Ikka

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Ikka 2026 HINDI NF WEB H264-EDITH
A Commentary by tedi
Retail NF | 2:20:13

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Published on: 2026-07-10
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The first 194 lines.

- -

इक्का

अगले राउंड के सभी प्रतिभागियों को

आख़िरी बार बुलाया जा रहा है।

स्विमर्स, अपने स्टार्टिंग ब्लॉक पर पहुंचें।

शाबाश, समाइरा!

आप में से कई लोग वकील बनने वाले हैं।

मगर कोर्ट, क्लासरूम नहीं होता।

इंसाफ़ और कानून पर अर्जुन मेहरा की स्पीच

वहां इंसाफ़ जीतकर हासिल किया जाता है।

और इंसाफ़ कैसे जीता जाता है, इक्का से बेहतर कोई नहीं जानता।

जब सबको लगता है केस ख़त्म हो गया,

तब वह अपना हुकुम का इक्का खेलकर केस का रुख बदल देते हैं।

स्वागत कीजिए, इस शहर के मशहूर और कभी ना हारने वाले वकील

मिस्टर अर्जुन मेहरा का।

देवियों और सज्जनों, स्वागत कीजिए…

अपनी आंखें बंद करके,

ज़रा इस केस को गौर से सुनिए।

पूना में आधी रात को…

सुनसान सड़कों पर,

दो सौ बीस किलोमीटर की स्पीड पर एक लक्ज़री कार तेज़ी से आती है

और फ़ुटपाथ पर चढ़ जाती है।

फ़ुटपाथ पर सोते हुए बेघर लोग कुचले जाते हैं।

उनमें से

तीन मारे जाते हैं,

और बाकी सब

ज़ख़्मी हो जाते हैं।

इस लक्ज़री कार का ड्राइवर कोई ऐरा-गैरा इंसान नहीं है,

एक अमीर बाप की बिगड़ी हुई औलाद है।

आप लोग सोच सकते हैं कि केस का क्या नतीजा होगा।

अब अपनी आंखें खोलिए और सोचिए।

अगर कार की जगह, ट्रक होता तो?

क्या कार का ड्राइवर और ट्रक का ड्राइवर

कानून की नज़र में बराबर हैं?

और कोर्ट की नज़र में?

अपनी सीमाओं से आगे जाओ!

समाइरा!

सालों तक गरीब धक्के खाता रहता है,

और कानून उसके लिए सज़ा बन जाता है।

कानून अंधा है।

लेकिन एक बार अपनी आंखों से पट्टी उठाकर ज़रूर देखता है

कि फ़रियादी अमीर है या गरीब।

इंसाफ़ के लिए कानून को भी शीशा दिखाना पड़ता है।

और यह कोई लॉ स्कूल नहीं सिखाता।

इंसाफ़ की आवाज़ आपके अंदर से आती है।

वह आपको बताती है कि कौनसा केस लड़ना है।

हम कोर्ट में जीतने के लिए नहीं,

हक़ के लिए लड़ते हैं।

समाइरा!

नहीं।

समाइरा।

लाइफ़गार्ड

सर, आप एक जाने-माने डिफ़ेंस लॉयर हैं जो कभी कोई केस नहीं हारे।

अगर आप सच में इंसाफ़ के लिए लड़ना चाहते थे,

तो आप सरकारी वकील क्यों नहीं बने?

इंसाफ़ की लड़ाई लड़ने के लिए, सरकारी वकील होना ज़रूरी नहीं है।

एक डिफ़ेंस लॉयर होकर भी आप इंसाफ़ के लिए लड़ सकते हैं।

और मैं हमेशा सच का साथ देता हूं।

सर।

ज़रूरी कॉल है।

आज के लिए मैं आपको सिर्फ़ इतना कहकर जाऊंगा

कि इंसाफ़ को कानून के नज़रिए से मत देखिएगा।

कानून, सिर्फ़ एक ज़रिया है इंसाफ़ पाने का।

अपने-आप में इंसाफ़ नहीं।

शुक्रिया।

हां, अवंतिका?

अवंतिका?

बेटा।

कैसी हो?

नाक से थोड़ा सा खून बहा है।

-नाक से खून! -मैं ठीक हूं।

कभी-कभी अंडरवाटर हो जाता है।

पानी अंदर चला जाता है।

जितना दिख रहा है, उतना बुरा नहीं है।

दादी अम्मा।

मैं मर नहीं रही।

-ओए! -ओए!

समाइरा अब घर जा सकती है।

-देखा! -वाह!

-सब ठीक है। -बाय।

-शुक्रिया। -डॉ. गलवणकर आपका इंतज़ार कर रहे हैं।

-ठीक है। -बेटा, हम अभी आते हैं।

सैम, तुम यहीं रहो। मैं अभी आ रही हूं, ठीक है?

डॉक्टर, क्या हुआ मेरी बेटी को?

नाक से ऐसे खून आना, आम बात है?

कभी-कभी हो भी जाता है।

ऐसा होता रहता है।

लेकिन मैं कुछ टेस्ट करना चाहता हूं, बस तसल्ली के लिए।

किस चीज़ की तसल्ली?

चिंता मत कीजिए, मिस्टर मेहरा।

टेस्ट कर लेते हैं।

समाइरा आपकी इकलौती बेटी है?

हां।

-क्या… -आप यह सवाल क्यों पूछ रहे हैं?

मेडिकल रिकॉर्ड के लिए प्रोटोकॉल है।

आप दोनों का ब्लडवर्क भी लगेगा।

सिस्टर? इनका ब्लडवर्क करवाके अपलोड कर देना।

जी, सर।

शुक्रिया।

सॉरी, अवंतिका।

मुझे वहां होना चाहिए था।

आप पूल में खून नहीं देख पाते।

मैं अब तक यकीन नहीं कर पा रही हूं।

ख़ुशकिस्मती है कि कुछ सीरियस नहीं है।

इसे ख़ुशकिस्मती नहीं, बदकिस्मती कहते हैं।

क्वालिफ़ायर्स के बीच में नाक से खून आना?

अब लाइन-अप में मेरी जगह बदल देंगे।

अगर टीम में जगह नहीं मिली तो…

हे भगवान!

कौनसी जगह भेज देंगे तुझे?

- -डैड, ड्रामा मत करो।

बेटा ड्रामा कौन कर रहा है? तू या मैं?

चलो, कुछ खाते हैं।

बटर चिकन कैसा रहेगा?

मम्म। मैं नहीं खाऊंगी बटर चिकन।

-उसमें बहुत कैलोरी होती हैं। -हे भगवान।

आपको कोई देने भी नहीं वाला है।

आज हम सूप पिएंगे।

बस?

सूशी कैसी रहेगी?

वाह! सूशी?

बहुत फीकी होती है।

-अरे, नहीं। -

ऋषभ

- हैलो? - हैलो, सर।

सब ठीक है ना?

हां, अब सब ठीक है।

सर, मिस्टर अमृतपाल को आपसे कुछ ज़रूरी बात करनी है।

नहीं।

आज मुमकिन नहीं होगा।

सर, बात दरअसल सच में ज़रूरी है।

उन्हें समझ क्यों नहीं आता, आज…

आज मैं अपने परिवार के साथ समय बिता रहा हूं, ठीक है?

अवंतिका।

डॉक्टर्स की लिखावट तो कभी समझ में ही नहीं आती।

लेकिन आज, उसकी बातें भी कुछ समझ में नहीं आईं।

अर्जुन…

…इतना मत सोचो।

मशहूर उद्योगपति और आम चुनावों के उम्मीदवार

हर्षवर्धन गौर के बेटे, शौर्यमान गौर का नाम

हत्या के प्रयास के मामले में सामने आया है।

इस खुलासे के बाद से, राजनीती और व्यापार दोनों ही जगह हलचल मच गई है।

हां?

कल सुबह 11 बजे हम गौर से मिल रहे हैं, उनके घर पर।

शौर्यमान गौर के केस के सिलसिले में खास तौर से तुम्हें बुलाया है।

कल वहां पहुंच जाना, ठीक है?

ठीक है।

बच्ची कैसी है?

-सो गई है। - सवाल यह उठता है कि क्या

यह केस भी बाकि हाई-प्रोफ़ाइल मामलों की तरह होगा

जिनका सच चुपचाप दबा दिया जाता है या फिर इस बार इंसाफ़ होगा?

क्या शौर्यमान गौर सही में गुनहगार है?

सोमा मित्तल को फ़िलहाल दवाइयों के ज़रिए कोमा में रखा गया है।

इस मामले में अब तक किसी को गिरफ़्तार नहीं किया गया है।

गोपाल कृष्णन जी, आप इस केस को खुद क्यों लड़ रहे हैं?

क्यों नहीं?

आसान केस हर वकील का सपना होता है।

सर, इतने नाज़ुक मामले को आप आसान केस बता रहे हो?

इस मामले को नाज़ुक आप लोग बना रहे हो।

मेरे लिए तो यह केस शीशे की तरह साफ़ है।

शौर्यमान गौर ने सोमा मित्तल पर जानलेवा हमला किया,

उसका यौन शोषण करने की कोशिश की, और फिर उसको मरने के लिए छोड़ दिया।

सर, शौर्यमान गौर के पिता चुनाव लड़ रहे हैं।

इसके बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?

अर्जुन, बैठो प्लीज़।

अर्जुन,

जब किसी बड़े पेड़ को गिराना हो,

तो उसकी जड़ पर वार किया जाता है।

एक नेता की जड़

उसका परिवार होता है।

तुम्हारी फ़र्म सालों से हमारी लीगल फ़र्म रही है।

अगर तुमने यह केस नहीं लिया,

तो सवाल उठेंगे कि तुमने यह केस क्यों नहीं लिया।

और मीडिया को तो तुम जानते ही हो।

केस शुरू होने से पहले ही शौर्य को

गुनहगार घोषित कर देंगे।

अर्जुन, चुनाव एक महीने के बाद हैं।

मैं जानता हूं।

शौर्य के साथ कुछ मसले हैं।

लेकिन अगर तुम बीती बातों को भूलकर उसके किए को माफ़ कर सको।

मैं बस इतना चाहता हूं…

तुम शौर्य से एक बार मिल लो।

शौर्य कहां है?

मॉर्निंग। देरी के लिए माफ़ी चाहता हूं।

केस के बारे में बात कर लें?

हर्षवर्धन जी,

मैं आपसे माफ़ी चाहता हूं।

-मैं यह केस नहीं लड़ सकता। -अर्जुन?

मना ही करना था, तो मैसेज कर देता।

मैसेज क्यों?

मैं इन्हें खुद मिलकर

कहना चाहता था कि मैं यह केस नहीं लड़ सकता।

अब मैं इजाज़त चाहूंगा।

मिस्टर कभी ना हारने वाले वकील।

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