Shehar Lakhot

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Season 1

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Shehar Lakhot S01 WEB H264-RBB
A Commentary by sash35

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1080
Published on: 2023-11-30
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The first 197 lines.

ए!

छक्का गया!

- सीधे छक्का! - ए, छक्का!

ए, गेलिया! जा, जाकर बॉल ले ना।

हमेशा मैं ही क्यों जाऊँ?

क्योंकि तू गेलिया है! गेलिया।

गेलिया! गेलिया! गेलिया!

गेलिया! गेलिया! गेलिया!

गेलिया! गेलिया! गेलिया!

गेलिया! गेलिया! गेलिया!

गेलिया! गेलिया! गेलिया!

शहर लखोट

गलती हो गई। दोबारा नहीं होगी।

अरे तेरी माँ ने भी तेरे पैदा होने पर ये ही कहा था।

- ए! - कर तो दी मैंने रोड़ क्वालिटी अप्रूव।

सेकेंड टाइम में।

नहीं... नहीं!

फूँक के आए हो, देव बाबा?

पेड़ा।

मथुरा का है।

थैंक यू, बॉस।

चर्बी घटा।

साले सांड!

एक पार्टी है।

सेंटर मार्बल्स।

अनिल महाजन।

कोई प्रोटेस्ट क्लियर करवाना है।

आगे बोल।

अरे सेंटर मार्बल की खदान का रास्ता ब्लॉक करके बैठे हैं कुछ आदिवासी।

धंधे के लोड़े लग गए हैं।

पार्टी चाहती है तुरंत उन्हें वहाँ से हटाया जाए।

पर गुड़गांव में आदिवासी?

गुड़गांव में मार्बल के खदान हैं क्या?

चूतिये।

हाँ तो फिर?

लखोट।

चूतिये।

तेरे मायके।

बॉस...

आपको तो पता है ना मेरा थोड़ा...

कोंपलिकेटेड है उसके साथ।

उसके साथ?

किसके साथ?

लखोट के साथ।

ज़िंदगी झांट है।

उस पर भी खाने वाले सात-आठ हैं।

लगता है तू भी आज हाथ तुड़वाने के मूड में आया है।

तेरे पास लोकल जानकारी है।

आज रात ही निकल जा अपनी गाड़ी लेके।

आपकी फॉर्च्यूनर।

फॉर्च्यूनर?

बॉस की पुरानी वाली?

रे बावली गांड है क्या तू?

दस साल के बाद जा रहा हूँ मैं।

मुझे लगा था कुछ बन जाऊँगा। तो, थोड़ा टशन में जाऊँगा ना।

उसको कुछ हुआ ना,

तो तेरे को बहुत कुछ हो जाएगा।

पिंकी का बर्थडे गिफ्ट है।

हैप्पी बर्थडे पिंकी।

शायद मुझे लखोट कभी वापस नहीं जाना चाहिए था।

दस साल एक लंबा अरसा होता है।

पर इतना लंबा नहीं कि लखोट की यादें मिटा सके।

सच कहूँ तो, लखोट में मैंने बहुत दिल तोड़े थे।

उसमें एक मेरा भी था।

कभी-कभी सोचता हूँ क्या टूटे हुए लोग कभी जुड़ सकते हैं।

क्या पता?

पर चलो...

एक बार फिर से लखोट जाते हैं।

फिर सोचते हैं...

कि शायद मुझे लखोट...

कभी वापस नहीं जाना चाहिए था।

ये सुनील महाजन कहाँ मिलेंगे?

सर आए नहीं अभी।

और क्या...

नयी ताज़ी?

ये?

एक फिरंगन मरी पड़ी मिली।

वहीं रेत में ही गाड़ दिया था उसको।

ये अक्ल के पैदल इस बंजर में क्यों अपनी मराने आते हैं?

बात तो सही है।

साहब आ गए।

अरे सुनील जी, सुनिए तो।

अरे अनिल भैया से बात हुई थी आरपी की, मेरे बॉस हैं वो न्यू डील असोसिएट से।

अरे पूरी रात गुड़गांव से गाड़ी चलाके आया हूँ। दो मिनट तो सुन लीजिए।

सुनील जी!

फ़ोन क्यों नहीं उठा रहे हैं यार?

अरे सुनील जी, मेरी बात हुई है आपके बड़े भैया से।

अनिल जी से--

नहीं, नहीं, यार! ये हंड्रेड पर्सेंट गलती है।

मुझे लगा, अनिल भैया सिचुएशन समझ गए होंगे।

गलती?

आप निकल लो।

आई एम सॉरी, कहाँ?

वापस गुड़गाँव। और कहाँ।

चिंता मत करो। मैं भैया से बात कर लूँगा।

वो यहाँ की पॉलिटिक्स नहीं समझते।

दखल नहीं देनी चाहिए।

और वैसे भी, आदिवासी हैं यार। कब तक बैठे रहेंगे वहाँ?

आख़िरकार, उनको भी अपनी ऊँट, बकरी और दैनिक मज़दूरी की याद तो आएगी ना।

तो मामला अपने आप ही फुस हो जाएगा।

पर आप ये समझा सकते हैं कि ये सिचुएशन क्या है?

इनकी इतनी क्यों सुलगी हुई है?

कुछ नहीं हुआ है। अभी निकलोगे तो रात होने तक घर पहुँच जाओगे।

- अरे निकलना नहीं मैं आप-- - चलो।

- सुनिए तो-- - ध्यान से गाड़ी चलाना।

अरे यार!

हाँ, बॉस।

और ये सुनील महाजन का तो कुछ और ही अजंडा हैं।

वो तो हम ही को हकाल रहा है, कह रहा है कि ट्रैवल्स खुद ही चले जाएँगे।

अबे गांडू! पार्टी वो नहीं है,

हमें यहाँ गुड़गाँव में उसके बड़े भाई अनिल महाजन को जवाब देना होगा।

हाँ सही है।

खदान में जाके पता कर, देख उनका लीडर कौन है।

पर, बॉस...

और बार-बार गर्लफ्रेंड टाइप मेरे को कॉल मत किया कर।

उसके लिए मेरे पास पिंकी है।

हाँ, सही है।

पिंकी।

माँ चोदे।

आजा बहनचोद...

साला!

झांट का पिस्सू!

मेला क्यों लगा रखा है?

मेला नहीं! झमेला।

पर धंधे के लिए अच्छा है।

चार-पाँच दिन से चल रहा है।

ये लोग चाहते हैं कि गवर्मेंट हथियारों को पकड़े।

लाश भी तो खदान के पीछे ही मिली थी ना।

- उस गोरी की? - ना।

- हिरनी की। - हिरनी?

हाँ। अरे...

कुछ शिकारियों ने एक बेचारी हिरनी को गोली से मार दिया।

गाँव वाले आवाज़ सुनकर पहुँचे...

तब तक तो शिकारी भाग लिए थे।

इनका लीडर कौन है?

वो...

चेक शर्ट वाला।

विकास कछदार।

दिल्ली में पढ़ा-लिखा है।

सुना है डॉक्टर है।

हाँ।

सही है।

विकास जी।

देवेन्द्र सिंह तोमर।

आप मुझे देव बुला सकते हैं।

सेंटर मार्बल्स गुड़गाँव हेड ऑफिस से।

देव।

बताइए आपके लिए क्या कर सकता हूँ?

हम एक-दूसरे के लिए क्या कर सकते हैं।

वो ही तो बात करनी थी।

इंटरेस्टिंग।

- बताइए। - अभी यहाँ?

आराम से शाम को कहीं खुलके बात करते हैं?

हाँ?

सॉरी, जाना होगा।

जाना...

तो हम कब मिलेंगे फिर?

कल शाम आ जाना यहीं पर।

सही है।

हुकुम।

कल रात एक और के साथ भिड़ गया।

पांव की हड्डियाँ टूट गई हैं।

दुख रहा है?

दर्द हो रहा है?

खाएगा?

माल-ए-मुफ़्त, दिल-ए-बेरहम।

सबको मुफ़्त की रोटियाँ तोड़नी हैं।

दया, हुकुम।

छोटी सी गलती हो गई जी।

छोटी सी गलती?

गुनाह अज़ीम था ये, राजबीर।

अखंड चूतियापा।

ये साला एक सिंपल जॉब थी।

सही कह रहे हो जी, मैं मानता हूँ।

अब...कोई बहस नहीं।

माँ की कसम।

सब कुछ नियंत्रण में है।

कैरव जी, क्या मैं... जा सकता हूँ?

अगर सब कुछ नियंत्रण में है, तो क्या मैं...

भाड़ में जाओ तुम।

भाड़ में जाओ।

तुम्हारे थाने में जो तुम्हारी रेगुलर हड्डियाँ हैं, भिजवा दी जाएँगी। ओके?

और सुन!

तेरे पार्थिव शरीर के साथ ना वो मरा हुआ कुत्ता भी लेते जा।

समझा?

अरे ओह, एसएचओ!

क्या घसीट रहा है? अपनी किस्मत?

ये कछदार का छोरा इन दोनों के साथ क्या कर रहा है? बहनचोद।

डॉक्टर विकास।

वेलकम।

बहुत खुशी हो रही है कि हमारे लोगों का विकास हो रहा है।

हम लोगों का?

बिल्कुल। बिल्कुल।

बैठिए ना। प्लीज़, बैठिए।

आपको पता है...

मेरी माँ, वो एक भेनों थीं।

आप और मैं शायद एक जाति के नहीं हैं, पर...

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