Mistari 200 ya kwanza.
-सुभाष! खड़े रहो वहाँ। -नहीं। मैं नहीं रुकूँगा!
तेल मत लगाओ!
तेल लगाने से तुम्हारा दिमाग ठंडा रहेगा।
-इधर आओ। -मेरी आँखें जलेगी। मुझे नहीं चाहिए।
मैं तुम्हें एक कहानी सुनाऊँगी। आओ।
-कहानी? -हाँ!
-किसकी कहानी? -राजा बाली चक्रवर्ती की कहानी।
-अच्छा? -अब तुम सुनोगे? अच्छा बच्चा।
-बैठो! -सुनाओ, मम्मी।
एक समय की बात है, एक बहुत बड़ा साम्राज्य हुआ करता था।
उस साम्राज्य पे राज करते थे बाली चक्रवर्ती नामक एक राजा।
बाली पूरे विश्व के राजा थे।
वो अपने दानवीरता के लिए जाने जाते थे।
लोग बाली चक्रवर्ती को असली भगवान मानने लगे।
वक़्त के साथ साथ, बाली ने इंद्र को हाराने की ठान ली...
...और जन्नत पे कब्जा करने की सोची।
वो सारे ज़रूरी यज्ञ और पूजा करने लगे।
इन्द्र को ये बात दिखी, उसे दर लगने लगा कि...
...स्वर्ग उसके हाथ से चला जाएगा और भगवान विष्णु के पास मदद मांगने गए।
-क्या मांगा उन्होने? -इन्द्र ने फ़रियाद किया...
..."हे भगवन, अगर ये चलता रहा बाली मुझसे स्वर्ग छीन लेगा।"
"मैं उसे हारा नहीं सकता। कृपया कुछ कीजिये!"
...और उनके पाव पे गिर गये।
ये सुन कर, विष्णु जी ने एक प्लान बनाया।
उन्होने एक 'वामन' नामक एक बौना साधु का रूप धारण कर लिया।
वो बाली से मिलने गये, जो अश्वमेध यज्ञ कर रहा था...
और गरीबों को दान कर रहा था।
वामन गये बाली के पास और एक मदद मांगी ये बोलकर...
..."मैं एक आश्रम बना रहा हूँ, कृपया मुझे थोड़ी ज़मीन दे दीजिये।"
बाली ने कहा कि वो एक पूरा शहर दे देगा...
...ताकि वो मर्ज़ी मुताबिक आश्रम बना सके।
वामण जवाब में कहता है, "मुझे कोई शहर या नगरी नहीं चाहिए।"
"मुझे तो बस तीन कदम रखने लायक ज़मीन चाहिए और...
...मैं उतने में ही आश्रम बना लूँगा।"
-इसके बाद क्या हुआ? -और फिर...
ऐसा सोचके कि बस तीन कदम जगह चाहिए, राजा बाली राज़ी हो जाते हैं।
ये सुनते ही, वामण आसमान से बड़ा आकार ले लेते हैं।
उनका पहला कदम पूरी धरती ढक लेता है।
उनका अगला कदम पूरा आसमान ढक लेता है।
वो तीसरा कदम कहाँ रखते हैं?
अब देने के लिए कुछ भी न बचा था, बाली झुक जाता है...
...वामण के सामने और बोलता है...
"हे प्रभु! मैं अपना सिर देता हूँ आपको आपका तीसरा कदम रखने के लिए।"
वामण अपना तीसरा कदम बाली के सिर पे रखता है...
और उसे पाताललोक पोहुंचा देता है।
-तो, राजा बाली मर गये क्या? -हाँ बेटा!
बाली तो अच्छा आदमी था न?
फिर वो क्यों मारा गया?
बताओ माँ। अच्छे लोगों के लिए क्या इस दुनिया में कोई जगह नहीं है?
जवाब दो माँ। आप चुप क्यों हो गयी?
मैंने पाँच सौ का तेल भरवाया और पचास किलोमीटर भी नहीं चलाया।
मुझे लूट रहे हो क्या?
मैं क्यों तुम्हें लुटुंगा?
भगवान जाने तुमने क्या किया या फिर किसी ने तुमसे चुरा लिया होगा?
निकलो यहाँ से!
आवाज़ ऊंची मत करना!
अगर मैं अपने लोगों को ले आया, तुम लोगों को दुकान बंद कर भागना पड़ेगा।
-किसको बुलाएगा रे? -तेल भरवाओ, या फिर...
चलो! बुलाओ जिसे बुलाना है!
पहले तो तुम मुझे ठगते हो और फिर बहस भी करते हो...
जो मर्ज़ी करो। निकलो यहाँ से।
-शंकर! ये पैसे बैंक में जमा कर दो। -ज़रूर सर।
रुको, दिखाता हूँ मैं क्या कर सकता हूँ!
ओए।
-ओए। ओए! -बैग उतारो!
ओए!
ये बैग दे दो।
ओए! ओए!
अरे भगवान!
ये किसका पैसा है? केरोसिन की बू आ रही है।
किसको मार के चुराया है ये तूने?
माँ... जिसके हाथ में पैसा होता है वो उसका मालिक बन जाता है।
अभी तुम्हारे हाथ में हैं, तो ये तुम्हारे हुए।
दो यहाँ...
अब ये मेरे पास है। तो, मेरे हुए!
पैसे के पास अगरबत्ती जला दो।
केरोसिन की बू कम हो जाएगी।
और, लेनदारों को पैसा दे दो।
तू... तू कभी भी ज़िंदगी में लायक नहीं बनेगा।
चोरी का श्राप तुझे बर्बाद कर देगा।
श्राप?
चलते बनो।
-रेत खरीदने आये हो? -हाँ।
मैं अच्छा दाम दिला सकता हूँ।
देखते हैं।
-जैसी आपकी मर्ज़ी! -अन्ना है यहाँ! चलते हैं!
सब इधर आ जाओ! भास्कर!
-कितने ट्रक आये हुये हैं? -पच्चीस आये हुए हैं, अन्ना।
अच्छा? हर एक ट्रक पर नज़र रखो और...
...शनिवार को पेमेंट कर देना।
एक भी छूटना नहीं चाहिए। मैं अभी निकलता हूँ!
-जगह दो! -किसी की परवाह मत करना!
-तुम लोग तैयार हो? -जी सर!
-मुझसे बाइपास रोड पे मिलो! जल्दी! -ज़रूर सर।
जाओ, उसे घसीट कर लाओ।
चलो हमारे साथ। ऑफिसर तुमसे मिलना चाहते हैं।
कौन...? मैं? चल अपना काम कर!
अपना काम ही कर रहे हैं! उठ! अभी के अभी!
-उठिए सर। -हाथ मत लगाना!
छोड़ो मुझे! तुम्हारी माँ की...
जानते हो मैं कौन हूँ?
कोई फर्क नहीं पढ़ता। ऑफिसर तुमसे मिलना चाहते हैं।
लगता है नए हो! जानते नहीं हो मैं कौन हूँ!
हर महीने मेरे से हफ्ता लेते हो और मुझसे ही पंगा ले रहे हो!
-ऑफिसर को यहा बुलाओ! -साले! तेरी हिम्मत कैसे हुई...
...एक ऑफिसर पर हाथ उठाने की।
-सर! माफ़ करना! मुझसे गलती हो गयी। -हिम्मत कैसे हुई!
-कमीने! -माफ़ कर दो, सर!
मैं चलता हूँ आपके साथ।
ओए। वो तुम्हारे साथी को मार रहा था और तुम चुपचाप देख रहे था!
इस पर कसे दर्ज करो एक सरकारी मुलाज़िम को...
...अपना काम करने से रोकने के लिए।
पच्चीस ट्रक के बदले, डेढ़ सौ ट्रक घूमते हैं!
जीपीआरएस से छुप कर।
इस गफ़ले से जो भी जुड़े हैं सबको बर्खास्त करो!
-समझ गए? -जी सर!
मार मार के भर्ता बना दूंगा! -मत मारिये, सर।
-ले चलो इसे! -सर, प्लीज...
सर, इस बार के लिए मुझे जाने दो!
ये लो।
मम्मी, आप हमारे साथ क्यों नहीं रहती?
मुझे बहुत खुशी होगी अगर हम सब साथ में रहेंगे।
अगर मैं यहाँ से चली जाऊँगी, तो मेरे पशुओं का ध्यान कौन रखेगा?
किसिकों तो ध्यान रखना पड़ेगा न?
कब तक आप इन पशुओं के साथ रहोगी?
आपने मेरे लिए इतना कुछ किया है, अब मुझे आप दोनों का खयाल रखने दो।
उफ़! अगर मैं एक गाँव वाली वहाँ जाएगी, तो अपाहिज महसूस करूंगी।
और, मैं वहाँ करूंगी क्या?
मैं आती जाती रहूँगी! तुम सुखी रहो उतना ही काफी है!
तुम्हें भी खुश रहना चाहिए। पापा को साथ लेके आजाओ हमारे यहाँ।
-हाँ, प्लीज! -तुम्हारे पापा के साथ?
मैं शायद मान भी जाऊ, पर वोह यहाँ से हिलेंगे भी नहीं!
अगर गौमूत्र की खुशबू उनके...
...नाक तक न पोहुंचे, उन्हे सास ही नहीं आती।
वो किसी भी कीमत पर राज़ी नहीं होंगे! ये लो!
-हैलो? -सर, विधायक भाले प्रसाद ने...
...हमारे तहसीलदार को मारा...
समझ गये? ये तुम सब पर लागू होता है।
पीछे हो जाओ!
हरामखोरों! इतनी चोटी सी बात के लिए तुम एक एमएलए को बुलाते हो!
एक फोन कॉल से काम नहीं चलता क्या?
ज़्यादा घमंड आ गया क्या?
मैं कोई देहात में तुम्हें ट्रान्सफर करवा दूंगा।
कौन साला गाड़ी जप्त किया? क्यों किया?
-तुम्हें पैसे नहीं पोहुंचे क्या? -हमारी मजबूरी है, सर।
डीसी के ऑर्डर के मुताबिक, तहसीलदार यहाँ आए हैं...
...गाड़ियों को जप्त करने के लिए।
-आप उनसे बात करें। -सारे गाडियाँ जप्त करो। जल्दी।
बात? मैं यही उसे काट डालूँगा!
उसकी ऐसी की तैसी! मैं उसकी औकात दिखाता हूँ।
क्या समझता है मुझे? चाबी दे!
-गाड़ी में है। -अब देखना!
मैं उसी गाड़ी से उसको कुचल दूंगा जिस गाड़ी को उसने जप्त किया है!
सर, ऐसा मत करना। मेरी बात सुनिये...
मैं तुम लोगों को सबक सीखाऊंगा!
उससे मेरा कोई मतलब नहीं है। मेरी बात सुनो।
हिम्मत कैसे हुई मुझे ऑर्डर देने की? तुम कौन होते हो मुझे बताने बाले?
-हट जाओ! -क्या हो गया तुम्हें?
ज़िंदा रहना है तो भागो!
हिम्मत कैसे हुई मेरा ट्रक जप्त करने की? मैं इसी जगह तुम्हारा गर्दन उड़ा दूंगा!
तुम्हारा परिवार रास्ते में आ जाएगा!
जाके अपने डीसी को ये बताना! क्या समझते हो अपने आपको?
ये लो! हिम्मत कैसे हुई उसकी मुझे ऑर्डर देने की?
और तुम आ गए उसकी सुनकर!
सर, उसकी हालत अब सामान्य है! पर वो बयान देने के लिए राज़ी नहीं हो रहा।
-वो केस दर्ज करने के लिए तैयार नहीं है। -मैं अभी आ रहा हूँ।
माँ... मुझे अभी जाना होगा। अपना खयाल रखना।
-हम चलते हैं, पापा। -तुम दोनों अपना ध्यान रखना।
-ध्यान से! -हाँ, माँ।
ठीक है। तुम आराम करो, प्लीज।
सर, बैठिए।
कैसे हो तुम? डॉक्टर ने क्या कहा?
मैं ठीक हूँ, सर। बस छोटे मोटे ज़ख्म हैं।
एफआईआर तैयार है?
अगर शिकायत की जाएगी तभी तो केस बनेगा।
तुम एमएलए की शनाक्त कर सकते हो?
कर सकते हैं, पर करेंगे नहीं।
-कौन है ये? -उनका बेटा, सर।
आप ये सब मामले में क्यों पड़ते हैं?
अगर बात बिगड़ी, कोई साथ नहीं देगा।
लोग मुह फेर लेंगे।
समय आ गया है कि आप इस्तीफा दो और ये तय करो कि आप...
...मेरे साथ रहोगे या अपनी बेटी के पास।
जान रही तो ही, ईमानदारी और सच्चाई माइने रखती हैं।
आप आराम करो। मैं बाद में आता हूँ।
इंस्पेक्टर, आप वहाँ थे जब छापामारी चल रही थी?
-जी सर। मैं था वहाँ। -फिर तुमने एफआईआर क्यों नहीं कराया?
अगर अपनी बचाव नहीं कर पाओगे, तो जनता की रक्षा कैसे करोगे?
-ऐसी बात नहीं है सर... -बहाने मारना बंद करो।
जल्द से जल्द एफआईआर दर्ज करो, और मुझे एक कॉपी भिजवाओ।
-मैं आईजी से बात करूंगा। -ठीक है सर।
देखो, मुझे कोलार में चलने वाला हर एक रेत ट्रक की जानकारी चाहिए।
ज़रूर, सर।
अगर लोक पुलिस को कॉल करने से डरते हैं, तो उन्हें मुझे कॉल करने बोलो।
मेरा फोन नंबर दे देना। मैं खुद उनसे बात करूंगा।
-हर एक स्टेशन में बता दो। -ठीक है सर।
हैलो?
जीजा जी! मैं सुरेश हूँ। भेस ने बच्चा जनी है।
मम्मी पूछ रही थी कि पहला दूध आपके घर पर भेज दूँ क्या...
...या आप दीदी के साथ आ जाओगे।
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