The White Tiger

The White Tiger

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The White Tiger 2021 WEBRip x264-ION10
A Commentary by Pinguoin

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Published on: 2021-01-22
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Nepali subtitle preview

The first 200 lines.

‏NETFLIX प्रस्तुत करता है

‏दिल्ली 2007

‏-अब मैं टकीला पियूँ क्या? पर मैं… ‏-क्यों नहीं?

‏-महाराज, मेरे लिए गाना गाओ! गाओ! ‏-गाओ!

‏वह सड़क के इस तरफ़ क्यों है? ‏यह क्या हो रहा है? क्या?

‏-वह ऐसे क्यों चला रहा है? ‏-मैडम, मैं गाड़ी चलाऊँ?

‏-डर लग रहा है, महाराज? ‏-न, डर नहीं लग रहा।

‏तुम्हें डर लग रहा है।

‏मैडम, गाय!

‏गाय तो हिलने से रही।

‏अरे गाय, सो जाओ!

‏यह सबसे अच्छा जन्मदिन रहा। ‏मैं कभी नहीं आ पाती अगर…

‏हैपी बर्थडे टू यू…

‏हे भगवान।

‏हैपी बर्थडे टू यू

‏तुम कितने…

‏हैपी बर्थडे, डियर पिंकी

‏हैपी बर्थडे…

‏माफ़ कीजिए, ‏कहानी की शुरुआत ऐसे नहीं होनी चाहिए।

‏आखिर, मैं भारतीय हूँ,

‏और यह मेरे लोगों की ‏एक पुरानी और पूजनीय प्रथा है

‏कि कहानी की शुरुआत ‏किसी महान शक्ति की पूजा से करें।

‏इसलिए मुझे भी किसी भगवान के ‏चरण स्पर्श करने चाहिए, पर किस भगवान के?

‏मुसलमानों के एक हैं। ईसाईयों के तीन हैं।

‏और हम हिंदुओं के 36 मिलियन हैं।

‏कुल मिलाकर, 36 मिलियन

‏और चार पवित्र पैरों में से ‏किसी को चुनना है।

‏कुछ सोचते हैं कि इनमें से ‏किसी का भी अस्तित्व नहीं है,

‏पर मेरे देश में, ‏दोनों सूरतों में फ़ायदा होता है।

‏भारतीय कारोबारी ईमानदार और बेईमान, ‏दिखावा और भरोसा करने वाला,

‏चालाक और सच्चा, सब कुछ एक साथ होना चाहिए।

‏चीन के प्रधानमंत्री, वेन जायबाओ,

‏भारत के प्रमुख कारोबारियों से ‏मिलने के लिए इस महीने भारत आएँगे।

‏वह बढ़ती भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में ‏जानना चाहते हैं।

‏इन आर्थिक महाशक्तियों की मुलाकात पर ‏दुनिया भर की नज़रें टिकी हैं।

‏बैंगलोर 2010

‏उम्मीद है कि जायबाओ…

‏मिस्टर जायबाओ, हुज़ूर।

‏जब पता चला कि आप ‏भारतीय कारोबारियों से मिलने आ रहे हैं,

‏मुझे पता था कि आपको ईमेल करना ही चाहिए।

‏सेवा में : महामहिम वेन जायबाओ, ‏प्रधानमंत्री कार्यालय, बीजिंग।

‏भले ही हमारे देश में पीने के पानी, बिजली,

‏सीवेज सिस्टम, जन-परिवहन,

‏सफ़ाई की समझ, अनुशासन, ‏शिष्टाचार या वक्त की पाबंदी की कमी हो,

‏पर कारोबारियों की कमी नहीं है।

‏प्रधानमंत्री जायबाओ भारत की फलती ‏आउटसोर्सिंग अर्थव्यवस्था जानना चाहते…

‏मैं कुछ समय से, ‏आपके देश की तरक्की देखता आया हूँ, जनाब।

‏मुझे पता है कि आप चीनी लोग आज़ादी ‏और व्यक्तिगत स्वाधीनता बहुत पसंद करते हैं।

‏अंग्रेज़ों ने आपको अपना नौकर बनाना चाहा,

‏पर आपने ऐसा होने नहीं दिया।

‏कमाल की बात है, प्रधानमंत्री साहब।

‏ऐसा है कि एक वक्त था जब मैं भी एक नौकर था।

‏आज, मैं भारत की सिलिकॉन वैली, ‏बैंगलोर में एक जाना-माना कारोबारी हूँ।

‏कहते हैं कि इसका नाम ‏अमरीका की सिलिकॉन वैली पर रखा गया,

‏पर शायद हम इस बात पर सहमत हो सकते हैं ‏कि अमरीका बीता हुआ कल है।

‏भारत और चीन आने वाला कल हैं।

‏इस यकीन के साथ कि देश का भविष्य

‏एशियाई लोगों ‏और भूरी चमड़ी वाले के हाथ में है,

‏अब जब हमारे पुराने मालिक, ‏गोरी चमड़ी वाले ने खुद को

‏लौंडेबाजी, सेल फ़ोन के इस्तेमाल ‏और नशे में झोंककर खुद को बर्बाद कर लिया,

‏मैं आपको मुफ़्त में ही

‏अपनी ज़िंदगी की कहानी सुनाकर ‏भारत का सच बताना चाहूँगा।

‏ये मेरे परिवार के सबसे खाते-पीते ‏और अहम सदस्य हैं।

‏इनके बाद, मेरी चालाक, ‏बूढ़ी दादी, कुसुम आती हैं।

‏उन्होंने मेरे भाई किशन को चाय की ‏दुकान पर ज़बरदस्ती काम पर लगाया।

‏और रिक्शा चलाने वाले मेरे पिता से ‏एक-एक पैसा ले लेती थी।

‏मैं लक्ष्मणगढ़ गाँव का बाशिंदा हूँ, ‏जो अंधेरे में डूबा हुआ है।

‏भारत में दो अलग-अलग देश बसते हैं,

‏एक भारत रोशन है,

‏और दूसरा अंधेरे में डूबा है।

‏शायद आप जैसे अमीर इंसान को पता है ‏कि मैं किस हिस्से से आता हूँ।

‏अपने बारे में मूल रूप से बताऊँ, ‏तो उस पोस्टर से अच्छा और कुछ था ही नहीं,

‏जो कुछ साल पहले, कारोबार के चलते,

‏पुलिस ने मेरे नाम का बनाया था।

‏बलराम हलवाई - लापता आदमी की ‏तलाश में मदद चाहिए

‏हाँ, पुलिस को मेरी तलाश है। क्यों?

‏समय आने पर बताऊँगा,

‏पर अगर वादा करें कि जब तक अपनी कहानी नहीं ‏सुनाता, आप मेरे बारे में राय नहीं बनाएँगे।

‏पढ़ो। तुम।

‏पढ़ना नहीं आता?

‏"ए, जी, ज़ेड…"

‏"हम एक महान धरती पर रहते हैं।"

‏"भगवान बुद्ध को इस धरती पर ‏ज्ञान की प्राप्ति हुई थी।"

‏"हम भगवान के आभारी हैं ‏कि हमारा जन्म इस धरती पर हुआ।"

‏यहाँ आओ, लड़के।

‏-यह महिला कौन हैं? ‏-महान समाजवादी नेता जी, सर।

‏और छोटे बच्चों के लिए इनका क्या संदेश है?

‏किसी भी भूले-बिसरे गाँव का ‏कोई भी गरीब लड़का

‏बड़ा होकर भारत का प्रधानमंत्री बन सकता है।

‏जंगल का ऐसा कौन सा दुर्लभ जानवर है

‏जो एक पीढ़ी में ‏सिर्फ़ एक बार पैदा होता है?

‏द व्हाइट टायगर।

‏तुम वही हो। द व्हाइट टायगर।

‏मैं तुम्हें यहाँ से दूर, ‏हमारी महान राजधानी, दिल्ली के

‏किसी स्कूल का वज़ीफ़ा दिलाऊँगा।

‏-क्लैविकल? ‏-क्लैविकल।

‏क्लैविकल?

‏अंधेरे में, हम सब एकसाथ सोया करते थे…

‏एक जीव, कनखजूरे की तरह ‏एक-दूसरे के ऊपर टाँगे रखकर।

‏मगरमच्छ कैसे तैरते हैं?

‏सारस। वह हमारे गाँव पर ‏राज करने वाला ज़मींदार था

‏और हमारी कमाई का ‏एक-तिहाई हिस्सा वसूल किया करता था।

‏वह गाँव को इस तरह से निचोड़ लेता था ‏कि बाद में कुछ नहीं बचता था।

‏हम उसके बड़े बेटे, ‏नेवले से और ज़्यादा डरते थे।

‏और मेरे पिता हमेशा उनके कर्ज़दार रहते थे।

‏मुन्ना!

‏मैंने दोबारा कभी स्कूल में कदम नहीं रखा।

‏उस साल के अंत तक, ‏मेरे पिता टीबी के चलते बीमार पड़ गए थे।

‏लक्ष्मणगढ़ में किसी नेता ने ‏अस्पताल नहीं बनवाया था,

‏इसलिए दो दिन का सफ़र तय कर, ‏दूसरे गाँव जाना पड़ा।

‏कोई डॉक्टर नहीं आया।

‏चुनाव के वादों से मैंने सीखा था

‏कि एक आज़ाद प्रजातंत्र में ‏गरीब न होना कितना ज़रूरी होता है।

‏मरकर भी, ‏वह अपनी किस्मत का विरोध कर रहे थे।

‏मरने, दोबारा जन्म लेने, और फिर से ‏मर जाने का विरोध, सब बेकार में।

‏उस पल मैंने यह समझा

‏कि भारत में एक आदमी के लिए ‏अपनी आज़ादी पाना कितना मुश्किल है।

‏बाद में, मुझे इसकी वजह समझ में आई।

‏दस हज़ार साल के इतिहास में,

‏इस देश में से जन्म लेने वाली ‏सबसे महान चीज़ है, चाकरी का चरखा।

‏उन्हें खून दिखाई देता है, ‏उसकी गंध भी आती है।

‏उन्हें पता है कि अगली बारी उनकी है, ‏फिर भी बगावत नहीं करते।

‏वे पिंजरे से निकलने की कोशिश ही नहीं करते।

‏यहाँ के नौकरों को भी ‏इसी तरह से पेश आना सिखाया गया है।

‏उसकी पीठ पर लदे सामान की कीमत ‏उसकी दो साल की पगार जितनी है,

‏फिर भी, ईमानदारी से ‏यह पैसा अपने मालिक तक पहुँचा देगा,

‏बिना उसमें से एक पैसा लिए।

‏कोई नौकर नहीं लेता।

‏क्यों? क्योंकि भारतीय लोग दुनिया में ‏सबसे ईमानदार और धार्मिक होते हैं?

‏नहीं।

‏क्योंकि हम में से 99.9 प्रतिशत लोग ‏चाकरी के चरखे में फँसे हैं।

‏नौकर इस हद तक वफ़ादार होते हैं

‏कि आप एक आदमी के हाथ में ‏मोक्ष की चाबी पकड़ा सकते हैं

‏और वह श्राप देकर ‏उसे दोबारा आपकी ओर फेंक देगा।

‏मैंने अपने समय में, ‏चोरी से ग्राहकों की बातें सुनना सीखा था।

‏एक मौके की तलाश में।

‏यह करना मेरे भाई ने ‏बहुत पहले छोड़ दिया था।

‏पता है कि आप जैसे साम्यवादी ‏भगवान को नहीं मानते,

‏पर आप किस्मत को मानते हैं?

‏तभी मैंने पहली बार उन्हें देखा था, ‏सारस के सबसे छोटे बेटे, अशोक साहब को।

‏वह हाल ही में अमरीका से ‏भारत लौटकर आए थे, धनबाद में,

‏जहाँ उनके परिवार ने ‏कोयले से दौलत कमाई की थी।

‏तभी मुझे समझ में आ गया ‏कि यही मेरे मालिक हैं।

‏दादी ने उसकी शादी कर दी थी,

‏अपनी बीवी के साथ ‏मौज-मस्ती के लिए दो हफ़्ते दिए थे,

‏और अब वह यहाँ फँसा बैठा था। ‏मेरी भी वही हालत होती।

‏धनबाद

‏और अब, मुझे बस गाड़ी चलाना सीखना था।

‏उनका पता ढूँढना उतना मुश्किल नहीं था।

‏मुझे बस दरवाज़ा पार करना था।

‏चार साल से हम गाड़ी चला रहे थे। ‏वहाँ मालिक गुज़र गए…

‏नमस्ते। आप ही के गाँव से हूँ, सर! ‏लक्ष्मणगढ़ से।

‏मैं मुख्य जंक्शन पर ‏चाय की दुकान पर काम करता था, सर!

‏मैं ही आपकी गाड़ी पर चाय लाता था।

‏कि गाँव पर राज करने के लिए, ‏आपके और बेटे हों।

‏लोग अभी भी मुझे याद करते हैं?

‏हम सब कहते हैं कि हमारे पिता चले गए, सर।

‏सभी ज़मींदारों में सबसे अच्छे और नेक, ‏गांधी जी की तरह।

‏गांधी की तरह?

‏-जी, सर। मोहनदास करमचंद गांधी जी। ‏-अच्छा।

‏तुम्हें क्या चाहिए?

‏सर, आपकी इजाज़त हो तो,

‏आपके लिए ड्राइवर बनना चाहता हूँ। ‏या आपके बेटे के लिए।

‏-तुम मुसलमान हो? ‏-नहीं, सर।

‏हर रोज़ नहाता हूँ।

‏खुद को साफ़ रखता हूँ, और आलसी नहीं हूँ।

‏-हैलो, मेरा नाम अशोक है। ‏-मत करो।

‏तुम्हें ड्राइवर चाहिए, ‏यह हमें घुमाकर लाएगा।

‏-देखें कितना अच्छा है। ‏-जी, सर।

‏मेरी किस्मत देखिए, नेवला।

‏-चला लेता है। ‏-हाँ।

‏पुराने ज़माने में, ‏जब भारत धरती पर सबसे अमीर देश था,

‏एक हज़ार जातियाँ और किस्मतें थीं।

‏इन दिनों, सिर्फ़ दो जातियाँ हैं।

‏बड़े पेट वाले मर्द और छोटे पेट वाले मर्द।

‏और बस दो ही किस्मतें हैं। ‏शिकार करो या शिकार बन जाओ।

‏-हमारे सारे नौकर ऊँची जाति के हैं। ‏-जाति से क्या फ़र्क पड़ता है?

‏-मेरी जाति में कभी नहीं पीते। ‏-तो क्या करते हो?

‏इसलिए इतनी मीठी-मीठी बातें कर रहा है?

‏-खाना पकाते हो? ‏-बिल्कुल, सर। बहुत अच्छा।

‏-क्या बनाते हो? ‏-हर तरह की मिठाइयाँ, सर।

‏गुलाब जामुन, रसगुल्ला, ‏लड्डू, रसमलाई, काजू बर्फ़ी।

‏ड्राइवर खाना भी पका लेता है। ‏सिर्फ़ भारत में। कल से शुरू कर सकते हो?

‏इतनी जल्दी नहीं। ‏पहले इसके परिवार का पता लगाना होगा।

‏आप लोग मेरे माँ-बाप जैसे हैं। ‏माँ-बाप से पैसे कैसे माँगूँ?

‏महीने के पंद्रह सौ।

‏नहीं, सर, बहुत ज़्यादा हो जाएगा। ‏मुझे उसका आधा दे दीजिए, सर। बहुत है।

‏तुम्हें दो महीने से ज़्यादा रखा, ‏तो दो हज़ार हो जाएगी।

‏-सिर्फ़ मेरे लिए गाड़ी चलाओगे। ‏-जी, सर।

‏इतना हॉर्न मत बजाओ।

‏तुमने ऐसा क्यों किया?

‏सलाख निकालें?

‏-ऐसा मत करो। ‏-सलाख निकालते हैं।

‏नेवले ने लक्ष्मणगढ़ में ‏अपने आदमी को फ़ोन किया होगा,

‏क्योंकि दो दिन बाद, ‏जब उन्होंने मुझे काम पर रखा,

‏मेरे परिवार के बारे में सब पता था।

‏हमारे देश की आन-बान-शान, भारतीय परिवार।

‏हर मालिक को हर समय पता होना चाहिए ‏कि उसके नौकर का परिवार कहाँ रहता है,

‏अगर नौकर अपने मालिक से चोरी करके ‏भागने का फ़ैसला करे तो।

‏अगर ऐसा होता है…

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