The first 200 lines.
-क्या बात कर रहे हैं, मिस्टर गुप्ता? -
नहीं, एक महीने पहले ही मैंने इनवॉइस भेज दिया था।
कब भेजा था, मैडम जी?
- अरे, भाई। तुम हार रहे हो? -देखिए, फ़ैक्स मैंने खुद किया है।
- अरे, मुझे नहीं मिला अभी। -नहीं-नहीं।
पॉइंट्स छोड़, मैं यहाँ हूँ!
- लगभग हो गया। आराम से! -नहीं-नहीं, बेहद अफ़सोस है।
- मर रहे हैं। क्या करें! -शेखर!
-यार, मैं मर गया, यार। क्या कर रहा है तू? -धत्, यार!
-मेरा हाई स्कोर चल रहा था, यार! -मैंने कुछ नहीं किया, तूने ही किया है।
नहीं, अगर शुक्रवार तक भुगतान नहीं हुआ,
तो आपकी शिपमेंट की डिलीवरी हमें रोकनी पड़ेगी।
-आप खेलोगे? -हाँ-हाँ।
-हार निकाल। -मम्मा!
यह संभव ही नहीं है।
-मेरे पास कोई विकल्प नहीं है। -अंकल, इसे आउट कर दो। बहुत चीटिंग करता है।
-मैं आपको कंट्रोल्स बताता हूँ। -हाँ, प्लीज़।
-यह कूदने वाला है, यह शूट है। -यह शूट है?
-आप बोल रहे हो आपको फ़ैक्स नहीं मिला। -फ़ोन!
-बोल रहे हो आपको इनवॉइस नहीं मिला। -माँ!
-पावर किसको मिली, मुझे मिली? -आपको मिली, आपको मिली, आपको मिली है।
- -हाँ-हाँ।
पावर का मज़ा लीजिए।
ज्योति, देखना कौन है!
- मैं देखती हूँ! -आगे जाना, अंकल!
-अर्जुन, माँ आ गई हैं! हैलो। - हैलो।
-जाओ। - हैलो, शेखर।
- हैलो, अनीशा आंटी। -अभी भी तैयार नहीं हो?
-माफ़ कीजिए, आंटी। - जल्दी करो!
माफ़ करना, देर हो गई। माँ, मेरा तौलिया कहाँ है?
वहीं पे पड़ा है।
-और मेरा स्विमिंग बैग? -वहीं उसी के पास है।
-हैलो। -हैलो।
-कल भी ले जाओगी न? -हाँ, कर लूँगी न। बस तुम छोड़ दोगी।
मेरा एक ज़रूरी अपॉइंटमेंट है। मैं उसे ख़त्म कर…
- - ठीक है।
-ये इन्हेलर लिया तुमने? - कॉर्डलेस के पास है।
अच्छा सुनो, एक और चीज़ शाम का न, फ़िल्म 6:00 बजे तक ख़त्म हो जाएगी।
-तो इन लोगों को 6:30 बजे तक छोड़ दूँगी। -हाँ, चिंता मत करो। बाय।
माँ, अब चलें!
- हाँ, चलो। -बाय।
- मुझे भी "बॉर्डर" देखनी है! -
- -
ये गुप्ता फिर से बहाना बना रहा है।
कह रहा है इनवॉइस ही नहीं मिला उसे।
मैंने भी बोल दिया उसे शिपमेंट रोकनी पड़ेगी हमें।
-तुमने इनवॉइस भेजा था? शेखर? -
खेलोगी?
ये चीज़ घर पे ला के न, तुमने बहुत बड़ी गलती कर दी।
-नीचे। -हाँ, पता है मुझे।
-पता है, तो करो न। -कर रही हूँ।
-और याद रखना कि यह केवल गेम है। -हाँ-हाँ।
शुरू!
धीरज।
-मारो न! -मार तो रहा हूँ!
आगे बढ़ो! अरे, मैं नीला, तुम लाल हो!
कहाँ जा रही हो?
टीना के घर।
किससे पूछकर?
मैंने पापा को बताया था।
क्या मैं जा सकती हूँ?
-मार दो न? -कर तो रहा हूँ!
माँ, मैं जा सकती हूँ?
आगे बढ़ो न!
-कूदो! - मैं कूद रहा हूँ!
परवाह नहीं कि पापा ने क्या बोला था।
फ़िल्म जाना है न, होमवर्क ख़त्म करो पहले।
आप हमेशा ऐसे ही करते हो।
मैं 17 साल की हूँ और इस घर में कोई मेरी बात नहीं सुनता।
बस, कुछ ही और सालों की बात है… फिर ये चले जाएँगे।
- - चलो!
गाड़ी हटाओ!
-नीलम! -हटो!
नीलम! आगे जगह कहाँ है, यार!
हटो! बहस बंद कर।
नीलम!
हटो!
- -नीलम! हटो! जगह दो!
हटो न!
रास्ते से हटो!
अरे, जाने दो! दो मिनट के लिए!
मेरे दोनों बच्चे अंदर हैं।
प्लीज़! मुझे जाने दो! जाने दो न। मेरे दोनों बच्चे अंदर हैं।
हमारे बच्चे! हमारे बच्चे हैं वहाँ पे!
प्लीज़!
जल्दी करो, लड़को! आओ!
उपहार सिनेमा, नई दिल्ली - 13 जून, 1997
- -
शेखर!
नीचे लाओ!
संभाल इसको। बच गया।
…आ नहीं पा रही हैं, सर।
-इन्हें कहाँ ले जा रहे हैं? -एम्स, सफ़दरजंग।
एम्स या सफ़दरजंग? कहाँ?
अर्जुन! मेरे बेटे का नाम सूची में है?
-अनीशा, बच्चे मिले? -अनीशा!
ये तो कह रहे हैं कि कोई अंदर है ही नहीं। सबको बाहर निकाल दिया।
अनीशा, अच्छा। तुम्हारे पास फ़ोन है? फ़ोन है? फ़ोन है क्या?
-हाँ, फ़ोन है मेरे पास। -अगर कुछ भी पता चलेगा, तो फ़ोन करना।
चलो, चलो, चलो!
-रिक्शा! -रिक्शा!
रिक्शा!
रिक्शा!
रुकिए! रिक्शा!
-एम्स तुम जाओ। मैं सफ़दरजंग जाता हूँ। -एम्स, जल्दी से!
-तुम जाओ। जाओ, जाओ, जाओ! - हाँ। मुझे फ़ोन करना, शेखर!
एंबुलेंस
हमें नहीं पता कि क्या हो रहा है।
मैडम, रुकिए।
प्लीज़ मुझे जाने दीजिए। मेरे बच्चे अंदर हैं।
हम आपको अंदर नहीं जाने दे सकते।
प्लीज़ जाने दीजिए। मेरे बच्चे। प्लीज़!
-बस दो मिनट के लिए। -आप पीछे हटिए।
आप अंदर जाओ।
नर्स!
आइए, कुछ लोगों से बात करते हैं।
मैडम, आप इस बारे में कुछ कहना चाहेंगी?
क्या कर रहे हैं? चलिए आप।
-आपातकालीन विभाग कहाँ है? -आगे से दाहिनी तरफ़।
-सीधा जा के दाहिने तरफ़? -हाँ।
-आपातकालीन विभाग? आपातकालीन। मैडम! -
उन्नति! उज्ज्वल!
मैडम, आपकी क्या मदद करूँ?
-मैडम? -मैं अपने बच्चों को ढूँढ़ रही हूँ।
मैं अपने बच्चों को ढूँढ़ रही हूँ।
-डॉक्टर, मेरे बच्चे। -यहाँ इजाज़त नहीं है। रुकिए।
- आप पुलिस से हैं? प्लीज़ जाएँ। -देखिए…
कोई आकर आपकी मदद करेगा। प्लीज़ बाहर रुकें।
उज्ज्वल!
आपकी बेटी दिखती कैसी है?
उन्नति के बाल छोटे हैं।
लंबाई है पाँच फ़ुट छह इंच।
वह 17 साल की है।
और उज्ज्वल चश्मे लगाता है, लंबाई पाँच फ़ुट सात इंच।
उनके साथ एक और लड़का था, अर्जुन। उसकी लंबाई नहीं मालूम।
उज्ज्वल जितनी ही उसकी लंबाई है।
उसने पहना क्या था?
- -हाँ, शेखर?
-शेखर। -नीलू?
हाँ। उन्नति? कहाँ है वो?
उसने क्या पहना था?
पीला टॉप, नीली जींस।
कहाँ हैं उन्नति, उज्ज्वल?
मुझे नहीं पता, नीलम। नर्स ने शायद किसी को… बस रुकना।
इधर?
आइए। ये देखिए।
शेखर?
सर, आपकी बेटी है?
सर?
ट्रायल बाय फ़ायर
देर हो रही है। माफ़ करना, हमें जाना होगा।
नीलम।
इसका हार कहाँ है?
समय हो गया है।
नहीं। हार। उसका हार कहाँ है?
-किसी ने छीन लिया है उससे, शेखर! -नीलम…
किसी ने मेरी बच्ची से ज़रूर छीन लिया है!
दस्तखत कीजिए यहाँ पर। और यहाँ पर।
मुझे बेहद अफ़सोस है।
कितने सारे… ऐसा भी नहीं कि एक ही बच्ची थी, सब के सब।
मुझे बेहद अफ़सोस है, नीलम। बिल्कुल समझ ही नहीं आ रहा था कि…
घर जाओ तुम, अनीशा।
अपने पति के साथ रहो।
अर्जुन के लिए उज्ज्वल ही उसकी दुनिया थी।
अर्जुन बहुत परेशान है।
अपने कमरे से बाहर ही नहीं निकल रहा।
वह सदमे में है। कैसे हमारे तीनों बच्चे…
अर्जुन?
तुम्हें अर्जुन का पता नहीं था?
मैं जाकर शेखर से मिलती हूँ।
[न्यूज़ रिपोर्टर टीवी पर अस्पष्ट ढंग से बोल रहा है]
अलमारी देखो।
- -
बच्चो… श्श!
ज्योति नहीं आईं?
वो मैंने घर भेज दिया उसको। कुछ चाहिए?
भाभी?
पानी।
इसी के साथ हमारा राष्ट्रीय बुलेटिन समाप्त होता है।
No comments yet. Be the first to leave one.