The first 200 lines.
मेनलैंड
क्लार्क।
क्लार्क। सुनो!
अच्छा।
सुनो!
ज़रा सुनो!
मार्गरेट...
सुनो!
- हैलो? - सुनो!
रुको!
वापस आओ! सुनो!
दरवाज़ा खोलो! खोलो...
मार्गरेट...
खोलो! सुनो!
हे भगवान, क्या...
कोई है?
कोई है?
कोई है?
कॉफ़ी पिओगे?
बहुत गंदी है।
पुरी, तुम कपड़ों वाला थैला दान के लिए बाहर ले जाओगी, प्लीज़?
इन्हें अंदर रख दोगी?
पश्मीने की तह लगाना मत भूलना।
मैं नहीं चाहती कि पिछले साल की तरह मेरे सारे स्वेटर खराब हो जाएँ।
और जब बाज़ार जाओ, तो मेरे लिए पके हुए ताज़े आम ले आना।
जब माँ कल आएँगी, तो खा सकेंगी।
जी, मैडम, सैम पाँच मिनट में आने वाला है।
इतनी जल्दी क्यों आ रहा है? उसे दोपहर में जाना है।
पर, आपकी माता जी आ रही हैं। वह अभी हवाई अड्डे से कार में बैठी हैं।
नहीं, पुरी। वह कल आ रही हैं।
नहीं, मैडम। वह कार में बैठ गई हैं।
एलए का समय हमसे पीछे होने की वजह से
अगर वह कल हमारे समय पर निकलीं, मतलब...
अरे, नहीं।
कोई है?
क्या... मुझे समझ नहीं...
कोई है?
- सुनो। - सुनो।
हैलो।
हमें यहाँ आने को कहा गया था।
हमें यहाँ आने को कहा था।
ऑफ़िसर चैंग ने।
पुलिस। हम हांगकांग से आए हैं।
नहीं।
नहीं।
- नहीं, माफ़ करना। - नहीं। रुको।
ऑफ़िसर चैंग ने कहा था कि हम...
आप मदद कर सकती हैं?
हम कहाँ जाएँ?
- प्लीज़। - प्लीज़।
शुक्रिया।
देखा? कई बार लगे रहो, तो काम हो जाता है।
हे भगवान।
मार्गरेट।
शुक्रिया।
बहुत-बहुत शुक्रिया।
क्या वह हमें...
क्लार्क, वह हमें अंदर बंद कर गई।
उसने दरवाज़ा बंद कर दिया। सुनो!
सुनो!
- सुनो! - मार्गरेट।
वापस आओ!
वापस आओ!
- सुनो! - मार्गरेट!
हमें बाहर निकालो!
वापस आओ!
हमें अंदर बंद करके मत जाओ!
सुनो!
मैं आम तौर पर काफ़ी अच्छी कैपुचिनो बनाता हूँ।
मेरी मशीन नहीं है, तो तुम्हें मेरी बात पर भरोसा करना होगा।
भारतीय घरों में कॉफ़ी ऐसी ही होती है।
हम होस्टल में यही बनाया करते थे।
धत्। मशीन की कमी खल रही है।
छोटी-छोटी बातें मायने रखती हैं। उसमें तापमान सही रहता है
और झाग एकदम सही बनता है।
मैं जाकर ला भी नहीं सकता।
आज तो वैसे भी नहीं।
अब तक तो मेरी सासू माँ आ चुकी होंगी।
उनके और मेरी बीवी के बीच में गर्मागर्म बहस चल रही होगी।
तुम कितने बूढ़े हो।
तुम्हारी सास है। और तुम्हारे कानों में बाल हैं।
तुम कब से मेरे कानों में दिलचस्पी लेने लगी?
ऐसे ही नज़र पड़ गई।
मेरी छुट्टी?
शायद।
धत्।
अच्छा।
सच में?
क्या कर रहे हो?
तुम्हें बाल पसंद नहीं, उन्हें हटाने वाला हूँ।
- वोडका से? - वोडका से।
देखो और सीखो।
तुम खुद को आग लगाने लगे हो।
न, तुम लगाओगी।
अभी भी नशे में हो?
तुम्हें लगता है इसीलिए यहाँ हूँ?
मुझपर भरोसा है?
जलाओ मुझे, जान।
मुझे कभी जान मत कहना।
जला दो।
टा-डा!
- जल गए। - हाँ?
हे भगवान। जल गए।
तुम्हें और कौन से "बूढ़े सज्जनों" वाली ट्रिक आती हैं?
इसलिए पूछ रही हूँ क्योंकि दिन में तुम ज़्यादा झुर्रीदार दिखते हो।
हाँ।
सोच सकती हूँ कि इन बूढ़ी आँखों की परतों में क्या छिपा है।
सिर्फ़ जाले।
जैसे तुम्हारे गंदे से छोटे फ़्लैट में हैं।
शायद मेरा भी एक अच्छा घर होता,
अगर मैं किसी अमीर गोरे परिवार में पैदा होती,
जिनका लंदन में घर और कॉट्सवोल्ड्स में कोठी होती
और माता-पिता दुनिया की
किसी भी यूनिवर्सिटी में पैसा देकर दाखिला दिला सकते,
ताकि मैं अपनी आत्मा को दाँव पर लगाकर एक और अमीर, कमीनी वकील बन सकती।
वैसे, मैं उसमें से कुछ पैसा अपनी निजी ट्रेनिंग पर खर्च करती।
बेचारी, उदास, नन्ही सी मर्सी। अकेली। कोई उससे मिलने नहीं आना चाहता।
उसकी अपनी माँ भी नहीं।
सूअर कहीं के।
तब तो तुम वह छोकरी होगी जिसे बेकन पसंद होगा।
जब तुम अपना मुँह नीचे ले जाते हो, तो मुझे कुछ नहीं होता। बस...
और फिर, जब तुम पर जुनून सवार होता है,
कई बार तुम आदमखोर बनकर मुझे वैक्यूम की तरह चूसते हो।
पर तुम मस्ती पूरी कर ही लेती हो, है न?
इतना काटते हो। दाँत क्यों मारते हो?
जब तुम मस्ती करती हो, तो लगता है बकरी मिमिया रही हो।
तुम्हारा पिछवाड़ा मेरे 85 साल के दादा जैसा है।
दो दौरे, एक दिल का दौरा पड़ चुका है।
तुम्हारी साँस मरे हुए जानवर जैसी है।
शराबी हो और बीवी को धोखा दे रहे हो।
हाँ? तुमने किसी का बच्चा खो दिया। परिवार को तबाह किया।
माफ़ करना। मुझे... नहीं कहना चाहिए था।
तुमने सच कहा। हम वही कर रहे हैं, है न?
न, वह ठीक नहीं था। कुछ ज़्यादा ही कह गया। मैं...
खेल तो है और तुम जीत गए।
- बिना चालाकी के। - अरे। मर्सी...
हे भगवान, यह हरप्रीत है?
आठ सालों से बैले सीख रही है और देखो तो इसे।
अभी भी पहलवान की तरह चलती है।
- हैलो, हरप्रीत। - हैलो, माँ।
अभी सोकर उठी हो?
नहीं, माँ। सैम, ये सूटकेस निकाल दोगे?
- जी, मैडम। - शुक्रिया।
तूने दाँत ब्रश किए थे?
हाँ, माँ।
मुझे बदबू आ रही है।
ऑर्गैनिक टूथपेस्ट लगाती हूँ। शायद वह ज़हरीली केमिकल वाली बदबू नहीं आ रही।
- मुझे अच्छी नहीं लगी। - अच्छा।
तेरे जूते कहाँ हैं?
मुझे मिलने चप्पल पहनकर आ गई?
पहले से ही फ़्लैट फुट है और ठीक जूते नहीं पहनती।
बंदरों की तरह चलना है तुझे?
आपसे मिलकर अच्छा लगा, माँ।
तेरी नानी चप्पलें पहनती थीं, मैं उनका मज़ाक उड़ाती थी,
पर वह सब जानती थीं।
ये इतने गंदे हैं, पर पहनने में आरामदायक हैं।
तेरे लिए एक जोड़ी लाई हूँ।
शुक्रिया, माँ।
इस बंदे की लाल लिपस्टिक कितनी सुंदर है।
माँ! इसे पता है कि तुम इसकी बात कर रही हो।
इसे लगता है कि मर्दों जैसे कपड़े पहनेगी तो लोग मर्द समझेंगे।
यह कोई मज़ाक है।
भगवान के लिए।
चलो भी।
अच्छा, मैं बताऊँ? मैं ज़रा...
पिज़्ज़ा खाना है।
तुम इस माहौल में खाने की कैसे सोच सकते हो?
सही समय पर वहाँ से निकल गए होते,
तो हम सब न्यूयॉर्क में मज़ेदार पिज़्ज़ा खा रहे होते।
हमने मिलकर तय किया था। तुम भी रुकना चाहती थीं।
नहीं, तुम्हारी बात मानी थी। मैं चाहती नहीं...
रहने दो, मार्गरेट।
इल्ज़ाम ही लगाना है, तो उस लड़की की बात करें, कहाँ से मिली।
मुझे कहाँ से मिली... तुम वहीं थे।
मुझसे पूछकर उसे काम पर नहीं रखा गया।
- मैंने नहीं रखा। - बच्चों को उसके हवाले छोड़ा।
- क्योंकि तुम आए नहीं। - काम पर था!
एसी को साथ ले आतीं।
तुम्हें बस बच्चों को संभालना था।
धत्।
माफ़ करना।
माफ़ कर दो। हमें यहाँ ऐसी बातें नहीं करनी चाहिए।
मुझे करनी हैं।
दिमाग में वही घूमता रहता है, याद है जब हम छुट्टियाँ मनाने गए थे?
जब गस बिस्तर से गिर गया था और मैं गहरी नींद से उठी
और गस को गिरने से पहले पकड़ लिया था।
और...
हम हँस रहे थे, याद है?
हम हँस रहे थे क्योंकि वह सबूत था कि मुझे नींद नहीं आती।
वह सब बस खत्म हो जाता है और...
तुम उन पर हर पल नज़र रखते हो, आँखें बंद हों तब भी।
पर उस रात मैं गस को नहीं बचा पाई।
उस रात मैंने उसे जाने दिया।
पता नहीं कैसे हो गया। कभी समझ नहीं पाऊँगी कि कैसे हो गया।
मेरा मतलब, वह कैसी माँ होगी
जो अपने बच्चे को खो दे?
तुमने उसे नहीं खोया।
नहीं।
वे उसे ले गए।
वे उसे ले गए क्योंकि मुझ जैसा दिखता था।
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