मैक्स के इस्तेमाल से, सख़्त से ‎सख़्त सतह को चीर डालें, इस ईंट को भी।"

‎और वही हुआ।

‎उसके बाद, कई गृहिणियाँ आईं

‎और उन्होंने दावा किया कि सामुराई-मैक्स से ‎उनकी ज़िंदगियाँ बदल गईं।

‎"हम टमाटर भी नहीं छील पाते थे,

‎और ब्रेड का चूरा हो जाता था।

‎सामुराई-मैक्स से ‎हमारी ज़िंदगियाँ बदल गई हैं," सभी ने कहा।

‎सच कहूँ तो, मैंने कभी टमाटर नहीं छीला।

‎और कटी हुई ब्रेड ही खरीदता हूँ।

‎रसोई वाले चाकू से किसी को ‎ईंट काटने की भला क्या ज़रूरत पड़ सकती है?

‎पर मैं सोचने लगा।

‎मैं अपनी चाकुओं की धार क्यों नहीं बनाता?

‎उन्हें धार न करने की वजह से ‎अगर मेरी ज़िंदगी बेकार हो गई हो तो?

‎क्योंकि मैं ‎छोटी-छोटी बातों पर ध्यान नहीं देता?

‎-छोटी बातों पर, गोरेंग। ‎-तो फिर आपने खरीदा?

‎-ज़ाहिर है, खरीदा। ‎-फिर क्या हुआ?

‎क्या आपने अपने चाकू को धार किया ‎और किसी का गला काट दिया?

‎मैंने उन्हें खरीदा ‎और अगले विज्ञापन का इंतज़ार करता रहा।

‎वही दाढ़ी वाला और वही गृहिणियाँ फिर से आए।

‎सोचो कि इस बार वे क्या बेच रहे थे।

‎एक ऐसा चाकू ‎जिसकी धार ईंट काटने पर भी खराब नहीं होगी।

‎काटते वक्त, खुद-ब-खुद उसकी धार बन जाती है।

‎पता है उसका नाम क्या था?

‎-सामुराई-प्लस। ‎-तुमने भी खरीदा था क्या?

‎-नहीं। ‎-ज़ाहिर है, वे मुझे देखकर हँसे।

‎छोटी-छोटी बातें।

‎छोटी-छोटी बातों से ‎मेरा दिमाग ठिकाने न रहा।

‎मैंने अपना टीवी उठाया,

‎उसे खिड़की के बाहर दे मारा,

‎और वह किसी ग़ैरकानूनी अप्रवासी के ऊपर ‎जा गिरा जो मोटरसाइकल पर था।

‎उस बंदे की मौत का कसूरवार मैं हूँ क्या?

‎उसे तो वहाँ होना ही नहीं चाहिए था।

‎आपको यहाँ ‎किसी का कत्ल करने के लिए लाया गया था?

‎मुझसे पूछा गया था, ‎मनोवैज्ञानिक वार्ड या फिर कोठरी।

‎इसलिए मैं यहाँ आ गया।

‎जबकि उन्होंने ‎मुझे अधिकृत डिप्लोमा देने की बात नहीं की।

‎यहाँ कितनी मंज़िलें हैं?

‎मुझे नहीं पता। कम से कम 132 तो होंगी, ‎क्योंकि मैं उस पर था।

‎एक सौ बत्तीस।

‎नीचे और भी हैं।

‎-कितना खाना नीचे तक पहुँचता था? ‎-कुछ भी नहीं।

‎बिना खाने के एक महीना काटना मुश्किल है।

‎यह नहीं कहा कि खाना नहीं खाया।

‎बस यह खाना नीचे तक पहुँचता नहीं था।

‎और बिना खाए एक महीना काटा जा सकता है।

‎अगर लगातार दो नीचे की मंज़िलें मिलें तो, ‎गए काम से।

‎हमें ऊपर वालों से बात करनी होगी।

‎किस लिए?

‎उन्हें अपने खाने का हिस्सा करना होगा।

‎वे मंज़िल 46 से बात करेंगे।

‎वे आगे 45 से और बात आगे जाएगी।

‎तुम साम्यवादी हो क्या?

‎वाजिब बात कर रहा हूँ। ‎खाने का हिस्सा करना सही होगा।

‎ऊपर वाले साम्यवादियों की बात नहीं मानेंगे।

‎तो नीचे वालों से शुरू करेंगे।

‎ए! नीचे, मंज़िल 49 में जो भी है!

‎अगली बार हमारे लिए भी ‎शराब छोड़ देना, कमीनों!

‎यह लो शराब, कमीनों।

‎नीचे वाले नीचे वाले ही हैं, गोरेंग।

‎-अगले महीने वे हमसे ऊपर जा सकते हैं। ‎-फिर वे हम पर पेशाब करेंगे।

‎कमीने कहीं के।

‎मैं एक किताब लेकर आया हूँ।

‎तुम क्या लेकर आए?

‎ज़ाहिर सी बात है।

‎सामुराई-प्लस।

‎आप उस सब से थकते नहीं?

‎लाजवाब है।

‎इसका जितना इस्तेमाल करूँगा, ‎उतनी इसकी धार बनेगी।

‎-कोई इंसान था क्या? ‎-हाँ, बिल्कुल।

‎उम्मीद है कि शराब पीने वाला हो।

‎वैसे भी शराब की तंगी है।

‎ऊपर वाली मंज़िलों में ‎जितना मर्ज़ी खा सकते हो।

‎पर आगे कुछ उम्मीद नहीं होती...

‎और सोचने के लिए काफ़ी कुछ होता है।

‎कोई कुछ नहीं करेगा क्या?

‎अगर तुम्हारी जगह होता, ‎तो मध्य मंज़िलों में रहने की दुआ माँगता।

‎तुम्हें देखकर लगता है ‎कि तुम ऊपर होते तो कूद जाते।

‎और तुम्हारी नीचे जाकर रहने की ‎हिम्मत नहीं होती।

تبصرې

No comments yet. Be the first to leave one.

Keep it about this subtitle — sync, quality, typos.500 characters left