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मूलभूत NETFLIX डॉक्यूमेंट्री
पैड प्रोजेक्ट एक्शन इंडिया
तू बताएगी?
गर्ल्स इंटर्नेशनल एंड द फॉेमिनिस्ट मैजोरिटी फ़ाउंडेशन ओकवुड स्कूल
तुझे डर लग रहा है?
पहले इससे पूछो।
नहीं, पहले तू बता दे।
पीरियड?
हाँ।
बता! बता!
हापुड़ जिला, भारत
नई दिल्ली से 60 किलोमीटर दूर
पर कहीं न जाती, शरम लगे है|
- तुम्हें शर्म आती है! -शरम लगे है।
अच्छा आप इतने सीरियस क्यों हो गए?
-क्या पूछ रही हैं ये? -किस वजह से होते हैं ये शरीर के अंदर? क्या होता है?
होने की क्या वजह है? ऐसा पूछ रही हैं।
खून क्यों निकलता है? कोइ कारण?
भई ये तो भगवान नो पता होI
ये गंदा खून निकले हैI
बच्चे इसी से पैदा होते हैं।
मुझे बस इतना पता है।
यहाँ पे किसको पता है कि पीरियड्स क्या होते हैं?
नाम सुना है कभी?
-ये तो जी...- -घंटे वाले पीरियड जो मतलब कॉलेज में छूटते हैं?
नहीं।
लड़कियों...
मैं आपसे पूछ रही हूँ।
आप जवाब क्यों नहीं दे रही हैं?
महावारी सुना है?
हाँ, जी, सुना तो है। यह शायद बीमारी है, महावारी?
बीमारी है?
हाँ, सुना तो है, यह बीमारी ज़्यादातर महिलाओं को होती है।
लड़कियों, कम से कम हाथ तो उठा सकती हैं आप लोग।
यह लड़कियों की एक समस्या है।
सही है, सही है, आशा।
बोलो।
माध्मिक स्कूल पहुँचने तक मैंने पढ़ाई की,
पर जब मेरे पीरियड शुरू हुए तो जाना मुश्किल हो गया।
परेशानी यह थी कि जब मुझे पीरियड होते थे तो मुझे कपड़ा बदलने में बहुत दिक्कत आती थी।
बदलने के लिए बहुत ज़्यादा दूर जाना पड़ता था, बहुत परेशानी होती थी।
जो कपड़ा इस्तेमाल करती थी वह बहुत ज़्यादा गीला हो जाता था
इसलिए बार-बार बदलना पड़ता था
और हर बार मुझे बहुत दूर जाना पड़ता था, मुझे बहुत दिक्कत आती था।
फिर इधर-उधर आदमी भी रहते थे।
वे मुझे देखते रहते थे, तो उनके सामने मैं कपड़ा नहीं बदल पाती थी।
पीरियड शुरू होने के एक साल बाद तक मैंने देखा
कि शायद कुछ बदलेगा। जब कुछ नहीं बदला, परेशानी बढ़ने लगी...
तो हमने स्कूल छोड़ दिया।
महावारी में हम मंदिर में नहीं आते हैं।
किसी भी भगवान की पूजा नहीं करते हैं।
घर के बुज़ुर्ग यह मानते हैं कि ऐसी पूजा किसी मतलब की नहीं होती,
आप चाहे कितनी भी पूजा कर लो।
मैं अकेली हूँ और इतना बड़ा गाँव है।
मैं अकेली कैसे संभाल सकती हूँ?
उन्हें लगता है, "यह तो पागल है! पता नहीं क्या चलता रहता है इसके दिमाग में?"
ज़्यादातर मैंने यही देखा है कि इतनी छूट नहीं है लड़कियों को,
ख़ासकर शादी के बाद, ससुराल से।
हम नौकरी करने के लिए या आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रोत्साहन नहीं मिलता।
वह हमारे लिए नहीं है।
मैं पुलिस फ़ोर्स में जाना चाहती हूँ।
पुलिस फ़ोर्स में क्यों जाना चाहती हैं?
अपने आप को शादी से बचाने के लिए!
क्योंकि, जिन मातारानी की हम पूजा करते हैं...
...वह भी तो हमारी तरह ही एक औरत हैं।
तो, इसलिए मैं इस नियम को नहीं मानती हूँ
कि महावारी के समय औरत को मंदिर में नहीं जाना चाहिए
क्योंकि उन्हें गंदा माना जाता है।
मुझे नहीं लगता यह सही है।
अपने घर को जाओ।
मैं घर में ही ढूँढ लेती हूँ।
जैसे कोई सूती सूट जो मैं पहनती हूँ।
जब पुराने हो जाते हैं तो इस्तेमाल कर लेती हूँ।
रेखा
शाम को जब रास्ते पर कोई आते जाते नहीं दिखता,
जल्दी मौका देखकर फेंक जाती हूँ।
वो रूबी और जैकी कभी-कभी निकाल कर ले जाते हैं।
रास्ते पर।
बहुत शर्म आती है।
रूबी जैकी
लड़कियों को दिखाई दिया कि खून आ रहा है तो जो कपड़ा मिला उसे ही इस्तमाल कर लेती हैं।
सोचिए वह कितना ज़्यादा नुक़सान पहँचाने वाला और ख़तरनाक है।
वहाँ गीलापन आने लगता है।
शबाना
पहले हमारी जो मीटिंग होती थी, हम उन्हें बताते थे कि
"कपड़ा धुला हुआ होना चाहिए। साफ़ होना चाहिए।"
"कपड़े जो लें, तो कपड़ा गंदा नहीं होना चाहिए।"
अब, हम पैड की बात कर रहे हैं।
बहुत कुछ अभी
बदलने के लिए बाकी है।
बहुत कुछ बदलना है।
बेटी ने कभी माँ से बात नहीं की, पत्नी ने कभी पति से बात नहीं की,
सहेलियाँ आपस में बात नहीं करती हैं।
मेरे देश में महावारी सबसे बड़ी वर्जित बात है।
मैं अरुणाचलम मुरुगनंथम हूँ,
वह इंसान जिसने कम मूल्य वाली सैनेटरी नैपकिन मशीन इजाद की।
हमारा मिशन है भारत को 100 फीसदी नैपकिन इस्तेमाल करने वाला देश बनाना
जहाँ अभी दस फीसदी से भी कम इस्तेमाल होता है।
पास ही में काठीगेड़ा नाम का एक गाँव है।
आपने पहले से ही सुन रखा होगा। पास में ही है।
वहाँ पर एक मशीन लगाई जा रही है। जिसे पैड मशीन कहा जाता है।
वह पैड बनाने के काम आती है। आपको पता है "पैड" क्या होता है, है न?
हाँ? नहीं?
नहीं!
मैंने तो नाम भी नहीं सुना है।
हम उसे टीवी पर और कहानियों में देखते हैं, पर हमारे पास खरीदने के पैसे नहीं हैं।
हमारे परिवार में कोई इस्तेमाल नहीं करता है।
मैंने सुना है कि अगर हम पैड लगा लें तो चाहे जहाँ घूम सकते हैं, दिक्कत नहीं होती।
कपड़ा गंदा नहीं होता, कोई आपका मज़ाक नहीं उड़ाएगा।
अगर हम आपको पैड देंगे, तो आप इस्तेमाल करेंगी?
-मुझे तो पता ही नहीं कि कैसे करते हैं। -अरे, वह गीला नहीं होता।
दिखाओ मुझे।
यहाँ से निकालना है?
इसे कैसे इस्तेमाल करते हैं?
हैलो! अपने मोबाइल फो़न बंद कर दो।
कल से, आपको यह करना पड़ेगा।
पहले समझो।
सुमन, यह किस कदम पर क्या इस्तेमाल कर रहे हैं, यह देख लो।
इन सारी चीज़ों का ध्यान रखना।
हमारे पैड तैयार करने के लिए यह कच्चा माल है।
अपने हाथों से, दोनों को एक साथ बंद करना है।
अभी तक सब साफ़ समझ आया या मैं जादू कर रहा हूँ?
ठीक है? यह बस हो गया।
इसे तीन बार करने के बाद, ट्रे को बाहर निकाल लो।
फिर धीरे-धीरे ले जाओ और छोड़ दो।
ठीक है?
इसे इसके चारों तरफ़ लपेटो और 10-20 बार इसे घुमा दो।
इसे सीधा रखो, पेडल दबाओ और एक और बार कट जाएगा।
आप यह कर सकती हैं, है न? अब आपका पैड तैयार है!
रेखा, अपने चाचा से इस बारे में पूछो। उन्हें पता है यह क्या है?
मतलब?
यह मशीन क्या है और यह क्या करती है।
इन्हें मालूम है।
पूछो आप इनसे।
अंकल, आपको पता है यह क्या है?
नहीं, मुझे नहीं पता यहाँ क्या चल रहा है।
क्या लगता है आपको यहाँ पर क्या हो रहा है?
बस इतना कि यहाँ एक मशीन है जो वे "हगीज़" डायपर बनाती है।
बच्चों के डायपर। इन्हें बस इतना ही पता है। -बच्चों के।
हाँ, मुझे बस इतना ही पता है।
इनको बताया नहीं इन्हीं के घर में मशीन लग रही है।
ठीक है।
घर के आदमियों को तो पहले ही पता था कि यह क्या है।
बस वही है कि आपके सामने वे बोल नहीं पा रहे हैं।
मेरे चाचा को नहीं पता। हमने उनसे कहा यह एक "हगीज़" मशीन है।
आपने इनसे कहा "हगीज़" बन रहे हैं।
वह बच्चों के लिए... वह बनाती है...
मुझे पता है वह क्या है, पर मैं नाम भूल रहा हूँ।
बच्चों के पैड।
हाँ, पैड!
मैं उन्हें बताना चाहती हूँ कि मैं काम कर रही हूँ
पर फिर वे पूछेंगे कि किस तरह का काम है...
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