The first 200 lines.
मोशन पिक्चर रन लोला रन पर आधारित
फ्रांसिस अंकल अच्छे निर्णय अनुभव से आते हैं।
अनुभव बुरे निर्णय लेने से आता है।
गुड ऑफ्टरनून…
हैप्पी बर्थडे टू मी।
बार-बार दिन ये आए,
बार-बार दिल ये गाए।
क्यों?
हर दिन जैसा ही तो है ये दिन।
एकदम बकवास!
पर अभी तो बकवास दिन की शुरुआत थी।
मेरी ये हालत कैसे हुई?
नहीं, टेस्ट की बात नहीं कर रही!
उस तक पहुँचने का रास्ता सबको पता है।
ऐसे ही थोड़ी ना हमारी जनसंख्या 130 करोड़ है।
चुप करो!
मुझे तो ये यक़ीन नहीं हो रहा था कि मैं इस 130 करोड़ में एक नई जान जोड़ने वाली थी।
जबकि कुछ टाइम पहले मैं एक जान लेने वाली थी।
10,51,200 मिनट पहले
अपनी ख़ुद की।
- - रात आठ बजे, सोमवार को।
एक लड़की जीवन से हार मान के हॉस्पिटल बिल्डिंग की छत से कूद गई।
ऐसा ही कुछ फालतू कल पेपर में छपेगा।
लोग कहेंगे डरपोक थी।
एफ़आर. फ़्रेडी हॉस्पिटल
वह तो दसवें माले से नीचे देखकर ही पता लगता है।
इतना आसान नहीं है।
तुम्हारे जी में डी होना चाहिए।
पर पता है आसान क्या है?
उम्मीद।
क्योंकि सपनों का क्या है,
बेड पर लेटे-लेटे भी देख सकते हो।
पर मैं सपने के पीछे भागती रही।
और उस तक पहुँचने का शायद आख़िरी मौका था मेरा।
एफ़आर. फ़्रेडी हॉस्पिटल
इस रेस में हारने से बुरा क्या हो सकता था?
कभी न भाग पाना।
मार्क पर…
तैयार…
- धत्। - भागो!
एफ़आर. फ़्रेडी हॉस्पिटल
क्या बकवास है?
क्यों बचाया?
सॉरी, ग़लती हो गई।
जा, कर ले जो कर रही थी।
कपड़े सुखाने नहीं आई थी मैं छत पर।
मरने जा रही थी।
हॉस्पिटल की छत से कौन कूदता है, यार?
एंबुलेंस को भी कॉल न करना पड़े!
गिरते हुए डॉक्टर को हाय-हेलो बोल दो, हाँ!
आत्महत्या मज़ाक लगती है।
टाइम लगता है तैयारी करने में।
दो दिन लगे मुझे यहाँ तक पहुँचने में।
छोड़ ना, चोमू।
ठीक है।
और ये चोमू-चोमू क्यों बोल रही है?
मैं तो सिर्फ़ सलाह दे रहा था, लेनी है तो ले, नहीं लेनी है तो ना सही।
आत्महत्या का बहुत तर्जुबा है क्या?
तर्जुबा होता तो मैं यहाँ होता क्या, हाँ?
वैसे, मैंने अपना प्लान बना लिया है।
मोंगूज़ धूम्रपान जानलेवा है
थोड़ा ज़्यादा समय लगेगा, पर चलेगा।
लो।
मैं सिगरेट नहीं पीती। मैं एथलीट हूँ।
थी।
बढ़िया।
पता है मुझे क्या लगता है?
मुझे लगता है कि तू सच में मरना नहीं चाहती थी।
तू सिर्फ़ जो ज़िंदगी जी रही थी ना, उसे ख़त्म करना चाहती थी।
सही है ना?
चल शर्त लगा?
कि मेरी ज़िंदगी की तुझसे ज़्यादा लगी पड़ी है।
पर मैं बात-बात पर लॉन्ग जंप का प्लान नहीं बनाता।
क्या पता कल कुछ अच्छा हो जाए।
अभी सोच, कल सुबह-सुबह तेरी लॉटरी लगने वाली हो
और तू आज ही मर जाए।
थोड़ा दुख भरा हो जाएगा ना?
सत्या।
उल्टी है।
सावी।
हेलो, सावी।
एक और है क्या?
हाँ, है ना।
वो… तीली ख़त्म हो गई है।
नीचे मिलेगी। चलें?
लिफ्ट से।
ये है सत्या, और ये है इसकी मुस्कुराहटों में से एक।
ब्लू फ़िल्म का हीरो जब सेक्स सीन के बीच में
एक्टिंग करने की कोशिश करता है ना, ये वह वाली मुस्कराहट है।
- -इसकी आम मुस्कान।
पर उसकी कोई और मुस्कान थी जो इसे हॉस्पिटल तक ले आई।
ये वाली।
जब टीवी सीरियल की बहू लैपटॉप को धोकर रस्सी पर टाँगती है ना
और साइड में खड़ी वैंप हंसती है…
ये वो वाली मुस्कान है।
सत्या की जुए वाली मुस्कान।
लोग कहते हैं, मुस्कुराओ और तुम्हारी मुसीबतें गायब हो जाएंगी।
सत्या के लिए ये बिलकुल उल्टा था।
दुनिया से मार खाने की हमें आदत हो गई थी।
इसलिए हमने एक-दूसरे को ही अपना पेनकिलर बना लिया।
मैं पूरी ज़िंदगी टाइमर के पीछे भागती रही।
सत्या ने आकर समय का कॉन्सेप्ट ही ख़त्म कर दिया था।
उसके लिए, पहली ही लड़ाई में उसे प्यार हो गया था।
और मैं…
मैं बहुत भाग चुकी थी।
अब बस पाँव टिकाना चाहती थी।
सावी
सत्या
तुझे पता है?
स्टॉकहोम से हेलसिंकी भी एक फेरी जाती है।
अपने तांडवी की तरह!
बोल, चलेगी?
तेरी लॉटरी लगी है क्या?
कभी तो लगेगी ना।
हमारी कभी नहीं लगेगी।
शर्त लगा ले?
अपनी एक न एक दिन ज़रूर लगेगी।
पहले नौकरी लग जाए।
जॉब अलर्ट! एक नई नौकरी हमारे पिताजी के लिए केयरटेकर
उनको ज़्यादा दिखाई नहीं देता है।
और ज़्यादा सुनाई भी नहीं देता है।
पापा थोड़े चुपचाप रहने वाले हैं।
अठासी साल के थे अंकल।
अंकल का कैमरा, माइक्रोफ़ोन, स्पीकर, सब जवाब दे चुका था।
शायद इसलिए यमराज के बुलावे को नज़रअंदाज़ कर रहे थे।
और मुझे…
दुआ की नहीं, दवा की ज़रूरत थी।
और मेरे पास बहुत सारी दवाएं थीं।
रनर से सिटर तक,
मेरी ज़िंदगी का तो "क्या से क्या हो गया" गाने वाला वाइब हो गया था।
पर शायद मुझे यही चाहिए था।
एकदम शांत ज़िंदगी।
मगर मेरा कमीना बॉयफ्रेंड
अभी भी दो मिनट वाले नूडल्स की एक मिनट वाली रेसिपी ढूंढ़ रहा था।
सावी, आराम से, यार।
इससे इतनी फटती है तो पिटने वाले काम मत किया कर ना।
कसीनो जाना बंद कर।
सावी, ज़िंदगी बदल जाती है। बस एक दिन लगता है।
ज़िंदगी का तो पता नहीं, तेरी शक्ल ज़रूर बदल गई है।
मुझसे वादा कर, आगे से कसीनो नहीं जाएगा कभी।
-बोल। -सावी, टेक्निकली वो कसीनो नहीं है।
अच्छा, वादा रहा, मैं कसीनो नहीं जाऊँगा। तेरा वाला, मेरा वाला, किसी भी टाइप का।
भगवान कसम। माँ की सौगंध।
तेरी कसम।
पक्का?
पक्का।
बस एक शर्त पर।
सत्या कॉलिंग…
सावी, फ़ोन उठा।
उठा, उठा!
उठा, सावी, फ़ोन उठा!
सत्या, मुझे तुझे कुछ बताना है। हम…
गए काम से!
सावी, हमारी तो वाट लग गई।
-क्या हुआ? -वह विक्टर है ना?
हाँ। तुझे नौकरी से निकाल दिया क्या?
नहीं, उससे भी बुरा।
प्रमोट कर दिया!
तीस मिनट पहले
बॉस…
बॉस…
थोड़ा एडवांस मिलेगा?
वो, दरअसल मेरी गर्लफ्रेंड का बर्थडे है।
तो मुझे लगा कि… कुछ तोहफ़ा वगैरह ले लूँ उसके लिए।
एक बात अच्छे से जान ले, सत्या।
फ्री में कभी लंच नहीं मिलता है।
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