The first 200 lines.
मैं प्रतिस्पर्धा को शुरू करने की घोषणा करता हूँ।
के.आर.एम. पब्लिक स्कूल खेल दिवस
यदि दुनिया आपका विरोध करती है,
यदि वह अतीत में हर बार आपके हार जाने की घोषणा कर चुका हो,
लेकिन जब तक खुद ही नहीं मान लेते,
आपको कोई नहीं हरा सकता! कभी नहीं!
कभी हार मत मानो!
ध्यान और संतुलन।
ध्यान और संतुलन।
-कौन हो तुम? -चैंपियन।
माइक टायसन ने क्या कहा था?
"दुनिया प्रथम आने वाले को ही याद रखती है।"
तुम जीतने के लिए पैदा हुए थे। तुम कर सकते हो।
मैं कर सकती हूँ।
माँ! जाओ और निबंधन करवाओ!
कह दो मैं आ गयी हूँ।
हे भगवान।
ऐसे ही, चलते हैं।
मस्ती! निम्बू और चमच्च रेस
-आपका नाम श्रीमती? -जानकी वेंकटरमण।
-ठीक। जानकी वेंकटरमण-- -महाशय?
-जी। -मैंने अपना चमच्च लाया है।
-क्या मैं इसका इस्तेमाल कर सकती हूँ? -बिलकुल। मुझे दिखाइये।
इतना बड़ा चमच्च?
आपने चमच्च का आकर निर्धारित तो किया ही नहीं?
तो? आप करछुल लायेंगी?
यह नीम्बू और चमच्च का रेस है।
लेकिन यह तो बड़ा सा आम भी संभाल सकता है।
-इसको अनुमति मत दीजिये। -ठीक है।
यह निम्बू और चमच्च लीजिये।
-आपका नाम? -विजयलक्ष्मी बालकृष्ण।
-मैं पिछले साल की विजेता हूँ। -ठीक।
आगे जाइये।
बताइए मैडम।
और क्या करवाते हैं? क्या कबड्डी सूची में है?
चलो, विजी। चलो!
चलो, तेज!
चलो विजी। तेज!
तेज!
हो गया! चलो!
द्वितीय पुरस्कार श्रीमती विजयलक्ष्मी बालाकृष्णन को दिया जाता है।
बधाई हो।
-शुक्रिया, फादर। -बहुत बढ़िया।
-ईश्वर का आशीर्वाद बना रहे। -श्रीमती मैथिली राजेंद्रन।
शुक्रिया, फादर!
-कैसा रहा? -बढ़िया, विजी!
-क्या? -क्या तुम एक और तस्वीर ले सकते हो बालू?
हे भगवान!
निम्बू और चमच्च रेस
-सुनो बालू। -हाँ।
क्यों न हम पैसे जमा कर अपनी टैक्सी सेवा चलते हैं?
-टैक्सी सेवा? -हाँ।
बिलकुल करेंगे।
तुम्हारा सिलाई और चिट फण्ड का व्यापार भी तो कितना सफल रहा है।
इसमें भी अपना हाथ आजमा लेते हैं।
मैं गंभीर हूँ। मेरा मजाक मत बनाओ।
ठीक है। मुझे सोचने दो।
पहले एक गाड़ी खरीदते हैं।
एक नहीं! पाँच गाड़ी।
बड़ा सोचो बालू।
-विजयलक्ष्मी ट्रेवल। -चलो!
-पाँचों गाड़ियाँ वातानुकूलित होंगी? -और क्या।
तुम एक गाड़ी चलाओगी।
बिलकुल नहीं!
मैं दफ्तर में रहूंगी।
मैं लेखा का हिसाब रखूंगी और ग्राहकों के फोन लूँगी।
मैं चालकों के जाँच के लिए औचक निरिक्षण भी करूंगी।
सही।
क्या तुम मुझे एक गाड़ी में स्कूल छोड़ दोगी?
बिलकुल नहीं।
मेरे लिए ग्राहक जरूरी हैं। तुम हमेशा की तरह पापा के साथ जाओगे।
ये क्या है? पांच गाड़ियाँ रहेंगी और मैं मोटरसाइकिल से जाऊंगा?
मेरे दोस्तों को पता लगा तो मजाक उड़ायेंगे।
सुनो। व्यापार पहले।
पहले व्यापार को बढ़ने तो दो।
फिर हम, खुद के इस्तेमाल के लिए एक और गाड़ी खरीदेंगे, ठीक है?
कितनी छोटी सी इक्षा है विजी इसकी। बस सप्ताह में एक बार--
बिलकुल नहीं!
मैं अपने ग्राहक को क्या बोलूंगी जब यह जा रहा होगा?
यह गलत है माँ!
तुम जिद कर रही हो, विजी। यह बहुत नहीं माग रहा।
सप्ताह में बस एक बार। अपना एकलौता है। क्या तुम ग्राहकों को इसपर तरजीह दोगी?
देखो बालू। मेरे ग्राहक सबसे जरूरी हैं।
तभी तो मेरे व्यापार बढेगा।
-मैं सही हूँ, है न? -
हाँ, लेकिन आप तीनों का खयाली गाड़ी के लिए लड़ना सही नहीं है।
यह बहुत बोलता है। अपने कंपनी के लिए ठीक नहीं रहेगा।
मौसी का फोन है माँ।
माँ!
माफ़ करो।
हेलो।
हम घर ही आ रहे बहना।
हम दस मिनट में पहुँच जायेंगे।
ठीक है। आओ।
वह हमारे इलाके में है, गृह प्रवेश के लिए लोगों को निमंत्रण देने आई है।
-यह म्यूजिकल चेयर के लिए। -म्यूजिकल चेयर?
यह गायकी के लिया।
बहुत हुआ।
तुमने अभी तक टीवी नहीं ठीक करवाया, बालू?
नहीं मैं इसको बदलवा रहा हूँ।
नाना। पिताजी ही ऐसे एकलौते इन्सान हैं जिसकी बात ग्राहक सेवा भी नहीं मानता।
बहुत हुआ।
मैं व्यावसायिक न्यायालय में जाने की सोच रहा।
तुम्हें इसके लिए न्यायलय जाना है?
हमें अपने हक के लिए
-लड़ना चाहिए, ससुर जी! -पिताजी!
हक की यह लड़ाई तीन महीने से चल रही है।
अब अगला कदम. कलेक्टर कार्यालय के सामने आत्मदाह ही है।
इससे बढ़िया टीवी जला दो।
तुमने इतनी जल्दी यह सब बना कैसे लिया?
वह हमेशा से ऐसी ही थी।
यदि वह पढने लिखने में ऐसी रहती तो तुम दोनों की तरह बैंक में अधिकारी होती।
-थोड़ा भाज्जिया लीजिये। -शुक्रिया।
मैं खा रहा हूँ, है न?
-ये लो सिद्धू। -प्यारा बच्चा!
क्या तुम पढाई कर रहे हो, या अपने माँ की तरह ही?
नाना, जब मैं बड़ा हो जाऊंगा, तब मैं माँ की तरह ही व्यापार करूँगा!
-यह क्या बोल रहा है? -"माँ की तरह ही व्यापार करूँगा?"
-हाँ, नाना! -व्यापार?
माँ टैक्सी सेवा शुरू करने वाली है।
क्या?
टैक्सी सेवा? यह सब क्या है?
क्या? इसमें क्या गलत है?
क्या तुम अपने बैंक से कर्ज दिलवाओगी?
क्यों?
-गाड़ी खरीदने के लिए। -पांच गाड़ी खरीदने के लिए।
टीवी तो काम कर नहीं रहा।
-जैसे गाड़ी करेगी। -यहाँ बैठो।
सब कुछ तुम्हारे लिए खेल ही है न?
मैं गंभीर हूँ।
इसने तो अपने बारहवीं इम्तेहान भी मजाक में लिया, वह भी तीन बार।
मुझे यह दो।
-जाओ प्याज और मिर्च पकौड़े बनाओ। -सुनो, विजी।
विजी, तुम इतने गुस्से में क्यों हो?
क्यों नहीं? पिताजी हमेशा मेरा मजाक बनाते हैं, सिद्धू के सामने भी!
वह सच बोल रहे हैं। जैसे कि तुमने कोई मैडल ले आया है।
क्या मैं जान-बूझकर फेल हुई? पहली बार, टाइफाइड था!
दूसरी बार, सिलेबस से कुछ आया ही नहीं!
हमारे कक्षा की सबसे होसियार लड़की, मुथुलक्ष्मी भी फेल कर गयी!
तीसरी बार, मेरे उंगली में गैंग्रीन हो गया था!
फिर दादा ने मेरी पढाई रोक दी, कहा, "कोई काम का नहीं होगा।"
-तुम उनकी नक़ल बहुत बढ़िया से करती हो। -बिलकुल करती हूँ।
इसका मतलब कुछ भी कह सकती हो क्या?
तुम्हें क्या लगता है व्यापर करना इतना आसन है?
तुमने चिट फण्ड के 30,000 रूपये का पूरा नुकसान कर दिया।
तो तुम भी मेरी नाकामियां गिनाओगी?
चिंता न करो। मैं सारे पैसे वापस कर दूँगी।
यही तुम्हारी समस्या है। तुम्हें एक चीज पर ध्यान देना चाहिए।
-सिलाई! संगीत! खाना बनाना! मिमिक्री! -सब सही है।
मैं उनमें अच्छी हूँ।
मुझे खेल से लगाव था। लेकिन किसी ने समर्थन नहीं किया।
यदि तुमने किया रहता, तो खेल वाले कोटा से नौकरी मिल गयी रहती!
निम्बू और चमच्च वाला रेस खेल वाले कोटा में नहीं रहता है!
तब क्या? मुझे कुछ नहीं करना चाहिए? ऐसा ही न?
मुझे घर पर रहना चाहिए।
और जब तुम आओ, मुझे तुम्हारे लिए भाज्जिया बनाना चाहिए।
भाज्जिया शानदार हैं, विजी। मुझे एक और चाहिए।
बालू, मैं ट्रेवल्स का व्यापार नहीं करूंगी।
इसमें बहुत नुकसान हुआ है।
भुगतान की वजह से बैंक ने गाड़ियाँ रख लीं।
तुम चालक का हिसाब कर दो।
क्या है यह?
तुम कितने दिन इस भाड़े के घर में रहोगे? अपना क्यों नहीं ले लेते?
उनको देखो। दोनों ने एक ही ब्लाक में अपार्टमेंट लिया है।
-तुम्हें भी ले लेना चाहिए। -देखता हूँ।
-माफ़ करिए? -हाँ।
-क्या यह आपकी गाड़ी है? -हाँ।
-यह मेरी पार्किंग है। -हम हटा लेंगे।
मेरी अनुमति के बिना यहाँ लगाना गलत है न?
बस थोड़ी दे महाशय।
मैंने अपनी जगह पर स्कूटर लगा रखी है। और आपके पास तो गाड़ी भी नहीं है।
मेरे पास तो वाशिंग मशीन भी नहीं है। लेकिन क्या आप अपना वाला मेरे घर में रखेंगे?
-मैं इसके लिए शर्मिंदा हों। -माफ़ करिये।
-मुझे माफ़ करिये। आप निकालिए। -हेलो!
-हाँ। -यह अंतिम बार हुआ है।
अब निकालिए। बेवकूफ।
मिलते हैं विजी। अलविदा, सिद्धू!
-बालू, हम अन्दर जा रहे। -ठीक है।
क्या हुआ बालू? तुम्हें भी उसने परेशां किया?
-वह बहुत अशिष्ट है। -वह हमेशा से ऐसा ही है।
वह स्टोव के जैसा है, हमेशा गरम।
जब से आया है, सबको परेशान करता है।
कल मंगलम के यहाँ कोई रस्म थी।
जब इसे शोर बर्दाश्त नहीं हुआ, तो उसने उसके घर जाकर बहुत हंगामा किया।
-सुश्री मंगलम को रस्म बीच में रोकनी पड़ी। -बेचारा खुद भी समस्या में है।
उसकी तो पत्नी भी नहीं है। वह अकेला रहता है।
-तो, तुम्हारी तरह है? -हम दोनों की तुलना मत करो।
मैं अकेला रहता हूँ। वह तन्हा है।
बालू!
-कृपया मेरे पाँव दबा दो न। -मैं आ रहा।
निकलने वक़्त पिताजी कुछ बोल रहे थे। क्या कहा उन्होंने?
कुछ नहीं? बस ऐसे ही।
उन्होंने कहा कि तुम्हारी दोनों बहनों ने अपार्टमेंट ख़रीदा है।
मुझे भी वह खरीदने बोल रहे थे।
उनको कहना था, हम भाड़ा दे रहे वह ईएमआई देंगे।
और इन दोनों के बीच कोई अंतर नहीं है और हम भी खुश हैं।
मैं भी यह बोल सकता था, लेकिन वह सही हैं।
वह सब स्थायी हैं। और तुम मेरे साथ अटकी हुई हो।
"नहीं, गोपाल!
मेरी योजनायें तो सच्चे प्रेम के चौखटे पर ही चकनाचूर हो गए हैं!
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