200 บรรทัดแรก
मैं अमरीका को उसके उसी रूप में देखना चाहती हूँ
जैसा स्वतंत्रता की घोषणा और संविधान में दर्शाया गया है।
अमरीका, जैसा होने का दावा करते हो, असल में वैसे बनो!
पॉली मरी
बिना चश्मा पहने आपकी कुछ क्लोज़अप तस्वीरें ले सकती हूँ?
नीचे लेटो।
बैठ जाओ। नीचे लेटो।
नीचे लेटो।
शानदार।
इसे हर चीज़ में शामिल होना है।
मेरा नाम पॉली मरी है
और मैंने अपना पूरा ध्यान मानव अधिकारों पर लगाया है।
मेरा पूरा निजी इतिहास संघर्ष से भरा रहा है ताकि मैं ऐसे समाज के उत्कृष्टता के
मानकों पर खरी उतर सकूँ जिस पर यह सोच हावी रही है
कि मूल रूप से अश्वेत श्वेतों से कमतर थे
और महिलाएँ मूल रूप से पुरुषों से कमतर थीं।
पॉली मरी बेहद आधुनिक सोच वाली इंसान थीं।
उनके विचार और काम ऐसे थे जो बाकियों ने बहुत देर बाद अपनाए।
गैर-श्वेत प्रतीक्षा कक्ष
पॉली में उस दौर में भेदभाव का विरोध करने की हिम्मत थी
जब ऐसा करना बेहद ख़तरनाक होता था।
एक के बाद एक होने वाली घटनाओं का मतलब था कि देर-सवेर,
या तो मैं गुस्से में बेकाबू हो जाऊँगी
या विरोध का कोई तरीका ढूँढ़ लूँगी।
पॉली एक लेखिका, एक वकील, एक पादरी और एक कवयित्री थीं।
"उम्मीद मुट्ठी में दबी रेत जैसी है।
"उम्मीद बैठे हुए गले का गाना है।"
हम होंगे कामयाब
पॉली हम सबको हासिल अधिकारों और आज़ादियों के लिए बहुत अहम रही हैं।
पॉली मरी सिर्फ़ एक कमाल की वकील या एक हिम्मती नारीवादी ही नहीं थीं,
बल्कि वह एक समलैंगिक, गैर द्विआधारी इंसान थीं।
अधिकतर समय मेरे छात्र पूछते थे, "हम पॉली मरी के बारे क्यों नहीं जानते?"
एक इंसान इतना अहम कैसे हो सकता है
और फिर भी हम उसके नाम के बारे में कभी न जानें?
माय नेम इज़ पॉली मरी
मेरे पिता की बुआ पॉली ने फ़ोन करके कहा
कि वह अगली सुबह तक ज़िंदा नहीं रहेंगी।
उन्होंने कहा, "यहाँ पर तुम्हें मेरे कुछ काम करने पड़ेंगे,"
और कुछ घंटों बाद वह चल बसीं।
मुझे पता चला कि मैं उनकी जागीर की कानूनी अधिकारी हूँ...
केरन रूस रॉस पॉली की पोती
...तो मुझे उनकी चीज़ें समेटनी थीं।
कमरों में फ़ाइल कैबिनेटों की कतारें थीं और उनके ऊपर बुक केस पड़े थे।
बक्से, फ़ोल्डर, सरकार को लिखे ख़त।
उन्होंने हर चीज़ सहेजी हुई थी।
श्लेशिंजर लाइब्रेरी
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी
पॉली की वसीयत बिल्कुल साफ़ थी।
वह चाहती थीं उनके कागज़ात श्लेशिंजर लाइब्रेरी को जाएँ,
जो उन जगहों में से एक है जहाँ महिलाओं के ऐतिहासिक कागज़ात रखे गए हैं।
आंटी पॉली ने अपनी ज़िंदगी मुझसे ज़्यादा साझा नहीं की।
मैं जानती थी वह पादरी हैं और वकील रही हैं,
पर उन्होंने कभी अपनी उपलब्धियों का ज़िक्र नहीं किया।
मैंने वह सब पढ़ा जो पहले नहीं पढ़ा था
और तब मुझे एहसास हुआ, "हे भगवान।"
"पीटर्सबर्ग बस हादसा। मार्च, 1940।"
रोज़ा पार्क्स के बस में पीछे बैठने से इंकार करने से 15 साल पहले
मैंने जानबूझकर वर्जिनिया के अलगाव के कानूनों का...
पॉली मरी की ऑडियो रिकॉर्डिंग
...विरोध शुरू नहीं किया था।
जैसा कि उस पुराने ज़माने में अक्सर हुआ करता था,
कुछ ऐसी घटना होती थी
जिसमें आप संघर्ष करने के सिवा और कुछ नहीं कर सकते थे।
मैं और मेरी सहेली ईस्टर मनाने के लिए
अपनी दो आंटी के घर
न्यूयॉर्क से डरहम जा रही थीं।
मेरी सहेली का नाम एडलीन मैकबीन था।
हम उसे "मैक" बुलाते थे।
मेरी माँ ने पहली बार उसका सामना किया था...
मार्गरेटा मैकबीन एडलीन की बेटी
...जो दक्षिण के कई इलाकों में बेहद आम सी घटना होती थी।
मेसन-डिक्सन रेखा पार करने पर, आपसे पीछे जाकर बैठने की उम्मीद की जाती थी।
श्वेत
बस अलगाव की बुराई का वास्तविक स्वरूप थी।
बस के अंदर की नज़दीकी विशेषाधिकार प्राप्त श्वेत दर्शकों की मौजूदगी में
अश्वेत लोगों का सार्वजनिक तौर पर अपमान किए जाना संभव बनाती थी,
जो चुप रहकर या उपेक्षा से हमारी शर्मिंदगी देखते थे।
जब वे वर्जिनिया पहुँचीं,
अश्वेत लोग उठकर पीछे की ओर चले गए
और फिर और श्वेत लोग चढ़ गए।
बस ड्राइवर ने ज़ोर दिया कि हम बाद वाली सीट पर चले जाएँ।
वह सीट टूटी हुई थी और हमने उस पर बैठने से मना कर दिया।
बस ड्राइवर ने कहा कि जब तक वह पीछे नहीं जातीं
वह बस नहीं चलाएगा।
और पुलिस ने आकर हमें गिरफ़्तार कर लिया।
काउंटी जेल पीटर्सबर्ग, वर्जिनिया
मैक और मैं भूखी थीं और हमें ठंड लग रही थी, पर हम सोने से डर रही थीं
क्योंकि गद्दे खटमलों से भरे हुए थे।
जब मैंने विरोध जताया, तो बदमिज़ाज जेलर चिल्लाया,
"बकवास बंद करो, वरना कालकोठरी में डाल दूँगा।
"जब चूहे नोचकर खाने लगेंगे,
"तब सोचोगी, काश तुम अपना मुँह बंद रखती।"
वास्तविकता समझ में आ गई। हकीकत पता चल गई और...
शायद वह बहुत डरावना माहौल था।
पॉली ने एनएएसीपी से मदद माँगी,
इस उम्मीद में कि वे ऐसा आदेश पारित करा सकेंगे...
पैट्रिशिया बेल-स्कॉट
...जो अलग बैठाने को असंवैधानिक करार दे।
घटना का विवरण
आरोप - अशांति पैदा करना 3/23/41
बस का डायग्राम
मैक और मैंने एक रिपोर्ट बनाई,
मामले का एक सार, उसके तथ्य...
ज़मानत पर छोड़े जाने के बाद,
हमें एनएएसीपी के वकीलों, थरगुड मार्शल, जज विलियम एच. हेस्टी
और डॉ. लीयॉन ए. रैन्सम से मिलने के लिए बुलाया गया।
वह मेरी सक्रिय काबिल नागरिक अधिकार वकीलों के एक दल से पहली मुलाकात थी,
और मैं कई घंटों तक मंत्रमुग्ध बैठी रही।
वे अमरीकी जीवन में अश्वेत लोगों को आसानी से शामिल करने के अधिकार के लिए लड़ीं।
लेकिन जज जानता था कि यह मामला अहम बनता जा रहा है,
और इसलिए, आख़िर में, उन्हें मात दे दी गई।
पीटर्सबर्ग हस्टिंग्स अदालत
जज ने लागू अलगाव कानून का हवाला दिया और कहा,
"तुम शांति भंग कर रही थीं।"
धूम्रपान मना है गैर-श्वेत सीट पीछे से हैं
तो वे कानूनी मिसाल को नया रूप नहीं दे पाईं।
उन्होंने जेल की छोटी सी सज़ा भुगती और रिहा कर दी गयीं।
उस समय, मुझे सिर्फ़ एक निजी हार से
बहुत निराशा महसूस हुई,
पर मुझे एहसास होने लगा कि हम एक टीम वर्क का एक छोटा सा हिस्सा हैं
जो आख़िरकार अलगाव के सभी कानूनों को पलटने की कल्पना करता है।
वह सोच हम पर हावी हो गई थी।
रटगर्स यूनिवर्सिटी
तो आज हमें डॉ. एना पॉलीन मरी के बारे में जानने का
एक बहुत बढ़िया मौका मिला है।
पॉली मरी इतनी कमाल की हैं
कि मैं उनकी सभी खास पहल और उनकी सभी ख़ूबियाँ नहीं बता सकती।
सोचिए कि आप 20वीं सदी के एक अश्वेत इंसान हैं
और आप यह तर्क देने की कोशिश कर रहे हैं कि आपकी मानवता का आदर करना चाहिए।
आप ऐसी दुनिया में हैं जहाँ अश्वेत होने के कारण
आप पसंद नहीं किए जाते।
मैं आपको छोटा सा एहसास कराऊँगी कि मरी की ज़िंदगी में बदलाव कैसे आया।
यह हस्तलिखित आत्मकथा के
पहले अध्याय का पहला पन्ना है।
मेरे जन्म के साल, 1910 में प्रकाशित एक अध्ययन में
कोलंबिया यूनिवर्सिटी में काम कर रहे एक समाजशास्त्री, डॉ. हॉवर्ड डब्ल्यू ओडम ने
इस बात पर ज़ोर दिया कि नस्लों में अलग-अलग "क्षमताएँ और संभावनाएँ" होती हैं,
ये उनके शब्द थे।
और जो अश्वेत की मदद करना चाहते हैं, उन्हें, उनके शब्दों में,
"उससे ज़्यादा उम्मीद नहीं करनी चाहिए।
"उसे सदाचार, सच्चाई, सम्मान, मर्दानगी,
"ईमानदारी की बहुत कम समझ है।
"अश्वेत बच्चे के लिए सबसे बढ़िया शिक्षा वह होगी
"जो उसे इस बात की निर्विवाद स्वीकृति कराएगी
"कि वह श्वेत से अलग नस्ल है और यही सही भी है,"
उनके यही शब्द थे।
डॉ. हॉवर्ड ओडम
स्कूल बस
आज मुझे वह याद आता है और स्कूल की वह पुरानी इमारत देख सकती हूँ।
वह लकड़ी की एक जर्जर, पुरानी इमारत थी, कोई झूले नहीं थे।
बाहर जाने पर खेलने को कुछ नहीं था।
और बेशक, श्वेत बच्चे के स्कूल में,
बाड़ से घिरे एक लॉन में बैठना।
यह व्यवहार के उस अंतर को दर्शाता था जो हमसे किया जाता था
और जो व्यवहार श्वेत बच्चों से होता था।
और आपको वे बातें महसूस होती थीं।
मेरे परिवार में बहुत आत्मसम्मान था।
वे ज़िद्दी थे। मान्यताओं से उलट चलते थे।
यह वही घर है। यह पॉली मरी का पैतृक घर है।
जब वह इस घर में आईं, तो वह तीन साल की थीं।
डरहम, उत्तरी कैरोलाइना
और वह एक दुखद हादसे के कारण यहाँ आईं।
दिमाग की नस फटने से उनकी माँ चल बसी थीं,
और आख़िर में उनके पिता को मनोरोग अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।
हालाँकि उनका जन्म बाल्टीमोर में हुआ, असल में यही उनका घर था।
जब मैं डरहम में आई,
तो परिवार में आंटी पॉलीन, आंटी सैली
और मेरे फिट्ज़जेरल्ड नाना-नानी थे।
फिट्ज़जेरल्ड परिवार डरहम में बहुत मशहूर था
और अश्वेत समुदाय में उनका बड़ा मान था।
परिवार की पिछली पीढ़ियों में चेरोकी,
आयरिश, अफ़्रीकी अमरीकी लोग थे।
वह ऐसा परिवार था जिसमें कई सदस्य इतने गोरे दिखते थे कि उन्हें
श्वेत माना जाता था।
और पॉली बीच में कहीं आती थीं।
त्वचा के रंग के आधार पर पक्षपात होता था,
श्वेत समुदाय की ओर से और अश्वेत समुदाय की ओर से भी।
और इसलिए, उन लोगों का एक अपना ही अस्तित्व था।
पॉली उस घर की ख़ुशी थीं।
आंटी पॉलीन के कोई बच्चे नहीं थे, तो वह उन्हें बेहद चाहती थीं।
आंटी पॉलीन स्थानीय पब्लिक स्कूलों में पढ़ाती थीं
और जब मैं लगभग चार साल की हुई,
वह हर रोज़ मुझे अपने साथ ले जाने लगीं।
मुझे बड़े बच्चों के साथ बैठने और उन्हें पाठ पढ़ते देखने की इजाज़त थी।
स्कूल का साल ख़त्म होने पर,
आंटी पॉलीन को हैरानी हुई जब मैंने उनसे कहा,
"मैं पढ़ सकती हूँ, आंटी पॉलीन।"
मैंने अपने बगल में बैठे बच्चे की किताब उठाई और ऊँची आवाज़ में पढ़ने लगी।
जितना समय मैं उनकी क्लास में रही,
वह जो दूसरों को पढ़ाती थीं, मैं सीखती थी।
उसके बाद से, क्लास मेरा दूसरा घर बन गया था।
वह जो भी पूछना चाहती थीं, उन्हें पूछने की इजाज़त थी।
उन्हें अपनी राय रखने की इजाज़त थी।
लेकिन पॉली पोशाकें नहीं पहनना चाहती थीं।
और आंटी पॉलीन हर रविवार उन्हें चर्च ले जाया करती थीं।
तो उनका एक समझौता हुआ।
उन्होंने कहा, "तुम पूरे हफ़्ते पतलून पहन सकती हो,
"लेकिन जब चर्च में जाने का समय होगा, तो तुम्हें पोशाक पहननी होगी।"
मेरी ज़िंदगी एक तरह से सुरक्षा में बीती थी।
ज़िंदगी उस समय असहनीय हो गई
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