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Crew 2024 1080p WEBRip x264 AAC5 1-[YTS MX]
Crew 2024 720p WEBRip x264 AAC5 1-[YTS MX]
A Commentary by DrAbdellateef
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Published on: 2026-04-11
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The first 200 lines.

इस फ़िल्म के सभी पात्र, स्थान और घटनाएँ काल्पनिक हैं

और किसी से कोई भी समानता संयोगमात्र है।

इस फ़िल्म निर्माण के दौरान किसी भी जानवर और मनुष्य को क्षति नहीं पहुँचाई गई

या दुर्व्यवहार नहीं किया गया है।

सब इंस्पेक्स्टर माला, अंदर आइए।

-हाँ, बोलिए। -प्लेन को डाइवर्ट कर रहे हैं।

-कहाँ पर? -गेट नंबर 82।

गेट नंबर 82। चलो।

कंट्रोल टू केएल436।

टर्मिनल की ओर वापस मुड़ें। आप टेक ऑफ करने के लिए तैयार नहीं हैं।

गेट नंबर 82 पर आ रहे हैं।

देवियों और सज्जनों,

कैप्टन से मिली सूचना के अनुसार,

तकनीकी रुकावट के कारण

अब हमारा विमान वापस टर्मिनल जाएगा।

कृप्या अपने निर्धारित स्थान पर बैठे रहिए।

अधिक जानकारी मिलते ही हम आपको सूचित करेंगे।

इस असुविधा के लिए हम आपसे क्षमा चाहते हैं।

धन्यवाद।

कोहिनूर

गीता सेठी।

दिव्या राणा।

जैस्मिन।

चलिए हमारे साथ।

सर, लेकिन बताइए तो हुआ क्या है?

यहाँ सुनेगी क्या?

चलो।

मैं दिव्या राणा फ्रोम हरियाणा।

हेड गर्ल।

स्टेट चैम्पियन।

पीसीएम एवरेज 99.1।

काफी फेमस थी मैं।

नन्हेरी से हूँ, नन्हेरी।

नाम भी नहीं सुना होगा।

हाँ एक फुद्दू सा एयरपोर्ट बना रखा है

पर वहाँ कभी कोई प्लेन नहीं आया।

शायद मेरे पायलट बनने का सपना भी वहीं से शुरू हुआ।

मैम, हाथ ऊपर।

शक्ल से तो अच्छे घर की लग रही हैं। कब बिगड़ी?

बचपन में एक मशहूर बाबाजी ने भविष्यवाणी करी

कि ये लड़की आसमान छूएगी।

फ्रॉड साला!

बोर्ड्स खत्म होते ही,

हम अपनी छोटी सी ऑल्टो में मुंबई आ गए।

पापा ने लोन लिया,

और मैंने इंडिया के टॉप फ्लाइंग स्कूल में एडमिशन।

कमर्शियल पायलट

और सुन, माँ का मेडेन नाम

और लड़की के पहले कुत्ते का नाम पता करके आना।

-हाँ। -तू पागल हो गया है क्या, चिंटू!

तू फिर से पासवर्ड बेच रहा है?

भूल गया लास्ट टाइम क्या हुआ था?

आप कुछ समझने की कोशिश तो कीजिए।

मैम जीएसटी भरने के लास्ट डेट है।

आप प्लीज़ बिल भेज दीजिए ना।

आप प्लीज़, समझने की कोशिश कीजिए।

फिर मैं भी कुछ नहीं कर पाऊँगा। हाँ।

हाँ, आप भेज दीजिए, मैं सबकुछ देख लूँगा, ठीक है?

कारगिल थोड़ी ना जा रही है!

कहीं तो जा रही हूँ।

अरे जल्दी कर, नहीं तो तेरी फ्लाइट छूट जाएगी।

अरे कैसे छूट जाएगी, पायलट तो यहाँ बैठी है?

अब इन्हें कैसे बताऊँ कि इनकी दिव्या राणा भी फ्रॉड है?

ग्रेजुएट होते ही इकोनॉमी की लग गाई वाट।

जॉब तो मिली,

पर प्लेन के आगे नहीं, पीछे।

क्या करती फैमिली का दिल तोड़ने की हिम्मत ही नहीं हुई।

रेस्टरूम

ये झूठ ना साला चीज़ ही ऐसी है।

एक छुपाने के लिए सौ और बोलने पड़ते हैं।

एयरपोर्ट सिक्योरिटी

उतार।

अब क्या?

जूते।

20 साल से एयरलाइन में नौकरी कर रही है ना।

नौकरी, इज़्ज़त, सब एक मिनट में खल्लास।

जितना भी सीधा खेलो लाइफ गुगली डाल ही देती है।

मैं और मिस्टर सेठी काफी अमीर फैमिली से बिलॉन्ग करते थे।

फिर सेठी ब्रदर्स की हुई महाभारत,

और हमें महल छोड़के वनवास जाना पड़ा। खाली हाथ।

एयर होस्टेस की जॉब बड़ी आसानी से मिल गई।

वो… मैं मिस करनाल थी ना 98।

आय-हाय, मिसेज़ सेठी।

आज कुछ ज़्यादा ही हॉट नहीं लग रही हैं आप।

वो सुना दो ना एक बार?

-क्या? -वो ही जो दो द्वार आगे हैं,

दो पीछे हैं, बीच में ऑक्सीजन?

अरुण, नहीं यार।

यार कर दे ना, प्लीज़।

कैबिन में हवा का दबाव कम होने पर,

ऑक्सीजन मास्क जो हर सीट के ऊपर लगे हैं

अपने-आप नीचे आ जाएँगे।

पक्का?

अपनी सीट पर ही बैठे रहें,

मास्क को अपनी ओर खींचें,

और नाक-मुँह ढक कर सामान्य रूप से,

सांस लेते रहें।

फिर?

किसी भी तरह की सहायता के लिए,

हमारे क्रू से संपर्क करें।

जोमैटो एक्सेप्टिंग ऑडर्स

आ गया ऑर्डर।

गीतू, छोड़ यार।

बँक मार ले आज।

वैसे भी छह महीने से सैलरी तो दे नहीं रहे तुझे।

मुफ़्त में "संपर्क" करते रहो इनके साथ।

मन तो मेरा भी नहीं कर रहा।

पर इंटरनेशनल फ्लाइट्स का

डेली अलाउंस भी छोड़ दूँ?

बटर चिकन और नान पर चल ही रहा है ना।

मैं तो बस इंतज़ार कर रही हूँ

कि कब ये साले एयर लाइन वाले मेरा पीएफ थमाएँ,

और कब हम गोवा जाके अपना रेस्टोरेन्ट खोलें।

हैलो, जीजू!

गीतू, सूटकेस… पुन्नू आया है।

पुन्नू? सपना?

सरप्राइज़!

हैप्पी दिवाली, गीतू दीदी।

हैप्पी दिवाली…

नमस्ते।

दिवाली बोलके, होली तक का सामान लाया है साला।

देख थोबड़ा देखा है सपना का।

पक्का लड़ के आए हैं।

सब मेरी गलती है।

मम्मी के बाद ध्यान ही नहीं रख पाई उसका।

हाँ वो तो है।

तू ना ज़्यादा निरूपा रॉय ना बन।

तू माँ नहीं है उसकी।

"मम्मी के बाद मैं उसका ध्यान नहीं रख पाई।"

जैसे मम्मी होती…

तो साला प्रधानमंत्री बन जाता ये।

हम मिडल क्लास लोग ना

गेहूँ की तरह पिस जाते हैं खर्चे पूरे करते-करते।

ब्यूटीक्वीन से बाई कब बनी पता ही नहीं चला।

काफी महंगे शौक हैं तेरे।

हाथ ऊपर।

तू तो अंदर जाएगी ही।

जैसा कि मेरे नानाजी कहते थे,

"ये तो होना ही था"

ये साली!

गुलछर्रे उड़ा रही है, हाँ?

तुम हो कौन?

कहाँ है वो कुत्ता?

कहाँ है मेरा साला पति?

अरे मैंने तो तुम्हें धोखा नहीं दिया ना।

अंशुल! अंशुल!

मुझे सचमुच पता होना चाहिए था।

ये प्रेसिडेंशियल सुइट्स वाले शादीशुदा ही निकलते हैं।

अंशुल!

अंशुल!

जान, जैसा तुम सोच रही हो वैसा कुछ नहीं है।

- प्लीज़, प्लीज़, समझाता हूँ। - मैं इसे मार डालूँगी।

मुझे एक मौका दो, ओके?

मैं तुझे मार डालूँगी… साले…

-क्या कर रही हो तुम! लग जाएगी! - छोड़ो मुझे।

जान, ज़्यादा गुस्सा मत करो।

आई एम सॉरी। मुझसे गलती हो गई।

छोड़ो मुझे!

-मुझसे गलती हो गई। आई एम सॉरी। -मुझसे गलती हो गई?

मैं…

मेरे माँ-बाप एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे।

पर काफी नहीं था।

लोगों ने कहा "बच्चा कर लो, सब ठीक हो जाएगा।"

नहीं हुआ।

और फिर मैं।

आखिरकार, उनका तलाक हुआ,

और मैं पहुँच गई जबलपुर नानू के पास।

कोहली हाउस

नानू भी ना परेशान रहते थे

कि उनके बाद मेरा ध्यान कौन रखेगा।

बल्कि, सबको ये ही लगता था,

"हाय बेचारी।"

पता है कौन बेचारा नहीं होता?

अमीर लोग।

मेरे सपने जबलपुर और ग्रीनफील्ड स्कूल से बहुत बड़े थे।

बस वहाँ से निकलने के लिए पैसे चाहिए थे।

तो, मैंने स्टाफ रूम के लॉकर से मैथ्स पेपर उड़ाया और हज़ार-हज़ार रुपया में बेच दिया।

हेडमिस्टर्स को पता चला।

पहले तो बहुत धमकियाँ दी,

फिर साली 30 पर्सेंट में मान गई।

पैसा चीज़ ही ऐसी है।

मोगरा लेन

हज़ार सपने और अपने आइडिया लेके मैं मुंबई तो पहुँच गई,

फिर मिला रिएलिटी का झटका।

कभी बायर का लोचा,

तो कभी सप्लायर का।

और इस मुश्किल से गुज़र-बसर करने वाली हालत में

मुझे दो बातों का अहसास हुआ।

पहला, पैसा बनाने के लिए पहले होने चाहिए।

और दूसरा, आपके पास हमेशा प्लान बी होना चाहिए।

सुना है जिनके पास पैसा होता है वो खुश नहीं होते।

और जो खुश होते हैं उनके पास पैसा नहीं होता।

खुशी तो मेरी किस्मत में है नहीं,

तो अगर आँसू ही बहाने हैं,

तो बीमर में बहाऊँ किसी बस के बदले।

बैठने को कौन बोला?

सिर्फ स्टाफ के लिए

बैठो।

दफा 380ए।

दफा 380बी।

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