The first 200 lines.
बुद्ध ने कहा है कि, "जीवन दुख है।
जन्म से मरने तक बस… दुख ही दुख।"
पर ये बात जीते जी नहीं, मरने के बाद समझ में आती है।
तेरा भी मन कर रहा है ना मरने का?
कोई नहीं, कोई नहीं, मर ले।
मैं रोकूँगा नहीं, बस थोड़ा सच बताऊँगा।
पता है इंसान जब रस्से से लटकता है,
तो सबसे पहले उसकी सी-2 और सी-3 वर्टेब्रा टूटती है।
तुरंत लकवा! पैरालिसिस।
फिर धीरे-धीरे साँस घुटने से वो बेहोश हो जाता है।
मगर पूरी साँस जड़ से उखड़ने में, कोई आठ से दस मिनट लगते हैं।
पर लटकने वाले को कुछ फर्क नहीं पड़ता,
क्योंकि वो तो बेहोश होता है ना।
लेकिन ये सब जेल वाली फाँसी में होता है।
कमरे वाली फाँसी थोड़ी अलग है, भाई।
रस्सी छोटी और छत नीची होने की वजह से,
सी-2, सी-3 टूट नहीं पाती।
और तुम हवा में लटकते रहते हो…
पूरे होशोहवाश में।
एक-एक सेकंड, एक सदी जैसा लगता है।
और तब घुटती-घुटती साँसों के साथ,
सब याद आता है…
माँ, बाप, यार, दोस्त, भाई, बहन…
और हर वो इंसान जो तुमसे प्यार करता है।
अफ़सोस होता है कि, "क्या यार थोड़ा और जी लेते।"
तुम चिल्लाना चाहते हो, "बचाओ! बचाओ!"
पर ना गले से आवाज़ आती है
और ना गली से कोई बचाने वाला।
वैसे बुद्ध ने ये भी कहा है कि, "जीवन के दुख को अगर झाँक कर देख लो,
तो दुख भी सुख हो जाता है।"
ओए दुखी आत्मा!
उस रस्सी का क्या करेगा?
जो इतने अरमानों से खरीद के लाया था।
करेगा क्या बे?
उसपे अपनी गीली चड्डी सुखा और मस्त हो जा।
ये किसी भी रस्सी का बेस्ट यूज़ है।
तो सो मत भेनचोद! जाग!
ये शो मरने के नहीं,
जीने के बारे में है।
क्रैश कोर्स
आरजे इंस्टीट्यूट
ए राकेश, लेके आ ना उसको।
अरे!
अरे राकेश, दो मिनट यार, दो मिनट।
भाई, एक बात बता।
ये रिज़ल्ट सीनियर्स का है।
इसमें हम जूनियर्स का क्या काम?
नाचना, गाना, जलसा करना और करवाना।
छुट्टी है भाई, छुट्टी है। ऑफिशियल वाली छुट्टी है।
आज दरअसल, ऑफिशियली बीयर और बिरयानी बाँटनी चाहिए।
सत्या!
तुझे बीयर-बिरयानी सब कुछ खिलाऊँगा।
प्लीज़ तेरा फ़िज़िक्स का नोट दे दे, भाई।
-कल। -ओके।
यहाँ सब सूखा पड़ा हुआ है…
और इसको देखो, पहाड़ में डूबा हुआ है। बेटीकढ़ाई!
सत्या, भाई…
कमरे में ना, एक-एक बेली डांसर भी होनी चाहिए।
बेली डांसर?
हाँ, वो जो ऐसा, ज़मीन पे लेटके
एक रूपए का दिरहम ऐसा गर्दन से… करके ऐसे नाभी तक लेके आती है वो।
तेरा उसी में निकल जाता होगा?
अरे यार! सेक्सी लगता है यार।
हाथगाड़ी का साधन।
इकसठ-बासठ, इकसठ-बासठ, इकसठ-बासठ।
बेबी, मेरा हो रहा है…
बेस्ट इंस्टीट्यूट, बेस्ट फैकल्टी, बेस्ट रिज़ल्ट, आरजे इंस्टीट्यूट
तेजल!
तेजल!
विधि गुप्ता काफी नहीं थी क्या?
अब उसकी रूममेट पे भी डोरे डाल रहा है।
हाँ?
-कैसी हो? -अच्छी हूँ।
क्या चल रहा है?
अरे भई, हाथ चल रहा है, पैर चल रहा है, साइकल चल रही है, सब… क्या चल रहा है!
अरे वो रिज़ल्ट्स डे आ रहा है ना तो… थोड़ी घबराहट होती है।
थोड़ा…
तुम लोग की भी कल छुट्टी है?
बत्रा सर हैं ना, वो तो रिपब्लिक डे पे भी क्लासेज़ लगा देते हैं।
तो पढ़ाई, पढ़ाई--
क्या फायदा?
एक भी तो टॉप टेन में आता है नहीं।
इतनी अकड़ क्यों है, भाई?
नंबर वन इंस्टीट्यूट से हैं हम।
नाम तो सुना ही होगा…
दो बार रैंक आ गई तो इतनी गर्मी?
हर बार बत्रा की ही रैंक आती थी।
लेकिन हमारी तरह दस के दस टॉप नहीं।
अरे, चल!
और ये जिंदल तलवंडी के छोर से बोलिंग करते हुए…
हैट-ट्रिक!
संभाल के! इस बार बत्रा का छक्का ना लग जाए।
बत्रा के तो छक्के दिख ही रहे हैं।
क्या?
-क्या, हाँ? -क्या…
क्या? हैलो, उठ क्या रहा है? पीछे देख, राकेश है।
-हैलो… -ए! छोड़ ना, सिद्धान्त!
ओए!
तुम लड़कों को हर जगह ये माचोपंती दिखानी ज़रूरी है?
क्यों नहीं दिखाएँ, हाँ? क्यों नहीं? माचो हूँ मैं।
देख, तू इतना सा है।
इतना एटीट्यूड क्यों दिखाता है?
वो जेनेटिक्स का मज़ाक उड़ा रही है, तुम लोग हँस रहे हो भेनचोद।
-दोस्त… -हाँ?
आखिर में हम हैं तो दोस्त ही ना यार।
-है ना? -हाँ ना यार, फिर भी तू--
हट!
-अरे सुन, सुन, सुन, सुन! -हाँ?
सच में…
हट!
सर, रिज़ल्ट आने के दस मिनट के अंदर ही, ये सब सबसे ऊपर होंगे।
रियल टाइम एड्वर्टाइज़िंग।
और हमारे पास दो ऑप्शंस भी हैं।
ये और ये वाला।
वो ठीक नहीं है।
ये।
लिस्ट, मैम।
हाँ…
सर, टॉप टेन रैंक्स, अपने आंकलन के हिसाब से।
रिज़ल्ट पोर्टल
सर, पहला, दूसरा और पाँचवाँ रैंक बत्रा सर के स्टूडेंट्स का आया है।
देख लिया मैंने।
तो, अगर दो लाइन समानान्तर हैं,
तो उनके बीच बनने वाला एंगल ज़ीरो होगा।
इसी तरह तीसरे इक्वेशन में, टैन थेटा ज़ीरो के बराबर होगा।
इसलिए, एम-1, एम-2 के बराबर होगा।
बच्चों…
सब सहमत हो उससे?
-हाँ, सर। -हाँ, सर।
ठीक है! ओके।
आप लोग सही हैं।
- बहुत अच्छे। -थैंक यू।
बहुत अच्छा। गुड बॉय।
सच में? अरे यार मज़ा आ जाएगा।
शांति रखिए।
शांति रखिए।
शांत हो जाओ।
- एके सर! - एके सर!
-एके सर! -एके सर!
-एके सर! -एके सर!
-एके सर! -एके सर!
बस करो। बस। थैंक यू।
थैंक यू, थैंक यू। थैंक यू, गाइज़।
-एके सर! -एके सर!
-एके सर! -एके सर!
-एके सर! -एके सर!
-एके सर! -एके सर!
चलो।
-एके सर! -एके सर!
-एके सर! -एके सर!
-एके सर! -एके सर!
कोटा के टॉप इंस्टीट्यूट के फैकल्टी मेम्बर्स हैं हम लोग।
ना-ना, बैठ जाओ, बैठ जाओ, बैठ जाओ आप लोग। बैठ जाओ।
आपके आराम के समय को खराब करने के लिए माफ़ी चाहता हूँ।
सर, हम लोग इसी बारे में बात कर रहे थे कि क्यों इस साल के रिज़ल्ट्स--
सर, आप… यहाँ बैठिए, प्लीज़।
नहीं, प्रोफेसर लालचंद जी, ये आपकी कुर्सी है। आप अपनी कुर्सी पर विराजमान रहो।
प्लीज़!
आप सब लोग अपनी-अपनी कुर्सियों पर बैठे हों, बड़े तन के, अपने ढूंगे टिकाए हुए।
लेकिन फिर भी आपकी कुर्सियाँ हिल क्यों रही हैं?
कितने बच्चे इंजीनियर बनने आते हैं कोटा में हर साल?
मुझे बताओ आप।
करीबन दो लाख।
आरजे इंस्टीट्यूट में कितने?
सब कोर्सेज मिलाके… करीबन एक लाख।
- पचास प्रतिशत। -हाँ जी।
राइट?
राइट? पचास प्रतिशत…
पचास प्रतिशत होने के बावजूद,
फ़र्स्ट रैंक नहीं ला पाए।
क्यों?
टॉप रैंक क्यों नहीं आई?
टॉप रैंक क्यों नहीं?
मुझे बताओ आप!
सर, मैथ और केमिस्ट्री में तो बहुत अच्छा किया स्टूडेंट्स ने,
जैसे हर साल करते हैं।
लेकिन… फ़िज़िक्स के चक्कर में थोड़ा रह गया।
सर, भले ही हमारी टॉप रैंक ना आई हो,
लेकिन टोटल सिलेक्शन की संख्या
पाँच हज़ार से बढ़कर, साढ़े पाँच हज़ार हो गए हैं सर।
तो वो साढ़े पाँच हज़ार के फोटो होर्डिंग पे चिपका दूँ क्या?
टॉपर का गेम है ये।
टॉपर का गेम।
आईआईटी से पास होने के दस साल बाद
जो पैकेज आपको मिलना चाहिए था,
वो फ़र्स्ट ईयर में मैं आपको देता हूँ।
बुरा मत मानना…
हाथ फैला के मेरे सामने आते हों।
मैं देता हूँ घर, गाड़ी,
और तुम्हारे बच्चों और पैरेंट्स के लिए हॉस्पिटल का खर्चा।
सब के लिए।
बदले में मुझे क्या मिल रहा है?
कुछ नहीं।
बत्रा के पाँच में से तीन,
और जिंदल के बस दो!
मुझे नंबर वन चाहिए।
दो नंबर बर्दाश्त नहीं कर सकता मैं।
मुझे नंबर वन चाहिए।
वन!
इस बार तो बैंड बजा दी हमने जिंदल की।
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