Three of Us

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Three Of Us 2022 WEB H264-RBB
A Commentary by sash35

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Published on: 2024-02-13
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The first 200 lines.

कार्य सूची दवा खानी है

कपड़े धोने हैं टिफिन पैक करना है

पानी की बोतल

गैस, नल, लाइट्स बंद करनी हैं

फ़ोन, पर्स और चाबी नहीं भूलना

आप लोगों की काउंसलिंग पूरी हो गई?

जी। तीन सेशन्स।

बस अब डिग्री करवा दीजिए आप, प्लीज़।

तीन सेशन्स और मिल सकते हैं, काउंसलिंग के हमें?

हाँ, अगर आप लोगों को उम्मीद है, तो हम ट्राइ कर सकते हैं।

क्यों?

मैम! चार साल की शादी में सिर्फ साल भर साथ रहे हैं हम।

वो छह महीने का कूलिंग पीरियड भी होता है इसके बाद।

ज़रूरी नहीं है।

और छह महीने में ऐसा क्या हो जाएगा, जो तीन साल नहीं कर पाए?

मैम, मैं आगे की पढ़ाई के लिए बाहर जाने वाली हूँ।

बेकार में इसका नाम आगे लगाना पड़ेगा पासपोर्ट में।

हाँ! लेकिन ये तो कोर्ट ही तय करेगा कि कितना समय लगेगा।

आपको लगता है, चार साल कम समय होता है?

शैलजा मैम!

शैलजा मैडम!

आइए।

सब लोग, आइए।

-बेंद्रे सर, आइए। - हाँ, सर।

आप यहीं रुक जातीं तो बहुत अच्छा रहता, मैडम।

बहुत मुश्किल है आपकी जगह पर किसी और की कल्पना करना।

थैंक यू।

मेरे लिए भी मुश्किल है। मिस करूँगी।

हमें मिस करें, तो मिलने आ सकती हैं।

और फैमिली कोर्ट के क्लेश को मिस करें, तो टीवी पर सास-बहू का सीरियल है ही।

प्लीज़, मैडम।

एक सेल्फी, मैम।

नमक देना थोड़ा।

सॉरी।

तुम रुको। मैं पार्क करके आ रहा हूँ।

केलुस्कर, तुम्हारे वो गिरगाँव वाले घर का क्या हुआ?

वो बिल्डिंग रिडेवेलपमेंट में जाने वाली थी ना?

वो तो लम्बा जाएगा अब।

क्यों?

हम सब लोगों ने एनओसी दी है।

पर एक मिस्टर अवचट है…

उनको उसी जगह में मरना है।

कहते हैं इमोशनल अटैचमेंट्स हैं।

इमोशन्स की फ्लोरिंग, इमोशन्स का सीलिंग।

कहीं इन यादों के बोझ में वो बिल्डिंग ही ना गिर जाए।

अंदर भी तो देना है।

इस डाइट के बारे में पहली बार सुना ना।

बहुत डर लगा था।

दिन में सिर्फ दो बार खाना अलाउड है।

और इनको तो हर आधे घंटे में कुछ ना कुछ चबाने के लिए चाहिए।

और एक सच पता है…

हम लोग ना रोज़ ज़हर पीते हैं। ज़हर!

चाय!

और ये कितने सालों से दिन में पाँच-छह कप चाय पीते हैं।

पर अब नहीं।

अब सुबह 11:00 बजे से पहले एक निवाला भी नहीं देती मैं उनको।

अरे? आप लोग ये चाय कहाँ से ले आए?

ये कॉकटेल लो!

बाकरवड़ी के साथ चाय ही चलती है।

नहीं कॉकटेल के साथ कुछ भी चलता है!

-ये लो। -ये हुई बात!

दीपांकर, रुको ना। कुछ सुनाना है।

गायत्री! तू गा रही है?

इतना सुंदर है! कब से सीख रही है?

अरे, बताया तो था। माहिम में गुरुजी हैं शनिवार और रविवार जाती हूँ।

सब भूल जाती हो तुम।

सॉरी, मेरा वो मतलब नहीं था।

कोई बात नहीं।

आप लोग इंजॉय करो। मैं एक और राउंड लेके आता हूँ।

थोड़ी देर के बाद।

मैं बर्फ लेकर आती हूँ।

शैलू…

तेरे साथ जो कुछ भी हो रहा है और तूने जिस तरीके से इसे हैंडल किया है।

मुझे बहुत प्राउड लगता है।

दीदी, ये मुझे हैंडल कर रहा है या मैं उसे हैंडल कर रही हूँ! पता नहीं।

आज तक जितना निस्वार्थ जिया है ना तूने।

अब उतनी ही स्वार्थी होके खुद का ध्यान रखना।

शैलजा?

अरे किधर थी तुम?

दो बार तेरे घर पर जाके आई।

अभी रागी पापड़ बनाना चालू किया है मैंने।

दो पैकेट भिजवा दूँ?

नहीं। चार भिजवाती हूँ।

नहीं।

दो ही पैकेट भिजवाती हूँ?

वो वर्मा है ना…

अरे देशपांडे मैडम, आप?

-कैसी हो आप? - और तुम?

मैं मज़े में हूँ।

अच्छा है।

सुनो।

तुम एक हफ्ते के लिए ऑफिस से छुट्टी ले सकते हो?

एक हफ्ता?

क्यों?

मुझे वेंगुर्ला जाना है।

वेंगुर्ला?

कोंकण में एक शहर है।

नहीं, कस्बा है।

कस्बा है या शहर है पता नहीं।

क्या हुआ?

क्या हुआ?

पाँचवी से आठवीं तक मैंने वहाँ पढ़ाई की थी।

वो तो तुमने पुणे और नागपुर में की थी ना।

हाँ। लेकिन तीन-चार साल के लिए बाबा की नौकरी थी वेंगुर्ला में।

ये एकदम अचानक?

मुझे भी समझ में नहीं आ रहा, लेकिन…

बहुत दिनों से मन है कि मैं जाके एक बार वेंगुर्ला देख आऊँ।

ठीक है। चलेंगे।

अभी जा सकते हैं?

आगे का तो पता नहीं ना?

हाँ, हाँ। लेकिन मिस्टर भरत, सप्लीमेंट में पास होने को पास होना नहीं कहते।

उसको सिर्फ प्रमोट होना कहते हैं, ठीक है?

अरे यार, डैड! अब आप मत शुरू हो जाओ प्लीज़।

अभी 15 मिनट के लेक्चर सुना है! आपकी बेटर हाफ से मैंने।

बेटा, अगर क्लास में लेक्चर सुन लेते ना,

तो इस लेक्चर को सुनने की नौबत नहीं आती। ठीक है?

कैसी हैं वो अब?

मेरी तो हिम्मत नहीं होती उनसे डायरेक्ट पूछने की।

ठीक है।

पर अचानक बीच-बीच में से एकदम गायब हो जाती है।

खैर, देखेंगे।

हम सब लोग इस वक्त में साथ हैं, यही बहुत बड़ी बात है।

अभी कुछ कह रही थी, कहीं जाने का।

देखते हैं।

अच्छा! लेकिन अकेले मत भेजिएगा, प्लीज़।

नहीं, मैं जाऊँगा साथ में।

-बाय, डैड। -बाय।

स्टेचू!

देखो, अंजली। तुम्हारा भाई कंजूस है।

देखो, राकेश, तुम्हारा पूरा खानदान कंजूस है।

देखो, अंजली, कंचन को होम-वर्क करवाना तुम्हारा काम है।

देखो, राकेश, चंचल को स्विमिंग क्लास ले जाना तुम्हारा काम है।

-मैं नहीं करूँगा। -मैं भी नहीं कराऊँगी।

आज से मैं तुमसे कभी बात नहीं करूँगा!

तुम्हारा नाम क्या है?

मेरा नाम चंचल, उसका नाम है कंचन।

मैं मम्मी पर गई हूँ, वो पापा पर गई है।

हमें स्कूल में सब कन-चल, कन-चल बुलाते हैं।

कन-चल कितना सुंदर नाम है।

-थैंक यू। -वेलकम।

थैंक यू।

वो चंचल है और वो कंचन।

गर्म पानी सुबह 6:00 से 8:00 बजे तक मिलेगा।

आपको और कुछ चाहिए, तो बोल दीजिएगा।

-मैं बोलता है। -अच्छा, मैं चलता हूँ।

इसमें बहुत सारे काँटे होते हैं?

नहीं! सुरमई है।

एक ही काँटा होता है। निकाल दूँ?

सुरमई…

एक मिनट। एक मिनट।

कैसा है?

-खाके देखो, पता चलेगा। -नहीं! गाना कैसा है, वो पूछ रहा हूँ।

मछली तो अच्छी है।

बहुत अच्छी है।

-दादा, इधर कोई स्कूल है क्या? -राइट साइड में।

अच्छा।

सुनिए।

आप यहाँ कब से काम कर रहे हैं?

सुबह आ गया था 8:00 बजे।

नहीं! मतलब कितने सालों से?

छह-सात साल से, क्यों?

मैं यहाँ पढ़ती थी, बचपन में।

तो, मुझे लगा कि…

-स्कूल कब चालू होगा? -सोमवार को।

-और ऑफिस चालू है? -नहीं। आज छुट्टी है ना।

आप किसी प्रदीप कामत को जानते हैं?

शैलजा?

शैलू!

कैसी है तू?

-शैलू! -गौरी?

हाँ।

ये गौरी है।

अरे मैं… मैं कबसे देख रही थी। मैंने कहा है कि नहीं! है कि नहीं!

मैंने कहा छोड़ो! चिल्ला देती हूँ।

नहीं हुई तो क्या हुआ? हम तो हैं ही बचपन से बेशर्म!

-नमस्कार, भाईसाहब। -नमस्कार। मैं दीपांकर।

नमस्कार।

कैसी है तू? यहाँ क्या कर रही है?

-वो परशुराम का घर इसी गली में था ना? -हाँ बिल्कुल सही! यही है उसका घर।

और अब मेरा भी यही है।

हाँ।

चल, आ। आइए ना, भाईसाहब।

शैलू!

लीजिए।

ये तुम्हारे स्कूल की फोटो है?

हाँ।

-ये फोटो तो मेरे पास नहीं है। -अच्छा?

एक भी लड़की का चेहरा ठीक से दिखाई नहीं दे रहा है।

देख ना, आगे की दोनों लाइनें मिट गई हैं।

ये परशुराम है ना?

-कहाँ? -ये! दूसरा।

हाँ।

वाह, याद है तुझे तो।

और बाजू में?

प्रदीप।

-प्रदीप कामत? -हाँ।

वो अभी हम लोग स्कूल गए थे ना। तो उधर प्रदीप कामत की बात निकली।

अच्छा!

तो, आप और परशुराम स्कूल में मिले?

हाँ।

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