The first 171 lines.
अस्वीकरण इस फ़िल्म के सभी पात्र काल्पनिक हैं
और इनकी किसी भी समुदाय या जीवित या मृत व्यक्ति से कोई समानता नहीं है।
कोई भी समानता निरुद्देश्य और संयोग मात्र है।
शिवपुरी, मध्य प्रदेश वर्ष 1994
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जज साहब, ये है मंजू सिंह।
इस औरत ने पैसों के लालच में आ के दो मासूम प्रेमियों का
बड़ी बेरहमी से कत्ल कर दिया।
इसने ये एक मिनट के लिए भी नहीं सोचा
कि उनकी ज़िंदगी बस अभी-अभी शुरू हुई थी।
और उनकी किस्मत देखिए।
अपने घरवालों से भाग कर
श्री रमेश कुमार ट्रस्ट धर्मशाला, शिवपुरी में कुछ दिनों के लिए रहने के लिए आए थे,
जहाँ की देखरेख का ज़िम्मा इसका था।
लेकिन उनके पास पड़े पैसे और सोने को देखकर इसकी नीयत बदल गई।
इसने उन्हें भरोसा दिलाया कि वो वहाँ महफ़ूज़ हैं।
और एक रात चोरी की नीयत से उनके कमरे में गई।
उन्होंने ऐसा करने से इसे बहुत रोका
लेकिन इसने अपना आपा खो दिया।
और इससे दोनों के सिर पर वार कर दिया
-जिसकी वजह से दोनों की जान चली गई। -
जज साहब, ये ओपन एंड शट केस है।
सारे सबूत, गवाह और सर्कमस्टैंशियल एविडेंसेस इसके ख़िलाफ़ हैं।
ऐसा घिनौना अपराध करने वाले को सख़्त से सख़्त सज़ा मिलनी चाहिए,
-ये कोर्ट से मेरी गुज़ारिश है। -
सारे गवाहों और सबूतों को मद्देनज़र रखते हुए
ये अदालत आरोपी मंजू सिंह को 28 साल के लिए क़ैद-ए-बा-मशक़्क़त
और 25 हज़ार जुर्माने की सज़ा सुनाती है।
अदालत की कार्यवाही स्थगित की जाती है।
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ये, इस हफ़्ते की लिस्ट।
अरे, कभी एक दिन तो अच्छी चाय बना दिया करो।
अरे, मंजू दीदी, चार बीड़ी मँगवा दो, कल से अच्छी चाय बना दूँगी।
हाँ। ठीक है ये सब।
पर पहले का हिसाब-किताब क्लियर करो।
उधारी नहीं चलेगी अब।
हाँ।
तेरे आशिक की अच्छाई का कितना ही फ़ायदा उठा लेंगे हम।
तेरे जाने के बाद तो हमें उधार भी नहीं देगा वो।
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लॉटरी
हाँ, बताइए।
लिस्ट तैयार है सामान की। कब ले सकते हैं?
-आज रात को ही आ जाऊँ? -हम्म।
पहले सपने में न मतलब... हैलो।
हैलो।
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-नाम क्या है? -जी, समर सिंह।
-पूरा नाम? -समर सिंह चौहान।
-कौन से वाले चौहान हो? -सर जी, ऊँचे वाले।
-तो गाड़ी थोड़ा तेज़ चलाएँ, चौहान साहब। -जी, साहब।
एक इनिशियल यहाँ।
जी, सर।
और, सर, आप से पहले वाले मिहिर मानिक साहब ने न
एक ऑर्डरली क्वार्टर के लिए अप्रूवल डाला था।
आप आदेश दें, हम काम शुरू करा देते हैं, सर।
हमें शांति में अकेले रहना पसंद है, पंडित जी।
पता नहीं, कौन-कौन जात का मज़दूर आएगा,
कौन जात का अर्दली आएगा घर में,
घर गंदा करेगा।
हम साइन कर देते हैं।
अगले जेलर साहब के लिए बनवा लीजिएगा
लेकिन हमारे रिटायरमेंट के बाद।
हम यहाँ से चले जाएँ उसके बाद। ठीक है?
एकदम संत हैं आप, सर।
और, सर, आपने कहा था कि महिला वॉर्ड एक दिन निरीक्षण करेंगे। कब?
हाँ, तो जेलर साहिबा को इंटिमेशन भेज दीजिए।
-चलते हैं हम। -हम्म।
-जाएँ, सर? -चलो।
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मंजू!
ए, मंजू!
ए। श्श... श्श...
चारु!
खोल न।
पागल है?
मेरी ड्यूटी खत्म होने को है।
ठहर।
ये ले।
अब खोल।
-जल्दी आ जाना। -हाँ।
17 रुपए। राजेश यादव!
सत्ताईस...
श्श...
आ गईं आप?
कुछ समय बाद ऐसे खुले में साँस लेने के लिए
आपको ऐसे छुप-छुप के नहीं आना पड़ेगा।
अच्छा है।
क्या पता।
अब तो इनके बीच रहना अच्छा लगता है।
कम से कम अपने हिसाब से तो जी रही हूँ।
नया जेलर आया है। सुना कि नहीं आपने?
ऊँच-नीच में फँसा रहता है।
वैसे आप तो सिंह हैं न?
सिंह साहब! अरे, हाँ।
वो लिस्ट भी दे दीजिए अभी।
कैमरा-वैमरा लगा रहे हैं पूरे जेल में इधर-उधर।
तो दिक्कत हो जाएगी।
-पहले पिछला हिसाब कर लेती हूँ। -छोटा महसूस करा देती हैं आप।
बाकी चुड़ैलों से तो हिसाब करना पड़ेगा न।
हाँ।
-करना तो पड़ेगा ही। -
तिजोरी खोलिए।
ये किस लिए?
आज बर्थडे है मेरा, बर्थडे।
आज न मैं 59 का हो...
ओह।
तो फिर तो तोहफ़ा हमें देना चाहिए।
-एक बात बताइए। -क्या?
आप इतने सालों से हमें मिल रहे हैं,
आपने कभी अपने परिवार के बारे में हमें नहीं बताया।
एक बीवी थीं।
अच्छी थीं।
भगवान ने उनको अपने पास बुला लिया।
एक बेटा था। मतलब, है।
पढ़ाया-लिखाया...
लोन ले के विदेश भेज दिया।
बाद में खबर मिली, शादी कर चुके हैं साहबजादे।
फोन-वोन भी नहीं उठाते।
अब कर्ज़ तो चुकाना है।
तो टूथपेस्ट, कंघी अंदर,
गोभी, मूली बाहर।
लेकिन एक बात बताएँ?
हमको न इस बात का कभी कोई मलाल ही नहीं रहा।
-पूछिए क्यों। -क्यों?
आप से मुलाक़ात हो जाती है न।
बहुत सुकून मिलता है।
-और बच्चे? -किसके?
बेटे के।
हाँ, लड़की है।
एरिका नाम रखा है।
बताइए।
एरिका कोई नाम होता है भला?
एरिका मिश्रा!
एरिका!
वैसे इतना बुरा नाम भी नहीं है।
हाँ, आपको अच्छा लग रहा है, तो अच्छा ही होगा।
आज तारे बड़े ख़ूबसूरत से नज़र आ रहे हैं।
आपको भी वैसे ही नज़र आ रहे हैं जैसे मुझे नज़र आ रहे हैं?
हम्म?
बैरक नंबर पाँच के कैदी ठीक हैं।
अच्छा, हम चलते हैं।
नहीं तो हमारी... मेरी वजह से चारुलता की नौकरी चली जाएगी।
हम चलते हैं।
बैरक नंबर चार के कैदी ठीक हैं।
हाँ, हाँ, मैं यहीं हूँ। मैं यहीं हूँ।
हैप्पी बर्थडे, मिश्रा जी।
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हाँ, भैया, खोलो-खोलो द्वार।
बहुत काम है। बहुत ठंडी है आज।
क्या, मिश्रा जी, आजकल खूब चाँदी कट रही है। हैं?
आजकल हर दो-चार दिन में ले जा रहे हो सब्जियाँ।
हाँ, तो?
खाद, पानी भी तो दिलवाते हैं।
दो बार दिन में ओवर टाइम करते हैं।
-ठीक है, ठीक है। -तब जा के उगती हैं सब्जियाँ।
- चलो, खोल दो, भैया। -अरे, चेक कर लें एक बार?
फिर टमाटर का सत्यानाश करेगा।
-ठीक है। कर लेने दो। -अरे अरे, गोभी।
गोभी, गोभी में छेद हो जाता है।
ना कर, भाई। ए, भाई। ए, भाई।
काट के बेचना पड़ता है।
सारी मेहनत पर पानी फिर जाता है।
-क्या कर रहे हो, यार? -ड्यूटी नहीं करें अपनी?
घंटा आपकी मेहनत है।
क्या बोले तुम? ए, ए, ए, ए!
चोरी करने में भी मेहनत लगता है। समझ गए?
और तुम तो मत बोलो।
अनुकम्पा पर हो, साहबजादे, तुम।
-अपने पिताजी की बदौलत। -चलो, छोड़ो। हम खोल रहे हैं ताला।
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