ആദ്യത്തെ 200 വരികൾ.
अस्वीकरण - यह सीरीज़ काल्पनिक है और यह विक्रम चंद्रा द्वारा
2006 में लिखे गए उपन्यास “सेक्रेड गेम्स” पर आधारित है। हमारा उद्देश्य इस सीरीज़ में
दिखाए गए चरित्रों के कार्य या उनके दर्शाए गए संबंधों की पुष्टि, प्रचार, प्रोत्साहन
और समर्थन करना नहीं है। इस सीरीज़ के किसी भी चरित्र के साथ किसी व्यक्ति, स्थान,
वास्तविक घटनाओं, भाषा आधारित समूहों, राजनैतिक दलों, समुदायों,
धर्म या पंथ के साथ किसी भी तरह की समानता मात्र एक संयोग और अनजाने में किया गया कार्य है।
छोड़, बहनचोद छोड़, छोड़, छोड़।
अपुन किधर था, मालूम नहीं।
इधर कौन लाया? मालूम नहीं।
काय को लाया। मालूम नहीं।
लाइफ़ हराम हो गयी थी सरदारजी...
जैसे अब आपकी होने वाली है।
मादरचोद।
जय हिन्द, सर।
बिबिन्का 623 एक्टिवेट हो गया है।
प्रधान मंत्री कार्यालय
...सबसे बड़ा करोड़पति। आखिरकार मोंट्रियल जा रहा है।
टैक्स में 40 करोड़ बचाने के लिए।
सर, बिबिन्का 623 एक्टिवेट हो चुका है।
बहनचोद!
40 दिन बाद जब अपुन वो अंधे कुएं से निकला...
तो दिमाग में बस एक ही कीड़ा नाचरेला था।
अपुन को बस गांड मारनी थी। जिसने भी अपने साथ ये किया...
ईसा, पारुलकर, सब की।
बाहर आया तो मालूम पड़ा कि ये खेल... इन सब चूतियों से,
आपसे... मुझसे... बड़ा है।
अपुन का टिप कभी गलत नहीं होता, सरदारजी।
अपुन बोला था... त्रिवेदी बचेगा।
कसम से केहता है, सच बोला था।
इसी पहेली को सुलझाओ...
सारे जवाब मिल जाएंगे।
NETFLIX ओरिजिनल सीरीज़
पहली कड़ी मत्स्य
सर, ये पैम्फलेट मिला है बंकर में...
ये किसी आतंकी गिरोह के रिक्रूटमेंट का पोस्टर लग रहा है।
आमतौर पर, जब भी कोई बड़ा अटैक करते हैं ये लोग, तो ऐसा पोस्टर बनाते हैं।
और इसपे लिखा है कि जंग का वक़्त आ गया है।
आयसिस इंडिया में घुसने की कोशिश तो कर ही रहा है...
-शायद कोई स्प्लिंटर ग्रुप हो। - नहीं।
स्टेट लेवल पे हम आइसिस पर बहुत कड़ी नज़र रखे हुये हैं।
वहां कोई चिंता की बात नहीं है।
हमारी एजेंट, अंजली माथुर...
वो हिज्बुद्दीन पर ध्यान रखे हुए थी, टिप ऑफ मिला था बलूचिस्तान से।
- मारियो, - सर।
इसके लिए एक एसआईटी बनाओ।
लश्कर, आइसिस और हिज़्बुद्दीन...
-अभी के लिए उनके पीछे जाते हैं। -जी सर।
सरताज, बढ़िया काम।
तुम एसआईटी में शामिल होना चाहोगे?
जी, सर।
सर, इंस्पेक्टर माजिद खान आंतकी सेल का स्पेशलिस्ट है।
ज़रूर।
माजिद, तुम सरताज को रिपोर्ट करोगे।
जी, सर।
बॉस बन गया है तू।
पार्टी दे दे।
इतना बड़ा कन्साइनमेंट भोंसले के एनजीओ से जुड़ा हुआ है।
अब बीच में ये हिज़्बुद्दीन कहाँ से आया?
भोंसले किसी और के लिए काम नहीं कर सकता?
तुझे लगता है?
बड़े केस में घुसता नहीं ना,
तुझे पता नहीं शाहिद खान क्या चीज़ है।
93 ब्लास्ट से लेकर, कंधार हाईजैकिंग तक,
सब में उसका हाथ है।
चेक तो करना पड़ेगा ना।
तू शाहिद खान को ढूंढ...
मैं गायतोंडे के तीसरे बाप को ढूंढता हूँ।
बस। बस, बस, बस।
बस, बस, बस, बस।
25 दिन में क्या होने वाला है?
मेरा बाप सबकी गांड मारने वाला है।
लेकिन मैं... त्रिवेदी को बचाएगा।
कौन सा बाप?
वो गाँव वाला पंडित?
नहीं, साहब। तीन बाप हैं मेरे।
साला बाप ही से तो सारा पंगा है।
पहले बाप ने अपुन को डर दिया, दूसरे ने डेयरिंग।
पर तीसरे ने, जिसको सब से ज्यादा प्यार किया, उसने धोखा।
समय पर विजय पाना मुमकिन है...
क्योंकि समय रेडियोएक्टिव है।
वो घटता है, और रहता है, हमेशा के लिए।
यह एक चक्र है...
और समय के इस चक्र को
चार युगों में बांटा गया है।
मेघा?
मेघा।
हाँ?
क्या हम दोबारा कोशिश कर सकते हैं?
क्या बात कर रहे हो?
मैं सीरियस हूँ।
तुम सीरियस हो?
ठीक है,
तो सीरियसली बात करते हैं।
अब क्यों?
क्योंकि...
मुझसे नहीं हो रहा अब।
एक-एक करके,
सब चले जा रहे हैं मेरी लाइफ़ से।
एकदम अकेला महसूस कर रहा हूँ।
और अब डर लग रहा है...
तुम भी चली जाओगी।
मैं जा चुकी हूँ, सरताज।
नहीं मेघा, प्लीज़... प्लीज़ ऐसा मत बोलो।
हम सिर्फ़ लड़ेंगे।
नहीं…
बहुत लेट हो गया है।
नहीं समझ में आता ना सरदार जी,
किधर जाएगा कहानी? अपुन को भी नहीं आता था।
अजीब लाइफ था उधर...
नाव के एक गार्ड को मार मार के टपका दिया,
लेकिन वो तब भी नहीं बोला कि अपुन दुनिया के किस कोने में है।
अभी मरने के बाद क्या बोलता।
दिमाग में बदला लेने की ऐसी गर्मी थी कि अपुन
ठंडे पानी में ही तैरने लगा, बम्बई की तरफ़।
अपुन रोज तैरता था, पिछले दिन से थोड़ा जास्ती...
रोज बम्बई के थोड़ा और नजदीक।
इधर बोट में कुछ करने को भी नहीं था।
रोज तैरो, सड़ेला मछ्ली खाओ, और गोपालमठ याद करके मूठ मारो।
यही अपुन का लाइफ़ था।
फिर एक दिन दूर देखा,
तो जवाब आरेला था।
1994
ये पकड़।
रुकिए, सर।
बैग आपका।
पहले मुझे बात करने दीजिएगा।
और कुछ?
मैडम आप जानती नहीं हैं,
बहुत अस्थिर आदमी है।
एक की जान चली गयी इनको नियंत्रण में रखने के लिए।
किधर है?
इधर ही था, सो रहा था।
हां?
-कमरे में कोई आया तो नहीं? -नहीं।
गणेश। गणेश!
मादरचोद, तेरी गांड में डालेगा मैं चाबी।
आ जा। ले ले चाबी।
डाल दे जिसकी गांड में डालना है।
ये क्या है गायतोंडे?
-हम बात करने आ रहे थे ना। -चुप कर भोसड़ी के।
मेरे को बम्बई वापिस जाने का है।
गोपालमठ।
तू मुंबई वापस नहीं जा सकता रे।
तू कौन है?
एक दोस्त।
तुम लोग को क्या मांगता है? बोलो ना।
मेरे को यहाँ बहनचोद बकरी के माफिक बंद कर के रखा है।
आफ्रीका में एक देश है केन्या...
उसका एक शहर है मोम्बासा...
इधर से नजदीक ही है।
मैंने सुना तू तैर के बम्बई जाना चाहता है।
ऐसे तैर के बम्बई जाएगा ना,
सिर्फ 188 साल लगेंगे तुझे।
कैलकुलेट किया है मैंने।
तू मराठी पढ़ सकता है ना... पढ़।
अपुन बम्बई के लिए खड़े लंड के माफिक तड़प रहा था,
और बम्बई...
बम्बई अपुन को भूल रेली थी।
त्रिवेदी के भाई लोग ने बाबरी मस्जिद गिराया।
आईएसआई के पंटर, शाहिद खान, के साथ मिलके ईसा ने शहर में बम लगाया।
पुलिस बोली अभी बहुत हुआ।
निकलो इधर से सब गैंग।
-उठाओ। -साहिब।
ए! भारत सरकार... इज्जत से हाँ...
चल आगे!
छोड़, मैं चल रही है, तू छोड़!
ईसा और अपुन के जाने के बाद, पूरा बैलेंस बिगड़ गया।
बम्बई के भाई लोग का सारा धंधा खल्लास।
और गोपालमठ... अक्खा बंजर।
भाग सकता है क्या मैं?
देश का बंटवारा 1947 में हुआ था।
बम्बई का... 1993 में।
किसी ने कब्जा किया, और किसी को दूर जाके अपना चाली बनाना पड़ा।
अपुन का बम्बई खतम हो रेला था।
नाम?
कुसुम देवी यादव।
क्या मांगता है?
इधर काम करो हमारे लिए, केन्या में।
मैं किसी की चाकरी नहीं करता।
अरे चाकरी नहीं है, पार्टनरशिप।
यहाँ धंधा शुरू करो।
धीरे-धीरे तेरे गैंग को भी निकलवा दूँगी जेल से।
ईसा से बदला लेना है ना तेरे को।
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